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CBI के मुकदमा दर्ज करने से पहले ही IAS विजय शंकर की मौत, आत्महत्या या हत्या?

CBI के मुकदमा दर्ज करने से पहले ही IAS विजय शंकर की मौत, आत्महत्या या हत्या?

कल शाम 7:00 बजे बेंगलुरु स्थित अपने घर में आईएएस  बी एम विजय शंकर की डेडबॉडी पाई गई । वह अपने घर में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाए गए। विजय शंकर फिलहाल निलंबित चल रहे थे और अपने घर पर ही रह रहे थे। उन पर आईएमए (आई मॉनिटरी एडवाइजरी) की पोंजी स्कीम पोटाले के मास्टरमाइंड मंसूर खान को रिश्वत लेकर क्लीनचिट देने का आरोप लगा था। इसके चलते उन पर पूर्व में न केवल मुकदमा दर्ज हुआ था बल्कि एसआईटी की जांच भी हुई थी।

निवेशकों के करीब 4000 करोड रुपए लेकर भागा मंसूर अली खान विदेश में जाकर कहीं छुप गया। वहीं से वह वीडियो जारी करके कभी आत्महत्या करने की धमकी दे रहा था तो कभी नेताओं और अधिकारियों की पोल खोलने की बात कह रहा था। फिलहाल बहुचर्चित घोटाले में सीबीआई जांच चल रही थी। कहा जा रहा था कि सीबीआई पूर्व आईएएस ऑफिसर बी एम विजय शंकर पर मुकदमा दर्ज करने ही वाली थी। इससे पहले ही विजय शंकर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।

हालांकि उनकी मौत को आत्महत्या करार दिया जा रहा है। लेकिन दूसरी तरफ यह भी कहा जा रहा है कि पोंजी स्कीम घोटाले में वह बहुत बड़े गवाह के रूप में सामने आने वाले थे। बताया जा रहा है कि पिछले दिनों उन्होंने सीबीआई के समक्ष सब कुछ सच उजागर करने का मन बना लिया था। लेकिन इससे पहले ही उनकी मौत हो गई। उनकी मौत कई सवाल खड़े करती हैं। चर्चा है कि पोंजी स्कीम घोटाले बाजों में कहीं उनको सच उजागर करने के डर से तो मौत के घाट नही उतार दिया। हालांकि यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा कि विजय शंकर की मौत आत्महत्या है या हत्या।

गौरतलब है कि मोहम्मद मंसूर खान की कम्पनी आई मॉनिटरी एडवाइजरी यानी आईएमए ने हलाल बैंकिंग के नाम पर तकरीबन 1 लाख लोगों से 4 हजार करोड़ रुपए जमा करवाये थे और एक दिन अचानक कंपनी को ताला लगाकर भाग गया।मंसूर खान ने 2006 में आई मॉनेटरी एडवायजरी नाम से एक इस्लामिक बैंक और हलाल निवेशक कंपनी को शुरू किया था। आईएमए ने 14 से 18 फीसदी प्रति माह के बीच निवेश पर ब्याज देने की बात भी कही थी।

कंपनी ने आम जनता खासतौर पर मुस्लिम महिलाओं से चार हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम आठ ली थी। जिसमें 30 हजार मुस्लिम निवेशकों ने अधिक फायदे के लिए अपनी मोटी रकम मंसूर खान को दे दी थी। आईएमए सोने-चांदी की ट्रेडिंग, ज्वैलरी, फार्मेसी, रियल एस्टेट, एजुकेशन, हाइपर मार्केट, पब्लिशिंग और हेल्थकेयर सेक्टर में काम करती थी।

9 जुलाई 2019 को कर्नाटक के आईएमए ग्रुप पोंजी घोटाले में एसआईटी ने बंगलूरू अर्बन डिस्ट्रिक के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर आईएएस अधिकारी बी एम विजय शंकर को गिरफ्तार किया था। विजय शंकर पर आईएमए के संस्थापक मोहम्मद मंसूर खान से 1.5 करोड़ रुपये लेने का आरोप है।

CBI के मुकदमा दर्ज करने से पहले ही IAS विजय शंकर की मौत, आत्महत्या या हत्या?

आरोप है कि पूर्व आईएएस अधिकारी विजय शंकर ने रिश्वत लेकर कंपनी के पक्ष में रिपोर्ट दी। अब तक इस मामले में एसआईटी पांच लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। हाल ही में जांच एजेंसी ने बंगलूरू नार्थ सब डिवीजन के सहायक कमिश्नर एनजी नागराज और एक ग्रामीण अकाउंटेंट मंजूनाथ को गिरफ्तार किया था। इन सभी पर खान से चार करोड़ रुपये की रिश्वत लेकर क्लीनचिट देने का आरोप है। इसके अलावा एक पार्षद और बंगलूरू विकास प्राधिकरण के एक अधिकारी को भी गिरफ्तार किया गया था।

इस मामले की जांच कर रही एसआईटी ने पाया कि उस वक्त बेंगलुरु अर्बन के डीसी पद पर तैनात विजय शंकर ने कम्पनी के निवेश के तरीके को सही ठहराते हुए कम्पनी को क्लीन चिट देने की शिफारिश राज्य सरकार से की थी। जाँच में यह भी पता चला कि इसके एवज में विजयशंकर ने मंसूर खान से डेढ़ करोड़ की रिश्वत ली। इस मामले में उनकी गिरफ्तारी के बाद सरकार ने उन्हें सस्पेंड कर दिया था। मामले में जमानत मिलने के बाद वे घर पर रह रहे थे।

इसके बाद सीबीआई ने इस मामले को टेक ओवर कर लिया और 2 सप्ताह पहले कर्नाटक सरकार से विजय शंकर और 2 और अधिकारियों के खिलाफ चार्ज शीट दाखिल करने के लिए मंजूरी मांगी थी। फिलहाल सीबीआई ने विजय शंकर के खिलाफ मुकदमा करने की पूरी प्लानिंग कर ली थी। सरकार से भी इसकी स्वीकृति ले ली थी। लेकिन इससे पहले ही बी एम विजय शंकर अपने घर में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाएं गए।

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