[gtranslate]
Country

सौ पार, लेकिन संकट बरकरार

भाजपा ने राज्यसभा में सौ सदस्यों का आंकड़ा पार कर लिया है। पिछले तीस बरसों में किसी भी पार्टी के सौ सदस्य राज्यसभा में कभी नहीं रहे थे। 245 सदस्यों वाली राज्यसभा में कांग्रेस के सौ से अधिक सदस्य 1988 में थे। 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के समय भाजपा के राज्यसभा में कुल 55 सदस्य से थे जो अब बढ़कर 101 हो गए हैं। ऐसा भी पहली बार हुआ है कि पूर्वोत्तर के राज्यों से कांग्रेस का एक भी सदस्य अब राज्यसभा में नहीं है। कांग्रेस के अब इस सदन में मात्र 32 सदस्य रह गए हैं और भाजपा अब पूर्ण बहुमत से मात्र 22 सदस्यां की दूरी पर है। जाहिर है भाजपा आलाकमान इस आंकड़े को पाने चलते गद्गद है तो कांग्रेस नेतृत्व चिंतित। चिंतित लेकिन भाजपा नेतृत्व भी है क्योंकि सौ के इस जादुई आंकड़े पर टिके रहना उसके लिए आने वाले दिनों में आसान नहीं रहने वाला है।

इस वर्ष राज्यसभा के 57 और सदस्य रिटायर होने जा रहे हैं। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से कई भाजपा सदस्य रिटायर हो जाएंगे। इनमें से केवल उत्तर प्रदेश ऐसा राज्य है जहां खाली होने जा रही 11 सीटों में से पांच पर अभी भाजपा का कब्जा है। उसे यहां से तीन सीटों का लाभ होगा यानी उसके 8 सदस्य राज्यसभा पहुंचेंगे। राजस्थान में खाली होने जा रही चारों सीटें अभी तक
भाजपा के पास हैं। चुनाव बाद इनमें से तीन पर कांग्रेस का कब्जा हो जाएगा। इसी प्रकार आंध््रा प्रदेश में भाजपा को तीन सीट का नुकसान होगा तो झारखंड और छत्तीसगढ़ से भी उसकी एक-एक सीट कम हो जायेगी। उत्तराखण्ड से अवश्य उसे एक सीट का फायदा मिलेगा। अन्य राज्यों में कमोवेश स्थिति वर्तमान समान ही बनी रहेगी।

राज्यसभा के कुल 250 सदस्य हो सकते हैं जिनमें विभिन्न राज्यों के 233 निर्वाचित सदस्य होते हैं और राष्ट्रपति साहित्य, विज्ञान एवं सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 12 सदस्य राज्यसभा के लिए नामित कर सकते हैं। वर्तमान राज्यसभा में कुल 245 सदस्य हैं जिनमें से 233 चुने गए एवं 12 नामित हैं। मनोनीत सदस्यों में से सात इस वर्ष रिटायर होने जा रहे हैं। इन सात में से पांच सदस्य भाजपा की सदस्यता ले चुके थे केवल दो सदस्यों नरेंद्र जाधव एवं मैरी कॉम किसी भी पार्टी की सदस्य नहीं हैं। यदि राष्ट्रपति द्वारा सात नए सदस्य मनोनीत होने के बाद भाजपा की सदस्यता ले भी लेते हैं तब भी भाजपा अपने वर्तमान 101 सदस्यों के आकड़े को बरकरार नहीं रख पाएगी। पार्टी सूत्रों की मानें तो भाजपा आलाकमान हर कीमत पर इस आंकड़े को बरकरार रखना चाहता है। खबर जोरों पर है कि इस लक्ष्य को पाने के लिए आने वाले महीनों में झारखंड, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कुछ बड़ा ‘खेला’ हो सकता है। भाजपा के लिए संकट केवल इस जादुई आंकड़े को बरकरार रखने का ही नहीं बल्कि अपने उम्मीदवारों को राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति बनाने का भी है। चार राज्यों में मिली शानदार जीत के बाद भी राष्ट्रपति चुनाव में शर्तिया जीत के लिए भाजपा के पास 9,194 वोट कम हैं। इस कमी को पूरा करने के लिए भाजपा को बीजू जनता दल अथवा वाईएसआर कांग्रेस की मदद चाहिए होगी। दूसरी तरफ उपराष्ट्रपति के लिए भाजपा के सामने ऐसी कोई मजबूरी नहीं है।

गौरतलब है कि राष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के साथ-साथ राज्य विधानसभाओं के सदस्य भी मतदाता होते हैं, वहीं उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए केवल लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य ही मतदाता होते हैं। कुल मिलाकर भाजपा आलाकमान राज्यसभा में भी अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा पाने यानी 123 सांसद होने से मात्र 22 सदस्य दूर तो है लेकिन उसके सामने बड़ा संकट वर्तमान आकड़े 101 को बनाए रखने का भी है।

You may also like

MERA DDDD DDD DD