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लोकसभा चुनाव 2024 से पहले विपक्ष की ओर से एनडीए के खिलाफ ‘महागठबंधन’ बनाने की कोशिशें जारी हैं। हालांकि विपक्षी दलों की ओर से एकजुटता के लिए जारी प्रयास अभी तक रंग नहीं दिखा पाया है। हाल ही में हरियाणा के फतेहाबाद में इंडियन नेशनल लोक दल (इनेलो) ने रैली आयोजित की। इसमें कई विपक्षी दल एक मंच पर नजर आए, लेकिन कुछ अहम पार्टियां नदारद भी रहीं। विपक्षी दलों में शामिल डीएमके, टीएसआर, टीएमसी, ‘आप’ और कांग्रेस पार्टी के इस रैली में शामिल नहीं होने से विपक्षी एकता के प्रयासों को लेकर बवाल खड़े होने लगे हैं।

दरअसल लंबे समय तक कांग्रेस विरोधी होने का इतिहास रखने वाले नेता इनेलो के ओम प्रकाश चौटाला और शिरोमणि अकाली दल के सुखबीर सिंह बादल, एनसीपी के शरद पवार, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सीताराम येचुरी व शिवसेना के अरविंद सावंत जैसे अन्य सीनियर नेता एक साथ एक मंच पर मौजूद थे। बिहार के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव भी मंच पर थे। इस रैली को गैर-भाजपा दलों के बीच एकजुटता की दिशा में एक कदम के रूप में देखा जा रहा था।

लेकिन अहम विपक्षी दलों में आने वाले कई दल इस रैली में शामिल नहीं हुए। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी को निमंत्रण दिया गया था या नहीं। वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख फारूक अब्दुल्ला, मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने मैसेज भेजकर में रैली शामिल न हो पाने की मजबूरी बताई थी।

गौरतलब है कि नीतीश कुमार इन दिनों कांग्रेस सहित गैर-भाजपा दलों के बीच एकता की जरूरत पर जोर दे रहे हैं। उन्होंने पिछले महीने भाजपा से नाता तोड़ लिया था और राहुल गांधी, पवार और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल सहित कई प्रमुख नेताओं के साथ बातचीत करने के लिए दिल्ली आए थे। हाल ही में हुई रैली में भी उन्होंने कांग्रेस और वाम दलों समेत सभी विपक्षी पार्टियों से एकजुट होने की अपील कर कहा कि विपक्षी दलों का मुख्य मोर्चा यह तय करेगा कि 2024 के आम चुनाव में भाजपा को बुरी तरह शिकस्त मिले।

नीतीश कुमार इस पूरी मुहिम के केंद्र में हैं। वे तीसरे मोर्चे के बजाए कांग्रेस को शामिल कर महागठबंधन बनाने की कवायद में जुटे हैं, मगर कांग्रेस अभी तक नीतीश के साथ पूरी तरह खड़ी नजर नहीं आई है। हालांकि पार्टी विपक्षी एकता की पक्षधर है। नीतीश कुमार और लालू यादव की कांग्रेस अध्यक्ष से मुलाकात से पहले विपक्ष के कई नेता हरियाणा के फतेहाबाद में भारतीय राष्ट्रीय लोकदल की रैली में शामिल हुए।

देवीलाल की 109वीं जयंती पर आयोजित इस रैली में इनेलो कई विपक्षी नेताओं को एक मंच पर लाने में सफल जरूर रहा। लेकिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव सहित कई दलों के शामिल नहीं होने से राजनीतिक विशलेषक सवाल उठा रहे हैं कि ऐसे में कैसे भाजपा और पीएम मोदी से मुकाबला कर पाएगा विपक्ष। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि विपक्षी एकता इतनी भी आसान नहीं है। सबसे पहले तो यह कि क्षेत्रीय दलों का जन्म कांग्रेस के खिलाफ हुआ है। ऐसे में सभी विपक्षी दलों का अगर साथ आना आसान नहीं है। यह हो गया तो नेता और कौन पार्टी कितनी सीट पर चुनाव लड़ेगी, इस पर सहमति बनना आसान नहीं है।

 

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