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अयोध्या मामले पर आज आएगा ऐतिहासिक फैसला

देश का सबसे बड़ा विवाद आज खत्म हो जाएगा।देश की सर्वोच्च न्यायालय सुप्रीम कोर्ट सुबह 10.30 बजे अयोध्या केस पर अपना फैसला सुनाएगा।इस ऐतिहासिक फैसले के मद्देनजर अयोध्या के चप्पे -चप्पे की सुरक्षा बढ़ाई गई है, साथ ही पूरे उत्तर प्रदेश में धारा 144 लागू की गई है फैसले से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत आरएसएस प्रमुख मोहन भागवतऔर तमाम धार्मिक संगठनों ने फैसले का स्वागत करने और शांति बनाए रखने की अपील की है।  अयोध्या पर फैसला आने में बस कुछ वक्त बचा है, जिससे पहले सुप्रीम कोर्ट के बाहर भी  सुरक्षा बढ़ाई गई है, साथ ही पूरे इलाके में धारा 144 भी लागू कर दी गई है।

इससे पहले अयोध्या विवाद पर 30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला आया था, इस फैसले में कोर्ट ने 2.77 एकड़ जमीन को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्माही अखाड़ा और रामलला के बीच बांटने का आदेश दिया था।  कोर्ट के इस आदेश को ही सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिस पर लंबी सुनवाई के बाद आज सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ अपना फैसला सुनाने जा रही है।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई में पांच जजों की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की और अब यही पीठ फैसला सुनाएगी। इस पीठ में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस एसए बोबड़े, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नज़ीर शामिल हैं, इन पांचों जजों ने अयोध्या विवाद की सुनवाई की है, जिसके बाद आज इस मामले में फैसला आ रहा है.

अयोध्या पर फैसले के मद्देनजर राजनीतिक दलों से लेकर सामाजिक और धार्मिक संगठनों तक हर तरफ से शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है। आज  सुबह 10.30 बजे सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ जाएगा, जिसके बाद ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की लीगल कमेटी के संयोजक जफरयाब जिलानी मीडिया को संबोधित करेंगे।  जिलानी के साथ मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के दूसरे सदस्य भी मौजूद रहेंगे।

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर 40 दिन तक चली मैराथन सुनवाई के दौरान हिंदू और मुस्लिम पक्ष की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने 16 अक्तूबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

केशवानंद भारती मामले में रिकॉर्ड 68 दिन तक चली सुनवाई के बाद अयोध्या भूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में दूसरी सबसे लंबी सुनवाई हुई थी। वहीं, फैसले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था और चौक चौबंद कर दी गई है। इस बीच, अयोध्या मामले पर फैसले के मद्देनजर यूपी सरकार ने सोमवार तक सभी स्कूल-कॉलेजों को बंद रखने के निर्देश दिए हैं।

अयोध्या में अर्धसैनिक बलों की तैनाती, हवाई सर्विलांस

उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने कहा, ‘हमने विश्वास बनाए रखने के उपाय किए हैं। हमने धार्मिक नेताओं और नागरिकों के साथ राज्य भर में लगभग 10,000 बैठकें कीं। हमने राज्य के लोगों से अपील की है कि वह सोशल मीडिया पर अफवाहें न फैलाए। अयोध्या में अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। हवाई सर्विलांस किया जा रहा है। खुफिया तंत्र को तैयार किया गया है, तलाशी की जा रही है। एडीजी रैंक के अधिकारी की अयोध्या में तैनाती की गई है ताकि ऑपरेशन पर नजर बनाकर रखी जा सके।’

अयोध्या पर फैसले को देखते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राज्य की कानून व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने के लिए कहा है।

रामलला के पुजारी ने की शांति बनाए रखने की अपील

रामलला के मुख्य पुजारी महंत सत्येंद्र दास ने कहा, ‘मैं सभी से अपील करता हूं कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करें और शांति बनाए रखें। प्रधानमंत्री ने सही कहा है कि अयोध्या का फैसला किसी की हार या जीत नहीं है।’

मध्यप्रदेश में स्कूल बंद

अयोध्या फैसले को देखते हुए मध्यप्रदेश के स्कूल और कॉलेज आज बंद रहेंगे।

मोबाइल सेवा और स्कूल बंद

अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मद्देनजर राजस्थान सरकार ने कल सुबह छह बजे तक के लिए मोबाइल सेवा बंद कर दी हैं।  इसके अलावा आज राज्य के सभी स्कूल बंद रहेंगे। जैसलमेर में 30 नवंबर तक के लिए धारा 144 लागू कर दी गई है।

ये जज सुनाएंगे फैसला

अयोध्या विवाद में मामले की सुनवाई करने वाली संवैधानिक बेंच में सीजेआई रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस शरद अरविंद बोबडे, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एस अब्दुल नजीर शामिल हैं। इन्हीं जजों की पीठ शनिवार को फैसला सुनाएगी।

इससे पहले कल 8 नवंबर शुक्रवार शाम को सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या भूमि विवाद मामले को सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में सूचीबद्ध कर लिया गया। दिन में सीजेआई गोगोई ने फैसला सुनाने से पहले उत्तर प्रदेश मुख्य सचिव राजेंद्र तिवारी और डीजीपी ओपी सिंह से मुलाकात की। सुप्रीम कोर्ट में हुई मुलाकात में सीजेआई ने फैसले के मद्देनजर सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा की। बताया जा रहा है कि सीजेआई ने पूछा, अयोध्या-यूपी के अन्य संवेदनशील इलाकों में मौजूदा स्थिति क्या है? क्या धार्मिक नेताओं को भरोसे में लिया गया? सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। केंद्र-राज्य सुरक्षा व्यवस्था पर समन्वय कर रहे हैं या नहीं।

मुलाकात के बाद मुख्य सचिव ने कहा, हम सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। सुरक्षा-व्यवस्था की लगातार समीक्षा की जा रही है। दोनों अफसर सीजेआई गोगोई के चैंबर में करीब एक घंटे तक रहे। बताया जा रहा है कि बैठक में अयोध्या केस की सुनवाई कर रही सीजेआई की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय सांविधानिक पीठ के बाकी चार सदस्य जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर भी शामिल थे।  दरअसल, यह मामला बेहद संवेदनशील होने की वजह से फैसला देने से पूर्व सुप्रीम कोर्ट सुरक्षा इंतजाम को लेकर आश्वस्त होना चाहता है।

सभी राज्यों को अलर्ट जारी

गृह मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को सभी राज्यों को अलर्ट जारी कर 4000 अर्द्धसैनिक बल यूपी भेजे थे। मंत्रालय के निर्देश के मुताबिक, सभी राज्यों की सरकारों ने सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद कर दी है। गृह मंत्रालय ने यूपी सरकार को अयोध्या में सभी सुरक्षा तैयारियों को सुनिश्चित करने के लिए विशेष निर्देश जारी किए है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर हुई थीं 14 अपील

साल 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2.77 एकड़ विवादित जगह को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्माही अखाड़ा और रामलला के बीच बराबर-बराबर बांटने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 14 अपील दायर की गई थीं।

225 गांव संवेदनशील/अतिसंवदेनशील चिह्नित

अयोध्या के फैसले को लेकर प्रशासन ने गांवों में भी सुरक्षा बलों की तैनाती की है। अयोध्या जिले के 225 से ज्यादा गांव और मोहल्ले संवेदनशील/अति संवेदनशील चिह्नित किए गए हैं। इन गांवों में पहले अप्रिय स्थिति बन चुकी है या इसकी आशंका रहती है। संवेदनशील स्थलों पर स्थित 95 से ज्यादा धर्मस्थलों को भी सुरक्षा के दायरे में लिया जाएगा।

फैसला आते ही प्रदेश में इंटरनेट बंद कराने के संकेत

यूपी के डीजीपी ओपी सिंह ने कहा है कि प्रदेश के 31 जिले संवेदनशील हैं। केंद्र से मिले 40 कंपनी अर्धसैनिक बल को इन्हीं जिलों में तैनात किया जाएगा। सबसे कड़ी सुरक्षा अयोध्या में होगी। उन्होंने संकेत दिए कि फैसला आते ही प्रदेश में इंटरनेट सेवा बंद की जा सकती है। धारा 144 लगाए जाने के साथ सभी जिलों में अस्थायी जेल बनाई जा रही हैं।

उन्होंने कहा, सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालने वाले 673 लोग निगरानी में हैं। 10 नवंबर को बारावफात और 11 से 13 को कार्तिक पूर्णिमा के लिए भी पुलिस को हाई अलर्ट किया गया है। 31 जिलों में अयोध्या, आगरा, मेरठ, मुरादाबाद, अलीगढ़, प्रयागराज, लखनऊ, वाराणसी, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, बागपत, बुलंदशहर, रामपुर, मैनपुरी भी शामिल हैं।

16000 वॉलियंटर्स तैनात

अयोध्या पुलिस ने सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार के दुष्प्रचार या किसी भी संप्रदाय के खिलाफ भड़काऊ कंटेंट के प्रसार पर नजर रखने के लिए जिले के 1600 स्थानों पर 16 हजार वॉलंटियर तैनात किए हैं। गड़बड़ी रोकने के लिए 3,000 लोगों को चिह्नित करके उनकी निगरानी की जा रही है।

78 रेलवे स्टेशनों पर बढ़ी सुरक्षा

अयोध्या पर फैसले को देखते हुए रेल पुलिस (आरपीएफ) ने भी एडवाइजरी जारी की है। सभी जोन कार्यालयों को भेजे गए सात पन्नों के दस्तावेज में प्लेटफॉर्म, स्टेशन और यार्ड पर खास निगरानी रखने को कहा गया है। भीड़भाड़ वाले 78 स्टेशनों पर सुरक्षा बढ़ाने को कहा गया है, जिनमें मुंबई, दिल्ली, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के स्टेशन शामिल हैं। रेलवे स्टेशन और आसपास मौजूद धार्मिक स्थानों की खास निगरानी करने को कहा गया है।

हर तरह से बरती जा रही है सतर्कता

अयोध्या पर आने वाले फैसले से पहले, हर तरह से सतर्कता बरती जा रही है। अयोध्या में 20 अस्थाई जेल बनाई गई हैं और 300 स्कूलों को सुरक्षा बलों के लिए रिजर्व किया गया है। इसके अलावा 30 बम निरोधक दस्ते भी तैनात किए गए हैं।

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