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योगी के ‘लव जिहाद’ कानून पर हाईकोर्ट की तलवार , शादी से पहले जरुरी नहीं नोटिस 

 पिछले साल 24 नवंबर को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कथित लव जिहाद के खिलाफ कानून बनाने का ऐलान किया था।  उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश  2020 नामक इस कानून का उल्लंघन करने पर कम से कम एक साल और अधिकतम पांच साल कैद तथा 15000 रुपए जुर्माने का प्रावधान किया गया था। जबकि नाबालिग लड़की, अनुसूचित जाति या अनुसूचित शादी जनजाति की महिला के मामले में यह सजा तीन साल से 10 वर्ष तक की कैद और 25000 रुपये जुर्माने की होगी। इसके अलावा सामूहिक धर्म परिवर्तन के संबंध में अधिकतम 10 साल की कैद और 50,000 रुपये जुर्माने की सजा का प्रावधान किया गया था । लेकिन अब इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस कानून के अंतर्गत दूसरे धर्म के शादी के इच्छुक युवक और युवती को राहत दे दी है। जिसके तहत अब 30 दिन पहले नोटिस देना होगा अनिवार्य नहीं होगा।
बताया जा रहा है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने यह फैसला उस मामले पर सुनाया जिसमें दूसरे धर्म के लड़के से शादी की इच्छा रखने वाली एक बालिग लड़की को हिरासत में रखा गया था। इस जोड़े ने कोर्ट से गुहार लगाई कि वह स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी करना चाहते हैं, लेकिन इसके तहत 30 दिन पहले नोटिस देना होगा। ऐसे नोटिस का प्रदर्शन कई मुश्किलों को बढ़ावा देगा। साथ ही इस तरह का नोटिस उनकी निजता का हनन है। इस नोटिस से उन पर निश्चित तौर पर सामाजिक दबाव पड़ रहा है, जिससे उन्हें अपनी मर्जी से जीवनसाथी चुनने के अधिकार में भी दखल हो रहा है।
इस मामले पर हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि जो लोग शादी करना चाहते हैं, वे मैरिज अफसर से लिखित अपील कर सकते हैं कि 30 दिन पहले नोटिस को पब्लिश किया जाए या नहीं। अगर शादी के इच्छुक जोड़े इस नोटिस को सार्वजनिक नहीं करना चाहता है तो मैरिज अफसर को ऐसा कोई नोटिस पब्लिश नहीं करना चाहिए। साथ ही इस पर किसी भी तरह की आपत्ति पर ध्यान नहीं देना चाहिए। उसे इस शादी को विधिवत पूरा करवाना चाहिए। साथ ही कोर्ट ने कहा कि मैरिज अफसर इस एक्ट के तहत किसी भी शादी को वैधता देते वक्त उम्र, पहचान और राजीनामे संबंधी जांच कर सकता है। अगर उसे इस संबंध में किसी भी तरह का शक है तो वह उपयुक्त जानकारी और सबूत मांग सकता है।
गौरतलब है कि ‘स्पेशल मैरिज एक्ट’ कानून के तहत दो अलग-अलग धर्म के लोग अपने धर्म को बदले बिना रजिस्टर्ड शादी कर सकते हैं। इसके लिए एक फॉर्म भरना होता है और मैरिज रजिस्ट्रार के पास जमा कराना होता है। शादी से 30 दिन पहले रजिस्ट्रार के पास नोटिस देकर जोड़े को बताना होता है कि वे शादी करने वाले हैं। यह नोटिस सार्वजनिक किया जाता है। इसके सार्वजनिक होने के बाद अगर रजिस्ट्रार के पास किसी तरह की कोई आपत्ति नहीं आती है तो जोड़े शादी के लिए आवेदन करते हैं। लेकिन अब यह जरुरी नहीं होगा।

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