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हाई कोर्ट का फैसला, सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध पर प्रतिबंध

आज पूरा देश बकरीद समारोह को मना रहा है। इस बीच गुजरात उच्च न्यायालय की ओर से एक बड़ा फैसला लिया गया है। उच्च न्यायालय ने गुरुवार को राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक या निजी स्थानों, पड़ोस या सड़कों पर किसी भी जानवर की बलि नहीं देगा। गुजरात हाईकोर्ट और मद्रास हाईकोर्ट ने ईद-उल-अजहा के अवसर पर सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है। मुसलमानों के बीच ईद अल-अदा पर एक बकरे की बलि देने की प्रथा है। इसीलिए उनके लिए बकरी ईद एक प्रमुख त्योहार है।

सार्वजनिक और निजी स्थानों पर प्रतिबंध

गुजरात में अहमदाबाद पुलिस आयुक्त आशीष भाटिया ने 25 जुलाई को जारी एक अधिसूचना में न केवल सार्वजनिक स्थानों पर बल्कि निजी स्थानों पर भी पशु वध पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया था जो आसानी से जनता को दिखाई देते हैं। इसने कहा कि इससे लोगों के सांप्रदायिक सद्भाव को खतरा हो सकता है। गुजरात उच्च न्यायालय ने राज्य के अन्य जिलों में भी इसी तरह के आदेश जारी किए हैं। गुजरात उच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि किसी को भी इस तरह से बलिदान नहीं दिया जाना चाहिए कि इसे दूसरों द्वारा देखा जा सके।

गुजरात उच्च न्यायालय ने राजकोट के निवासी यश शाह द्वारा दायर एक याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। शाह ने 31 जुलाई, 2020 और 1 अगस्त, 2020 के बीच बकरियों, भैंसों और भेड़ों की हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। याचिकाकर्ता ने पशु चिकित्सा अधिकारियों से मांस पर प्रतिबंध लगाने का आदेश भी मांगा था जो उपभोग के लिए अयोग्य है। हर साल बकरी ईद पर सड़कों, फुटपाथों और सार्वजनिक स्थानों पर कत्लेआम किया जाता है। याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि इससे गंभीर बीमारी हो सकती है।

याचिका का विरोध करते हुए राज्य के महाधिवक्ता कमल त्रिवेदी ने कहा कि अहमदाबाद के पुलिस आयुक्त द्वारा 25 जुलाई को जारी अधिसूचना में पहले ही याचिकाकर्ताओं की चिंताओं को शामिल किया गया था। इसके बाद न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला ने अहमदाबाद के आयुक्त को अन्य जिलों में आदेश जारी करने के निर्देश देते हुए अतिरिक्त आदेश जारी करने से इनकार कर दिया।

तमिलनाडु हाईकोर्ट का आदेश

दूसरी ओर, तमिलनाडु के मद्रास उच्च न्यायालय ने भी बकरी ईद या किसी अन्य धार्मिक त्योहार के दौरान सार्वजनिक स्थानों पर जानवरों की हत्या पर प्रतिबंध लगा दिया है। मद्रास उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि बकरियों को केवल लाइसेंस प्राप्त बूचड़खानों में ही मारने दिया जाए।

मदुरै उत्तर भारतीय कल्याण संघ ने अपने वकील के.आर. लक्ष्मण द्वारा एक जनहित याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं ने आशंका व्यक्त की थी कि कोविड-19 का खतरा सार्वजनिक स्थानों पर नरसंहार से और बढ़ जाएगा। याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस विनीत कोठारी और कृष्णन रामासामी ने यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि गायों और ऊंटों का वध नहीं किया जाएगा, जबकि केवल कुछ श्रेणियों के जानवरों को मारने की अनुमति दी गई थी।

कर्नाटक सरकार का आदेश

कर्नाटक सरकार ने ‘ईदगाह मैदान’ जैसे सार्वजनिक स्थानों पर सामूहिक प्रार्थना और पशु बलि की प्रथा पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है। कर्नाटक सरकार द्वारा 27 जुलाई को बकरी ईद और कोविड- 19 संक्रमण के खतरे के खिलाफ कर्नाटक (मानक संचालन प्रक्रिया) की घोषणा की गई थी।

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