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दिल्ली के स्कूलों में हैप्पीनेस क्लास का ३१ जुलाई बुधवार को एक साल पूरा हो गया है। दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल,मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ,उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया द्वारा १५ दिवसीय हैप्पीनेस के अंतिम दिन एजुकेशन कांफ्रेंस में भाग लिया गया साथ ही मध्यप्रदेश ,पुडुचेरी ,नागालैंड ,मणिपुर ,लद्दाख हिल कॉउन्सिल के शिक्षा मंत्री एवं वरिष्ठ अफसरों ने भी इस कार्यक्रम में सहभागिता की एवं संकल्प लिया की वे भी अपने राज्यों में इस प्रणाली का प्रयोग करेंगे।

हैप्पीनेस क्लास के १ साल पूरा होने के उपलक्ष्य में तालकटोरा स्टेडियम में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया जहां सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गंगोई द्वारा दिल्ली सरकार द्वारा शुरू की गयी हैप्पीनेस एजुकेशन कांफ्रेंस की जमकर तारीफ की गयी। रंजन गोगोई ने  कार्यक्रम में इसका जिक्र करते हुए ये कहा कि हम सभी को हैप्पीनेस चाहिए। अगर लोग खुश रहें तो मुकदमे भी कम हो जायेंगे।सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस द्वारा यह भी कहा गया कि दिल्ली सरकार का यह कदम यूनिक है। कुछ अच्छा हुआ तो उसे याद रखकर खुश रहा जा सकता है। 

 
रंजन गोगई ने कार्यक्रम में कहा कि बिना शिक्षा के हैप्पीनेस नहीं मिल सकती है।  इसलिए सभी को शिक्षित होना चाहिए। भारत को इसकी जरूरत है। यंगर जनरेशन में ये बहुत बड़ी समस्या हो गयी है। पूरे देश मे इसी लागू किया जा सकता है।12 देशों ने हैप्पीनेस करिकुलम अडॉप्ट किया है। मनीष सिसोदिया द्वारा बताया गया कि हम हैप्पीनेस देशों की सूची में 141 पायदान पर है। 
 
सीजेआई ने यह भी कहा कि वकालत पढ़ानेवाली अकादमियों में भी इस कोर्स को शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘हैपीनेस क्लास के बारे में मैंने गंभीरता से सोचा है। मुझे सच में लगता है कि ऐसा कुछ न्यायिक अकादमियों में भी होना चाहिए। बिना हैपीनेस के शिक्षा कभी पूरी नहीं हो सकती।” 
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने भूटान का जिक्र करते हुए कहा कि वहां सभी हमेशा स्माइल करते हैं और यह पॉजिटिविटी है। ऐसा सभी को करना चाहिए। क्योंकि नेगेटिव होकर हम कुछ नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि हैप्पीनेस नतीजा है डीप रफ्लेक्शन का। बच्चों के लिए ये बहुत अच्छा है कि इस कार्यक्रम के जरिए उन्हें छोटी उम्र में इसकी एहमियत पता लग रही है। यह मैंने दोस्तों से भी शेयर किया है कि हैप्पीनेस क्लासेस जुडिशरी में भी होनी चाहिए।
 
गौरतलब है कि आप सरकार द्वारा दिल्ली के सरकारी स्कूलों में ‘हैप्पीनेस सिलेबस’ जुलाई 2018 से शुरू किया गया था। इस पाठ्यक्रम में दिल्ली के सभी सरकारी स्कूलों में नर्सरी से आठवीं कक्षा के करीब आठ लाख छात्रों को पढ़ाया जाना था। पाठ्यक्रम में मेडिटेशन, नैतिक मूल्य और मानसिक व्यायाम जैसे मूल विचार शामिल थे। हार्वर्ड विश्वविद्यालय में भी हैप्पीनेस कोर्स चल रहा है. लेकिन वो इतने बड़े पैमाने पर नहीं जितने दिल्ली सरकार ने 1000 स्कूलों के लिए चलाने की योजना बनाई थी। इस पाठ्यक्रम जनवरी 2018 से काम शुरू किया गया था, इसपर 35 से 40 विशेषज्ञों के दल ने काम किया था। 

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