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ग्रेटर नोएडा: 20 दिन,5 गांव,85 मौत

ग्रेटर नोएडा के गांवो में हडकंप मचा है। शायद ही कोई घर बचा होगा जहां कोरोना नहीं पहुंचा होगा। कोरोना ने इस बार गांव में विस्तार किया है। पिछले साल जब कोरोना ने दस्तक दी थी जो लोग अपने अपने घरों में कैद हो कर रह गए थे। यहां तक की शहरों का आना जाना भी छूट गया था। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। शहरों से गांव की ओर लोगों का आना हुआ तो जाना भी हुआ । पंचायत चुनावों में भी आवागमन हुआ।  जिससे कोरोना को गांव तक पहुंचने में देर नहीं लगी। आज हालात यह है कि महज 20 दिन में ही ग्रेटर नोएडा के 5 गांवों में 85 लोगों की मौत हो चुकी है। गांव वाले अभी भयभीत है। वह घरों से बाहर निकलते हुए डर रहे हैं । दिन में भी स्थिति कर्फ्यू जैसी हो गई है।

एक बेटे का अंतिम संस्कार करके आए तो दूसरे की भी घर में मौत

 

ग्रेटर नोएडा वेस्ट का एक गांव है जलालपुर। जहां पिछले 15 दिनों में 19 मौत हो चुकी है । इसको अभागे अतर सिंह की दुखद कहानी से समझा जा सकता है । अतर सिंह के दो बेटे कोरोना की भेंट चढ़ गए । जिनमें पंकज (22 ) और दीपक (24) साल का था। पंकज का अंतिम संस्कार करने के बाद जैसे ही अतर सिंह का परिवार घर पहुंचा तो दूसरा बेटा दीपक भी कोरोना की भेंट चढ़ गया। अतर सिंह के घर से 2 घंटे में दो अर्थी उठी। अभी अतर सिंह की हालत भी गंभीर बनी हुई है।

कही भी बेड नही मिल सका अभागे ऋषि को

 

इससे पहले जलालपुर गांव में समाज के सदैव लिए योगदान देने वाले ऋषि नागर की मौत हो गई थी । बताते हैं कि ऋषि को बचाने के लिए समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजकुमार भाटी और आजाद समाज पार्टी के नेता रविंद्र भाटी ने काफी प्रयास किए । कई हॉस्पिटलों को फोन किया । सभी ने बेड ना होने का बहाना देकर मना कर दिया। यहां तक की कई हॉस्पिटलों के दरवाजे भी उनके लिए बंद हो गए । बताते हैं कि ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के कई हॉस्पिटल मे जब ऋषि को उपचार नहीं मिला तो उसे लोनी ले जाएगा। लेकिन वहां भी वेंटिलेटर नहीं था। गांव के होनहार बेटे ऋषि को नहीं बचाया जा सका।

ग्रामीण संस्कृति का खत्म होता भाईचारा

यह कहानी अकेले जलालपुर गांव की नहीं है । बल्कि ग्रेटर नोएडा के हर गांव में ऐसी झकझोर करने वाली कहानी मिल जाएंगी। राजू शर्मा कहते हैं लोग एक दूसरे का दुख सांझा भी नहीं सकते। यहां तक की अंतिम संस्कार में जाते हुए डरने लगे हैं । यह ग्रामीण संस्कृति का खत्म होता भाईचारा है। वह भी एक जमाना था जब गांव के किसी सदस्य की मौत हो जाती थी तो सैकड़ों की तादात में लोग ना केवल अर्थी को कांधा देकर ले जाते थे बल्कि अंतिम संस्कार में शामिल होते थे। लेकिन कोरोना बीमारी ने गांव का सिस्टम ही पूरी तरह बदल दिया है।

कचैडा में 24 घंटे में 6 मौतें

 

कचैडा गांव में 24 घंटे में 6 मौत हुई। जीडीए कर्मचारी बदले सिंह नागर और उनकी पत्नी मुकेश नागर की अंत्येष्टि एक साथ हुई। कचैडा गांव के इतिहास में यह पहली बार हुआ जब 24 घंटे में 6 लोग की चिताए जली।

दादरी शहर की आबादी 1 लाख है और उसके आसपास के लोग भी दादरी के हॉस्पिटलों पर निर्भर है। लेकिन यहां पर कोविड-19 का हॉस्पिटल नहीं था ।इसलिए हमने क्रूष डिवाइन कोविड-19 का हॉस्पिटल करा दिया है । इसके साथ ही हमने 4 गाड़ियों को गांव में टेस्टिंग कराने के लिए रवाना कर दिया है। जिसमें चार गाड़ी हमें एनटीपीसी से मिली है। सरकारी अस्पताल में भी हमने 10 बेड और 10 ऑक्सीजन सिलेंडर लगवाए हैं । हम प्राथमिकता के तौर पर सभी गांव में सैनिटाइजर का छिड़काव करा रहे हैं । खैरपुर गुर्जर, दुजाना और बादलपुर में हम सैनिटाइजर का छिड़काव करा चुके हैं। इसके बाद अन्य गांवों में भी सैनिटाइजर छिड़काव किया जाएगा। अगर किसी का सरकारी हॉस्पिटल में एडमिशन नहीं हो रहा है तो वह मुझसे संपर्क कर सकता है।

– तेजपाल नागर, विधायक दादरी

खैरपुर गुर्जर में 26 लोगों की मौत पर जगी सरकार, हुआ छिडकाव

खैरपुर गुर्जर का सबसे बुरा हाल है। यहां 15 दिन में 26 लोग मर चुके हैं। जब टीवी चैनल वालों ने इस गांव के दर्द को दिखाया तो ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने हमदर्दी दिखाते हुए गांव में सैनिटाइजर का छिड़काव करा कर इतिश्री कर दी।

गांवो में रहना हुआ दुश्वार, जांच करने से कतराने लगे लोग

सैनी गांव की स्थिति भी इससे मिलती-जुलती है। यहां 20 दिनों में 10 लोगों की मौत हो चुकी है। हरेद्र सिंह कहते हैं कि गांव के लोग अब जांच करने से भी कतराने लगे हैं । लोगों को डर है कि कहीं उनको कोरोना पॉजिटिव आ गया तो वह गांव में भी नहीं रह पाएंगे। क्योंकि गांव में कोरोना पॉजिटिव के परिवार तक को हेय दृष्टि से देखा जाता है ।

कैलाशपुर में सवा सौ लोग बीमार

कैलाशपुर गांव में करीब सवा सौ लोग बुखार से पीड़ित है। 5 लोग अब तक कोरोना की भेंट चढ चुके हैं। गांव के कर्मवीर सिंह बताते हैं कि इनकी अगर जांच कराई जाए तो अधिकतर कोरोना के मरीज निकलेंगे।

जिले के सबसे बड़े गांव में 19 मौतों के बाद भी नही पहुँची चिकित्सा टीम

जिले का सबसे गांव बड़ा गांव दुजाना है। यहां की आबादी 27 हजार हैं। यहां पिछले 20 दिन में 19 मौत हो चुकी है। गांव में दहशत इतनी घर कर गई है कि लोगों ने एक दूसरे के घरों में जाना बंद कर दिया है। कोरोना से पीड़ित रह चुके मास्टर भूपेंद्र नागर कहते हैं कि जिले का सबसे बड़ा गांव होने के बावजूद आज तक कोई चिकित्सा टीम इस गांव में नहीं आई है। हालांकि विधायक तेजपाल नागर के प्रयासों से गांव को सेनेटाइजर करा दिया गया है।

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने शुरू किए दो ऑक्सीजन सेंटर

कुछ दिन पहले ही ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने मिहिर भोज पार्क और बालक इंटर कालेज में दो ऑक्सीजन सेंटर खुलवाए थे। जिनकी मीडिया ने खूब प्रचारित किया। बताया जाता है कि यहा ऑक्सीजन लेने के लिए लोगों की मारामारी रहती है।

ऑक्सीजन भरवाने को 48 घंटे तक इंतजार, नही उठते अधिकारियों के फोन

जिला पंचायत का चुनाव लड़ चुके कांग्रेस के सोशल मीडिया प्रभारी तेजिंदर नागर कहते हैं कि अगर कोई ऑक्सीजन गैस का सिलेंडर भरवाने आए तो उसे 48 घंटे तक का इंतजार करना पड़ रहा है। इस दौरान उनका मरीज सासें पूरी कर चुका होता है। वह कहते हैं कि नोडल अधिकारियों के नंबर दे दिए जाते हैं , लेकिन कोई फोन नहीं उठाता है । एक तरफ मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि लोगों का इलाज निशुल्क होगा लेकिन दूसरी तरफ निशुल्क इलाज तो छोड़िए उनको हॉस्पिटल में एडमिट तक नहीं कराया जा रहा है । मजबूरन गांव के लोगों को अपने घरों में ही मरीजों को रखना पड रहा है जिसमें अधिकतर मरीजों की घरों में ही मौत हो रही है। इसके चलते ही गांवों में कोरोना का यह आंकड़ा बढ़ रहा है।

ग्रेनो के 44 नर्सिंग और मेडिकल कॉलेज से कराए इलाज

आजाद समाज पार्टी कोर कमेटी के सदस्य और एडवोकेट रविंद्र भाटी के अनुसार ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अंतर्गत सारे संसाधन पहले से ही मौजूद हैं। अस्पताल को चलाने के लिए जरूरी मेडिकल स्टाफ के लिए प्राधिकरण के अंतर्गत 44 नर्सिंग इंस्टिट्यूट मौजूद है। दर्जनों मेडिकल कॉलेज प्राधिकरण के अंतर्गत आते हैं। जहां से मेडिकल स्टाफ और डॉक्टर हायर करके अस्पताल को चलाया जा सकता है। नए वेंटिलेटर एयरलिफ्ट द्वारा मंगवाएं जा सकते हैं । इसके साथ ही ऑक्सीजन के लिए भी इनॉक्स कंपनी जो सूरजपुर में स्थित है ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अंतर्गत आती है। इस स्थिति में केवल और केवल सीईओ एवं नोडल अधिकारी के कुछ ना करने की इच्छा के कारण लोगों को सड़कों पर मरने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

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