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सरकारी विभागों ने- खोखला कर दिया निगम को

गाजियाबाद नगर निगम की आर्थिक हालत खराब करने में सरकारी विभाग सबसे आगे हैं। मामला कुछ इस तरह से है। केन्द्र और राज्य सरकार के कार्यालयों को कर के रूप में अरबों रूपया नगर निगम को देना है लेकिन अधिकारियों के बीच खींचतान की वजह से निगम का टैक्स अधर में लटका हुआ है। स्थिति यह है कि 120 करोड़ से भी अधिक का टैक्स राज्य और केन्द्र सरकार के कार्यालयों पर बकाया है। ये स्थिति पिछले कई वर्षों से यूं ही बनी हुई है। गाजियाबाद नगर निगम पार्षदों से लेकर महापौर तक टैक्स वसूली के लिए सम्बन्धित अधिकारियों को पत्र लिख चुके हैं, चूंकि मामला सरकारी कार्यालयों से सम्बन्धित है लिहाजा निगम अधिकारियों के हाथ बंधे हुए हैं।

पिछले दिनों नगर निगम पार्षद राजेन्द्र त्यागी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर 120.42 करोड़ का भुगतान विद्युत विभाग से कराए जाने की गुजारिश की है। श्री त्यागी का कहना है कि विद्युत विभाग के साथ ही अन्य सरकारी विभागों का काफी समय से टैक्स भुगतान न होने की वजह से नगर निगम की आर्थिक स्थिति पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। श्री त्यागी का यह भी कहना है कि सरकारी कार्यालयों से भुगतान न होने की वजह से इकाई विकास कार्य भी बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं।

विद्युत विभाग का (वर्ष 2013 से वर्ष 2020 एवं वित्तीय वर्ष 2020-2021) टैक्स के रूप में 80 करोड, 60 लाख से अधिक का बकाया है। ये टैक्स विद्युत विभाग के भवनों पर सम्पत्ति कर के साथ ही सड़क के फुटपाथों पर लगे ट्रांसफार्मरों के बाबत है।

पार्षद राजेन्द्र त्यागी ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में यह भी सलाह दी है कि यदि सम्बन्धित विभाग टैक्स दे पाने में असमर्थ है तो उक्त टैक्स की रकम को मार्ग प्रकाश व्यवस्था एवं जलकल के विद्युत संयोजनों की सत्यापित धनराशि में समायोजित कर दी जाए। श्री त्यागी का कहना है कि इस सम्बन्ध में स्थानीय निकाय निदेशालय (लखनऊ) के निदेशक को भी लिखा जा चुका है लेकिन गाजियाबाद नगर निगम की बकाया धनराशि को समायोजित नहीं किया जा सका है।
बताते चलें कि गाजियाबाद नगर निगम के मार्ग प्रकाश एवं जलकल के विद्युत संयोजनों की धनराशि को स्थानीय निकाय स्तर से ही राज्य वित्त आयोग की धनराशि में कटौती कर ली जाती है।

इसी तरह से उत्तर रेलवे पर भी गाजियाबाद नगर निगम का टैक्स के रूप में साढे़ चार करोड़ से अधिक बकाया है। ये टैक्स मार्च 2020 तक रेलवे स्टेशनों से सम्बन्धित है। यदि चालू वित्तीय वर्ष 2020-21 तक का सर्विस चार्ज जोड़ लिया जाए तो यह धनराशि 4 करोड़ 67 लाख, 82 हजार से भी अधिक है। इस रकम को 31 मार्च 2020 तक गाजियाबाद नगर निगम  के पक्ष में जमा किया जाना था जो तय समयावधि में नहीं कराया जा सका है। इस सम्बन्ध में गाजियाबाद नगर निगम उत्तर रेलवे को नोटिस भी भेज चुका है।

गाजियाबाद नगर निगम क्षेत्र में स्थापित 10 मेट्रो स्टेशन पर सर्विस चार्ज के रूप में 30 करोड़ 91 लाख से भी अधिक का बकाया है। ये धनराशि चालू वित्तीय वर्ष 2020-21 तक की है।

उत्तर प्रदेश गंगाजल परियोजना ईकाई, उत्तर प्रदेश जल निगम (प्रताप विहार, गाजियाबाद) के भवन संख्या ई-भवन युनिट-2 पर 31 मार्च 2021 तक 4 करोड़ 23 लाख, 24 हजार से भी अधिक की रकम कर के रूप में बकाया है। इस रकम का भुगतान भी तमाम नोटिसों और शिकायत के बाद भी नहीं किया जा सका।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे पत्र में पार्षद राजेन्द्र त्यागी ने मांग की है कि 120 करोड़ से अधिक की धनराशि जो कर के रूप में विभिन्न विभागां पर बकाया है, उसके भुगतान के लिए सम्बन्धित विभाग को निर्देशित किया जाए ताकि गाजियाबाद नगर निगम की आर्थिक स्थिति ठीक हो सके और नगर निगम में अधूरे पडे़ विकास कार्यों को पूरा किया जा सके।
पार्षद राजेन्द्र त्यागी का यह पत्र 5 सितम्बर 2020 को मुख्यमंत्री कार्यालय भेजा गया है। समाचार लिखे जाने तक की स्थिति यह है कि मुख्यमंत्री कार्यालय से किसी प्रकार का आदेश बकायेदार सरकारी विभागों को नहीं दिया गया।

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