[gtranslate]
Country

सरकार ने बट्टे खाते में डाले चौकसी-रामदेव-मोदी सहित 50 डिफॉल्टर्स के 68,607 करोड़

सरकार ने बट्टे खाते में डाले चौकसी-रामदेव-मोदी सहित 50 डिफॉल्टर्स के 68,607 करोड़

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कल एक ट्वीट किया जिसमें उन्होंने कहा कि संसद में मैंने एक सीधा सा प्रश्न पूछा था- मुझे देश के 50 सबसे बड़े बैंक चोरों के नाम बताइए। वित्त मंत्री ने जवाब नहीं दिया। राहुल गांधी ने आगे कहा कि अब रिजर्व बैंक ने नीरव मोदी, मेहुल चौकसी सहित बीजेपी के मित्रों के नाम बैंक चोरों की लिस्ट में डाले हैं, इसलिए संसद में इस सच को छिपाया गया।

इस मामले पर देश में कोरोना महामारी के बीच पक्ष और विपक्ष की आपसी खींचतान शुरू हो गई है। कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि पूरा देश कोरोना की महामारी से लड़ रहा है। रोजी रोटी की मार के चलते देश के करोड़ों मजदूरों को शहर से गांव पलायन करना पड़ा है।

113 लाख फौजी जवानों, मिलिटरी पेंशनरों और सरकारी कर्मचारियों का 37,530 करोड़ रुपये महंगाई भत्ता मोदी सरकार ने काट लिया है। लघु उद्योग, दुकानदारी व व्यवसाय ठप हो गए हैं। पर शर्म की बात है कि इसके बावजूद मोदी सरकार द्वारा बैंक डिफॉल्टरों को 68,607 करोड़ रुपये की माफी दी जा रही है। देश प्रधानमंत्री से जवाब मांगता है।

इसके बाद प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी तो कुछ नही बोले लेकिन देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस पर जरूर सफाई दी। वित्त मंत्री ने कांग्रेस पर देश को दिग्भ्रमित करने का आरोप लगाया है। इसी के साथ उन्होंने ट्वीट भी किए हैं और सफाई देते हुए कहा है कि सरकार ने बड़ा ऐक्शन लेते हुए चौकसी की 1936 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति को अटैच किया है।

इसमें 67.9 करोड़ रुपये की विदेशी संपत्ति भी शामिल है। इसके अलावा 597.75 करोड़ की प्रॉपर्टी को सीज करते हुए मेहुल चोकसी के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस भी इश्यू किया जा चुका है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने यह भी कहा कि चोकसी के प्रत्यर्पण के लिए एंटीगुआ को एक अर्जी भेजी जा चुकी है। इसके अलावा उसे भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया भी जारी है।

देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और रणदीप सुरजेवाला के आरोपों पर अपना स्पष्टीकरण देते हुए यह भी कहा है कि केंद्र की मोदी सरकार ने ही असल रूप में ऐसे विलफुल डिफॉल्टर्स पर ऐक्शन शुरू किया है। इसी अभियान के क्रम में सरकार ने 9967 रिकवरी सूट और 3515 एफआईआर दर्ज कर ली हैं। इसी के साथ-साथ सिर्फ नीरव मोदी, मेहुल चोकसी और विजय माल्या जैसे उद्योगपतियों की करीब 18332 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच या सीज की जा चुकी है।

देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस मुद्दे पर 13 ट्वीट किए हैं। निर्मला ने नीरव, मेहुल और माल्या पर भारत सरकार ने क्या-क्या कार्रवाई की इसे लेकर अलग-अलग ट्वीट किए हैं। एक ट्वीट में वह कहती है कि कांग्रेस के नेताओं ने जानबूझ कर बैंकों का कर्ज नहीं लौटाने वाले, फंसे कर्जों और राइट-ऑफ (बट्टे खाते) पर गुमराह करने की कोशिश की। 2009-10 और 2013-14 के बीच अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों ने 145226 करोड़ रुपये की राशि को राइट-ऑफ (बट्टे खाते में) किया था। आशा है कि राहुल गांधी ने डॉ मनमोहन सिंह से सलाह ली होगी कि यह राइट-ऑफ (बट्टा खाता) किस विषय पर था।

यही नहीं बल्कि निर्मला सीतारमण ने अपने एक-एक ट्वीट में डिफॉलटरों का नाम लेकर देशवासियों को स्थिति बताने की जहां एक ओर कोशिश की है वहीं दूसरी तरफ वह वह राहुल और रणदीप सुरजेवाला पर लगातार हमला बोलती रही हैं। वित्त मंत्री ने एक ट्वीट में कहा है कि राहुल गांधी और कांग्रेस को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए कि वे प्रणाली को साफ करने में रचनात्मक भूमिका निभाने में असफल क्यों हैं। न तो सत्ता में रहते हुए और न ही विपक्ष में रहते हुए कि उन्होंने कांग्रेस में व्याप्त भ्रष्टाचार और वंशवाद को रोकने के लिए कोई प्रतिबद्धता दिखाई है।

याद रहे कि कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कल एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि रिजर्व बैंक ने 24 अप्रैल को सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत जानकारी दी है कि बैंकों का कर्ज नहीं लौटाने वाले जिन 50 बड़े कर्जदारों और भगोडों का कर्ज माफ किया गया है उनमें विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चौकसी और जतिन मेहता जैसे बड़े घोटालेबाज शामिल हैं।

उल्लेखनीय है कि मेहुल चोकसी और उसका भांजा नीरव मोदी वर्ष 2018 में देश छोड़कर भाग गए थे। दोनों 13,500 करोड़ रुपये के पीएनबी धोखाधड़ी मामले में मुख्य आरोपी हैं। चौकसी को एंटिगुआ और बारबूडा ने पिछले साल नागरिकता भी दे दी थी। जबकि नीरव मोदी अभी लंदन में है और प्रत्यर्पण कार्रवाई का सामना कर रहा है।

कोरोना महामारी के बीच यह मामला अचानक सुर्खियों में उस समय आया है जब एक व्यक्ति ने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 (आरटीआई ) के तहत डिफाल्टर लोगों का बैंक द्वारा विवरण जारी किया गया। भारतीय रिजर्व बैंक ने सूचना के आरटीआई के तहत पूछे गये एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी थी। बैंक के अनुसार यह स्थिति 30 सितंबर 2019 तक की है। रिजर्व बैंक से आरटीआई डालने वाले सख्श का नाम साकेत गोखले है।

आरटीआइ में सामने आई डिफाल्टरो की यह सूची कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला के पास जब पहुँची तो उन्होंने रिजर्व बैंक के इस जवाब को सार्वजनिक कर दिया। सुरजेवाला की माने तो जान-बूझ कर बैंकों का कर्ज नहीं लौटाने वाले देश के ऐसे शीर्ष 50 डिफाल्टर है। जिनमें हीरा व्यापारी मेहूल चोकसी और उनके भांजे नीरव मोदी सहित आचार्य बालकृष्ण, बाबा रामदेव आदि का नाम शामिल हैं। इन शीर्ष 50 डिफॉल्टर में आईटी, बुनियादी ढांचे, बिजली, सोने-हीरे के आभूषण, फार्मा आदि सहित अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े हुए हैं ।

चौंकाने वाली बात यह है कि बकायेदारों की इस सूची में सबसे ऊपर मेहुल चोकसी की घोटाले से प्रभावित कंपनी गीतांजलि जेम्स लिमिटेड कंपनी है। जो 5492 करोड़ रुपए की कर्जदार है। इसी की दूसरी कंपनियों में गिली इंडिया लिमिटेड और नक्षत्र ब्रांड्स लिमिटेड ने क्रमशः 1,447 करोड़ रुपये और 1,109 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था।

आरटीआई के तहत दी गई इस सूची में आरईआई एग्रो लिमिटेड दूसरे नंबर पर है। जिसकी राशि 4,314 करोड़ रुपये है। इसके निदेशक संदीप झुझुनवाला और संजय झुनझुनवाला है। जो एक साल से अधिक समय से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के अंतर्गत हैं। जबकि अन्य डिफाल्टरों में 4,076 करोड़ रुपये के लोन लेकर फरार हुए हीरा व्यापारी विनसम डायमंड एंड ज्वेलरी के मालिक जतिन मेहता है। जिसके घोटाले की जांच सीबीआई कर रही है। रोटोमैक पैन कानपुर की कोठारी समूह का हिस्सा है। जिस पर 2,850 करोड़ रुपये बकाया था।

इसके अलावा कुडोस कीमी, पंजाब (2,326 करोड़ रुपये), बाबा रामदेव और बालकृष्ण की समूह कंपनी रूची सोया इंडस्ट्रीज लिमिटेड, इंदौर (2,212 करोड़ रुपये), और जूम डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, ग्वालियर (2,012 करोड़ रुपये) भी डिफाल्टरो की सूची में शामिल हैं। हरीश आर मेहता की अहमदाबाद स्थित फॉरएवर प्रेशियस ज्वैलरी एंड डायमंड्स प्राइवेट लिमिटेड (1962 करोड़ रुपये) और फरार शराब कारोबारी विजय माल्या की निष्क्रिय किंगफिशर एयरलाइंस लिमिटेड (1,943 करोड़ रुपये) जैसे कुछ प्रमुख नाम भी इसी सूची में हैं।

इनके अलावा 25 अन्य कंपनियों जिन पर 605 करोड़ रुपये से लेकर 984 करोड़ रुपये तक, या तो व्यक्तिगत रूप से या समूह कंपनियों के रूप में बकाया है। बताया जा रहा है कि 50 टॉप विलफुल डिफॉल्टरों में से छह कीमती आभूषण उद्योगों से जुड़े हुए हैं। याद रहे कि ये सभी डिफाल्टर विलफुल डिफाल्टर हैं। विलफुल डिफाल्टर उन कर्जदारों को कहते हैं जो सक्षम होने के बावजूद जानबूझकर कर्ज नहीं चुका रहे होते हैं। लेकिन जब इनसे कर्ज वापसी की उम्मीद नहीं रहती तो बैंक इनके कर्ज को राइट ऑफ कर देते हैं यानी बट्टे खाते में डाल देते हैं।

You may also like

MERA DDDD DDD DD