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लॉकडाउन में मरने वाले प्रवासी मजदूरों को कोई मुआवजा नहीं देगी सरकार

जनार्दन कुमार सिंह

नई दिल्ली। दुनिया ने देखा है कि भारत में मार्च महीने में हुए लॉकडाउन के चलते प्रवासी मजदूरों को अपने घरों को लौटने में कितनी तकलीफों का सामना करना पड़ा है। जगह-जगह उन्हें पुलिस प्रशासन की कितनी जलालत झेलनी पड़ी है। कई मजदूर और उनके परिजन तो रास्तों में ही अकाल मौत का ग्रास बने। लेकिन हैरानी की बात है कि केंद्रीय श्रम मंत्रालय के पास इन मरने वाले प्रवासी मजदूरों का डेटा तक नहीं है। यही नहीं केंद्र सरकार लॉकडाउन में मरने वाले प्रवासी मजदूरों को कोई मुआवजा नहीं देगी।

कोरोनावायरस के बीच चल रहे रहे संसदीय सत्र में जब श्रम मंत्रालय से पूछा गया कि क्या क्या सरकार के पास अपने गृह राज्यों में लौटने वाले प्रवासी मजदूरों का कोई आंकड़ा है?  क्या सरकार को इस बात की जानकारी है कि इस दौरान कई मजदूरों की जान चली गई थी और क्या उनके बारे में सरकार के पास कोई डिटेल है? साथ ही सवाल यह भी था कि क्या ऐसे परिवारों को आर्थिक सहायता या मुआवजा दिया गया है? इस पर केंद्रीय श्रम मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने लिखित उत्तर में बताया कि ‘ऐसा कोई आंकड़ा मेंटेन नहीं किया गया है। ऐसे में इस पर मुआवजे को कोई सवाल नहीं उठता है।’

सरकार के इस जवाब पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजिय सिंह ने कहा कि ‘यह हैरानजनक है कि श्रम मंत्रालय कह रहा है कि उसके पास प्रवासी मजदूरों की मौत पर कोई डेटा नहीं है, ऐसे में मुआवजे का कोई सवाल नहीं उठता है। उन्होंने कहा कि कभी-कभी मुझे लगता है कि या तो हम सब अंधे हैं या फिर सरकार को लगता है कि वो सबका फायदा उठा सकती है।

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