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नेहरु की निशानी 5 स्टार होटल अशोका को बेच रही सरकार !

 

देश के पहले और सुप्रसिद्ध फाइव स्टार होटल अशोका को सरकार बेचने की तैयारी कर रही है । हालांकि एडवाइजर की सिफारिश के आधार पर ही सरकार अंतिम फैसला लेगी। अगर सरकार दिल्ली स्थित होटल अशोका को बेचती है तो नेहरू की एक निशानी पर प्राइवेटाइजेशन का पहरा हो जाएगा । यह होटल पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने बनवाया था । लोग इसे नेहरू की निशानी के नाम से भी जानते हैं ।

हालाकि होटल अशोका को पूरी तरह बेचने या लंबे समय के लिए लीज पर देने का विकल्प भी है। होटल अशोका के 550 कमरे 4 कन्वेंशन हॉल दिल्ली के प्राइम लोकेशन में 25 एकड़ में फैले हैं। अगर लीज पर देना हुआ तो कम से कम 60 साल के लिए लीज पर देने का विकल्प है। एडवाइजर होटल के रीकंस्ट्रक्शन के कानूनी पहलुओं की भी समीक्षा करेगा। एडवाइजर को महीने भर के भीतर अपनी सिफारिश देनी होगी। एडवाइजर की सिफारिश के आधार पर ही सरकार अंतिम फैसला लेगी।

 

याद रहे कि होटल अशोका का निर्माण देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने साल 1956 में कराया था। यह होटल संसद और राष्ट्रपति भवन के नजदीक है। इसमें 550 कमरे और 161 सूइट्स हैं। होटल में करीब 1000 कर्मचारी काम करते हैं, जिसके रोजाना के संचालन में करीब 35 लाख रुपए का खर्च आता है। यहां आमतौर पर 50 फीसदी ही कमरे बुक होते है। हालांकि सर्दियों में यह आंकड़ा बढ़कर करीब 80 फीसदी हो जाता है।

होटल के बनने के पीछे की कहानी काफी दिलचस्प है। भारत नया-नया आजाद हुआ था और यूनेस्को समिट को भारत में कराने को लेकर उत्सुक था। नेहरू ने 1955 में पेरिस में हुई यूनेस्को फोरम की बैठक में सुझाव दिया था कि भारत अगले साल समिट कराने के लिए तैयार है। हालांकि उस वक्त तक भारत में एक भी 5 स्टार होटल नहीं था, जहां विश्वभर से आने वाले मेहमानों को ठहराया जा सके। ऐसे में नेहरू ने 5 स्टार होटल अशोका को बनवाया था।

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