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फिर फेल हुई भारत सरकार: ऑक्सीजन के साथ-साथ वैक्सीन भी नदारद

देश में महामारी की विकराल स्थिति ने अब लोगों के हौसले को तोड़ दिया है कोई अपनों की मौत में टूट चुका है तो कोई अब भी उम्मीद में हैं कि शायद उसका परिजन जल्दी ठीक हो जाएगा। कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने देश की बदहाल हालत और शासन प्रशासन की सच्चाई सबके सामने ला दी है। पहले ही देश में लोग ऑक्सीजन की कमी से दम तोड़ रहे हैं तो अब सरकार के पास वैक्सीन भी उपलब्ध नहीं है।

कोरोना की पहली लहर थी तब विश्व के कई देशों लॉकडाउन करके पूरा ध्यान हेल्थ सिस्टम को मजबूत करने में लगा दिया। लेकिन भारत में तो मान लिया गया कि हमारे यहां दूसरी लहर ही नहीं आने वाली है। इसी सोच का नतीजा है कि आज हमारा देश कोरोना की दूसरी लहर की ऐसी चपेट में है कि कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में वैक्सीन ही एकमात्र ब्रह्मास्त्र साबित हो सकती है। देश में ऑक्सीजन नहीं था और अब वैक्सीन भी नहीं है।

भारत का स्वास्थ्य सिस्टम कोरोना मरीजों को इलाज देने में विफल साबित हो रहा है। बिस्तर, ऑक्सीजन व जरूरी दवाओं के लिए मची मारामारी के बीच अब कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीन भी खत्म हो चुकी है।

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हालात इतने खराब हैं कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार आपस में इस बात पर केवल बयान बाजी करने में आगे हैं। न केंद्र सरकार के पास कोई जवाब है न राज्य सरकार के पास। एक मई से पूरे देश में 18 वर्ष से अधिक आयु के लोगों का टीकाकरण शुरू करना था। लेकिन कोविन वेबसाइट क्रैश हो जाना, कोविड सेण्टर उपलब्ध न हो पाना ऐसी परेशानियां लोगों में डर पैदा करने लगी हैं।

देश में कोरोना वैक्सीन की तीव्र कमी को देखते हुए, कई राज्य अब वैक्सीन बनाने वाली विदेशी कंपनियों से सीधे खुराक खरीदने की तैयारी कर रहे हैं। तेलंगाना, दिल्ली और कर्नाटक सहित कई राज्यों का कहना है कि वे वैक्सीन खरीदने के लिए एक वैश्विक निविदा शुरू करने की योजना बना रहे हैं। महाराष्ट्र इस दिशा में पहल करने वाला पहला राज्य है। देश में 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए कोरोना वैक्सीन 1 मई से शुरू हुआ। लेकिन कई राज्यों में टीकों की भारी कमी है।

दिल्ली में स्टॉक आउट

देश में 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए कोरोना वैक्सीन 1 मई से शुरू हुआ। लेकिन कई राज्यों में टीकों की भारी कमी है। दिल्ली में 18 से 44 वर्ष के बीच के लोगों के लिए कोवैक्सीन स्टॉक से बाहर है। आम आदमी पार्टी के विधायक आतिशी के अनुसार, दिल्ली सरकार 125 से अधिक टीकाकरण केंद्रों को बंद करने जा रही है। केंद्र सरकार ने राज्यों से भी ऐसे लोगों को प्राथमिकता देने को कहा है जिन्हें दूसरी खुराक लेनी है।

कई राज्यों में टीकों की अनुपलब्धता के कारण, 18 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिकों के टीकाकरण पर एक प्रश्न चिह्न लगा हुआ है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा था कि हम 18 साल से ऊपर के लोगों को टीका लगाने के लिए तैयार हैं, लेकिन टीकाकरण की शुरुआत 1 मई से नहीं की जा सकती है, क्योंकि टीका उपलब्ध नहीं है।

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उत्तर प्रदेश में भी 1 मई से 18 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को टीका अभियान शुरू किया जा चुका है। 1 मई से टीकाकरण के लिए राज्य की योगी सरकार ने कोविशिल्ड की 50 लाख और कोवाक्सिन की 50 लाख खुराक दोनों कंपनियों को देने का आदेश दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि इन टीकों के अलावा, भारत सरकार द्वारा खुराक भी उपलब्ध कराई जाएगी।

मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार ने 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों को मुफ्त में वैक्सीन लगाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि टीकाकरण का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। इसी तरह, दिल्ली, असम, केरल, सिक्किम, महाराष्ट्र और गोवा जैसे राज्यों की सरकारें एक मई से टीकाकरण अभियान के तीसरे चरण की शुरुआत करने जा रही हैं, जिसके लिए उन्होंने देश की दोनों वैक्सीन कंपनियों के लिए आदेश दिए हैं।

इस बीच, महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को कहा कि वह 18 से 44 साल के लोगों के लिए खरीदे गए कोरोना वैक्सीन को 45 साल से अधिक उम्र के लोगों पर दूसरी खुराक लगाने के लिए कह रही है। महाराष्ट्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा कि केंद्र सरकार ने 45 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए वैक्सीन की आपूर्ति में कमी के कारण यह निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि अगर लोगों को समय पर वैक्सीन की दूसरी खुराक नहीं दी जाती है, तो यह प्रभावी नहीं होगा। महाराष्ट्र में, 45 वर्ष से अधिक आयु के 21 लाख लोगों को वैक्सीन की दूसरी खुराक से गुजरना पड़ता है। इनमें से 16 लाख लोगों को कोविशिल्ड की दूसरी खुराक लेनी है। राज्य में कोक्सैक्सिन की 35,000 खुराकें उपलब्ध हैं।

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इसी तरह, राज्य सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय बाजार में उपलब्ध फाइजर, मोर्डाना और जॉनसन एंड जॉनसन के टीके के लिए एक वैश्विक निविदा प्रक्रिया का आयोजन किया, लेकिन आईसीएमआर ने अभी तक देश में इन टीकों के उपयोग को मंजूरी नहीं दी है।

राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और केरल ने टीकाकरण के आवश्यक स्टॉक उपलब्ध नहीं होने के कारण 18 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिकों के लिए टीकाकरण कार्यक्रम को लागू करने से इनकार कर दिया है। राज्यों ने कहा कि वैक्सीन की कमी से समस्या हुई है। तो गैर-भाजपा शासित राज्यों में टीकाकरण का तीसरा चरण कैसे शुरू होगा?

कोरोना वैक्सीन के तीसरे चरण का अभियान 1 मई से शुरू हुआ  है, लेकिन राज्य सरकारें अपने हाथ उठाते हुए दिख रही हैं कि अगर हमारे पास वैक्सीन नहीं है, तो इसे सभी के लिए कैसे लागू किया जाए। ये सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि ये सभी राज्य जो टीका की अनुपलब्धता की शिकायत कर रहे हैं, वे कांग्रेस शासित हैं। देश में इस आदेश के बाद 80 से 90 करोड़ लोगों को वैक्सीन की 2 खुराक देने के लिए कम से कम 160 करोड़ खुराक तैयार करनी होगी। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि फिलहाल इतने बड़े पैमाने पर उत्पादन नहीं हो रहा है। इस वजह से चिंताएं बढ़ रही हैं।

हालाँकि, इसका एक बड़ा कारण यह है कि कई राज्य सरकारों ने पहले ही भारत बायोटेक और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को टीके लगाने के अपने आदेश दे दिए हैं, जिसके कारण अब वे राज्य जो वैक्सीन के लिए अपना ऑर्डर दे रहे हैं, उन्हें समस्या हो रही है। । इसका कारण यह है कि कंपनी उन राज्यों को उपलब्ध कराएगी जिनके आदेश पहले लिए जा चुके हैं।

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