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पूर्ववर्ती सपा सरकार के कार्यकालों में कद्दावर नेता के रूप में पहचान रखने वाले पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खां की मुश्किलें अब बढ़ने वाली हैं। आजम खां सरकार के निर्देश पर जांच एजेंसियों की रडार पर हैं। एसआईटी के एक अधिकारी ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर बताया कि आजम खां के खिलाफ तमाम मामले ऐसे हैं जो उन्हें तत्काल सलाखों के पीछे पहुंचा सकते हैं। चूंकि आजम खां समाजवादी पार्टी के एक कद्दावर नेता हैं और आगामी लोकसभा चुनाव में उनकी भूमिका अहम रहेगी लिहाजा मौजूदा सरकार लोकसभा चुनाव तक आजम खां को किसी प्रकार की सिम्पैथी नहीं लेने देना चाह रही, लेकिन इतना जरूर तय है कि लोकसभा चुनाव बाद आजम खां की मुश्किलें जरूर बढेंगी। योगी सरकार पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में उनके द्वारा किए गए कथित घपलों और घोटालों को लेकर यदि उन्हें सलाखों तक पहुंचा दे तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
इस बात का अहसास पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खां को भी है, यही वजह है कि लोकसभा चुनाव की तैयारियों के दौरान भी बड़बोले आजम खां की जुबान पर ताला लगा हुआ है। न सरकार विरोधी बयान आ रहे हैं और न ही नेता विशेष के खिलाफ उनकी जुबान आग उगल रही है।
गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान के खिलाफ जल निगम भर्ती भ्रष्टाचार मामले में एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। इस मामले में एसआईटी ने आजम खान के अलावा पूर्व नगर विकास सचिव एसपी सिंह समेत पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इसमें जल निगम के पूर्व एमडी पीके आसुदानी और जल निगम के तत्कालीन मुख्य अभियंता अनिल खरे को भी नामजद करते हुए परीक्षा कराने वाली संस्था ‘एपटेक’ के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। एसआईटी ने आजम खां और अन्य के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है। केस की सुनवाई के दौरान आजम खां का यह कहना हास्यासपद लगता है कि नियुक्ति की जिम्मेदारी विभाग के अधिकारियों की होती है, उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं थी, रही बात फाइल में हस्ताक्षर करवाए जाने की तो अधिकारियों ने धोखे से हस्ताक्षर करवा लिए। फिलहाल कोर्ट ने उनकी इस दलील पर उन्हें कोई राहत नहीं दी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस मामले को तब तक लटकाया जायेगा जब तक लोकसभा के चुनाव सम्पन्न नहीं हो जाते। चुनाव सम्पन्न होते ही आजम खां को भ्रष्टाचार के इस मामले में जवाब देना पड़ सकता है।
यह बाबा की सरकार है। यह सरकार रोजगार तो दे नहीं पा रही है। उल्टे हमारी सरकार में जो रोजगार दिए गए थे उन पर उंगली उठा रही है। ऐसे में मामलें की जांच कराकर यह सरकार यह मैसेज देना चाहती है कि हम सही हैं। पूर्व की सरकार गलत थी। प्रदेश में अखिलेश सरकार ने 5 साल में 4 लाख बेरोजगारों को रोजगार दिया था। यह सरकार अभी तक 400 लोगां को भी रोजगार नहीं दे पाई है। हमारी सरकार में जो भी महत्वपूर्ण कार्य हुए उन सभी पर यह जांच करा रहे हैं चाजे वह लखनऊए आगरा एक्सप्रेस.वे होंए गोमती रिवर फ्रंट हो या लखनऊ मेट्रो। लेकिन हमारा दावा है कि हम पाक साबित होंगे।
                                                                                                             राजकुमार भाटी राष्ट्रीय प्रवक्ता सपा 
                                                           मुझे इस मामले की कोई जानकारी नही
                                                                                             राजेंद्र चौधरी, प्रदेश प्रवक्ता सपा
ज्ञात हो वर्ष 2016 में जल निगम में इंजीनियर से लेकर क्लर्क तक के 1300 पदों पर भर्ती हुई थी। आजम खान उस समय जल निगम के अध्यक्ष थे। भर्ती में गड़बड़ी को लेकर आजम खान पर भी भष्टाचार के आरोप हैं। सूबे में सत्ता परिवर्तन के साथ ही मौजूदा योगी सरकार ने इस मामले में एसआईटी से जांच कराने के आदेश दिए थे। एसआईटी ने घोटाले की जांच के बाद आजम खां को दोषी मानते हुए योगी सरकार से आजम खान के खिलाफ केस दर्ज करने की इजाजत मांगी थी। सरकार की तरफ से हरी झंडी मिलते ही केस भी दर्ज कर लिया गया था। एसआइटी ने अपनी जांच में पाया था कि जल निगम में भर्ती प्रक्रिया के दौरान नियमों की अनदेखी हुई जिसमें आजम खां की पूर्ण सहमति थी।
इस मामले में डीआईजी (कानून-व्यवस्था) प्रवीण कुमार ने जानकारी दी थी कि एसआईटी ने आईपीसी की धारा 201, 409 और 420 के अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13ए के तहत मुकदमा दर्ज किया है। मुकदमा दर्ज किए जाने से पहले एसआईटी ने इस मामले में विस्तृत जांच की थी। जांच में मामला पाए जाने पर शासन की अनुमति के बाद मुकदमा दर्ज किया गया था।
इस मामले में यूपी पुलिस के विशेष अनुसंधान दल (एसआईटी) ने विगत 22 जनवरी 2018 को पूर्व मंत्री एवं जल निगम के तत्कालीन अध्यक्ष मो. आजम खां का बयान दर्ज किया था। आजम खान ने एसआईटी से कहा था कि यदि भर्तियों में कोई अनिमियतता हुई तो है उससे उनका कोई लेना-देना नहीं है। आजम खां से सम्बन्धित इस मामले में एसआईटी के एसपी नागेश्वर सिंह, एएसपी अमृता मिश्रा और इंस्पेक्टर अटल बिहारी ने पूर्व मंत्री का बयान दर्ज किया था। इससे पूर्व एसआईटी ने 22 सितंबर 2017 को जल निगम मुख्यालय पहुंचकर भर्ती से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की थी। जांच के लिए एसआईटी को मिले शिकायती पत्रों में यह आरोप लगाया गया है कि उनके हस्तक्षेप और दबाव से भर्तियों में अनियमितता बरती गयी जबकि पूछताछ के दौरान आजम खां ने अपनी सहभागिता से साफ इंकार करते हुए सारा दोष निगम के अधिकारियों पर डाल दिया था। ज्ञात हो जल निगम भर्ती घोटाले में ही 122 सहायक इंजीनियर्स को अब तक सेवा से बर्खास्त किया चुका है। इसके अलावा 853 अवर इंजीनियर्स, 225 लिपिकों और 32 आशुलिपिकों की भी भर्ती नियमों की अनदेखी करके हुई थी, फिलहाल इनकी सेवाएं बरकरार रखी गयी हैं।
आजम खां के खिलाफ जौहर यूनिवर्सिटी मामले में भी एक मुकदमा चल रहा है। राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश ने मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के लिए चकरोड और ग्राम समाज की जमीन को विश्वविद्यालय परिसर में गैरकानूनी अनैतिक तरीके से मिला लेने के मामले में मुकदमा चलाने की मंजूरी दी जा चुकी है। बताना जरूरी है कि इस मामले में इलाहाबाद के राजस्व बोर्ड ने आजम खान की आपत्तियों को खारिज कर दिया है। आजम खां पर आरोप है कि जब 2007 से 2012 के बीच में आजम खान कैबिनेट मंत्री थे तो उस समय मुरादाबाद के कमिश्नर ने जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन में चकरोड की जमीन शामिल करने की इजाजत दे दी थी। आजम खां की दलीलों को कोर्ट द्वारा खारिज किए जाने से आजम खां इतने खफा हो गए थे कि यदि सरकार ने जौहर विश्वविद्यालय को छुआ भी तो वे जौहर विश्वविद्यालय को बम से उड़ा देंगे।
इसके अतिरिक्त मोहम्मद आजम खां के खिलाफ उनके गृह जनपद में ही तमाम अन्य सरकारी जमीनों को खुर्द-बुर्द किए जाने का आरोप है। जानकारी के अनुसार समस्त मामलों की जांच के लिए सरकार की तरफ से आदेश भी जारी किए जा चुके हैं।
फिलहाल पूर्ववर्ती सपा सरकार के कार्यकाल में दबंग छवि वाले आजम खां मौजूदा योगी सरकार के खास निशाने पर हैं। हालांकि अभी तक ‘एंटी भूमाफिया टाॅस्क फोर्स’ की सूची में इनका नाम शामिल नहीं किया गया है लेकिन बताया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के बाद इस प्रक्रिया को भी पूरा कर लिया जायेगा और उसी टाॅस्क फोर्स के सहारे आजम के कब्जे वाली जमीनों से तो कब्जा हटेगा ही साथ ही जिन सरकारी जमीनों को आजम खां बेच चुके हैं उसकी भी वसूली की जा सकती है।

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