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म्यांमार में हुआ सरकार का तख्तापलट , एक साल के लिए लगा सेना का शासन 

पड़ोसी देश म्यांमार में जिसका डर था वही हुआ , जहां संसद में आज  एक फरवरी को  सांसदों को चुनाव के बाद से संसद के पहले सत्र के लिए राजधानी नयापीटा में इकट्ठा होना था। उससे पहले म्यांमार की सेना ने सरकार का तख्तापलट कर देश में एक साल के लिए सेना का शासन  लागू कर दिया है।  म्यांमार मिलिट्री  ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि देश में एक साल के लिए सेना का शासन लगाया जाता है। म्यांमार में मिलिट्री ने देश की सबसे बड़ी नेता और सत्ताधारी पार्टी की मुखिया आंग सान सू के साथ राष्ट्रपति को भी हिरासत में ले लिया है। इसके साथ ही देश में किसी भी विरोध को रोकने के लिए सेना ने इंटरनेट और टेलीफोन सेवाएं बंद कर दी हैं। वहीं, किसी भी हिंसक प्रदर्शन को रोकने के लिए सत्ताधारी पार्टी ने देश की जनता से शांति बरतने की अपील की है।

खबरों  के मुताबिक, सेना ने टीवी के जरिए देश में मिलिट्री शासन लागू करने का एलान कर दिया है। इसके साथ ही देश की सबसे बड़ी नेता और स्टेट काउंसलर आंग सान सू  को उनके ही घर में नजरबंद कर दिया गया है। आंग सान सू के साथ ही उनकी पार्टी के कई और बड़े नेताओं को भी या तो हिरासत में ले लिया गया है या फिर नजरबंद कर दिया गया है। हालांकि सेना ने पहले तख्तापलट की खबरों से इनकार किया था मगर पिछले दो महीने के दौरान म्यांमार में जो हालात बन गए  थे उसे देखकर आशंका यही लगाई जा रही थी कि सेना कभी भी देश की लोकतांत्रिक सरकार को सत्ता से हटाकर देश में मिलिट्री राज कामय कर सकती है। और आज एक फरवरी की सुबह  सेना ने म्यांमार में एक साल के लिए सेना का शासन लगाने की घोषणा कर दी है।

सेना और सरकार में  पिछले दो महीने से  जमकर तकरार चल रही थी। दरअसल, सेना लगातार दावा कर रही थी कि हाल में हुए  हुए चुनाव में म्यांमार की सत्ताधारी पार्टी ने अवैध तरीके से चुनाव जीता है। जिसको लेकर सेना और प्रमुख पार्टी नेशनल लीग ऑफ डेमोक्रेसी के बीच कलह का माहौल बन गया था। कुछ दिन पहले म्यांमार सेना के प्रमुख जनरल मिन आंग लाइंग ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर सरकार वोटों की गड़बड़ी पर कार्रवाई नहीं करती है तो फिर सेना कार्रवाई करेगी। सेना प्रमुख के इस बयान के बाद से ही इस बात की प्रबल संभावना बनने लगी थी कि म्यांमार में राजनीतिक हालात खराब हो सकते हैं। हालांकि, बाद में सेना ने तख्तापलट की बात से इनकार कर दिया था मगर आज आधिकारिक तौर पर म्यांमार सेना ने अपनी टीवी के जरिए देश में मिलिट्री रूल लागू करने की घोषणा कर दी है।

म्यांमार भारत का पड़ोसी देश है और दोनों देशों के बीच काफी गहरे संबंध हैं। भारत लगातार म्यांमार की मदद करता रहता है। पीएम मोदी खुद म्यांमार की सबसे प्रमुख नेता आंग सान सू से कई बार मुलाकात कर चुके हैं। वहीं, इस बार भी चुनाव जीतने के बाद पीएम मोदी ने 75 साल की आंग सान सू को बधाई दी थी। आंग सान सू की नेशनल लीग ऑफ डेमोक्रेटिक पार्टी को 476 सीटों में से 396 सीटों पर जीत मिली थी। जिसके बाद से ही सेना चुनाव में गड़बड़ी का आरोप लगा रही थी। हालांकि सत्ताधारी पार्टी का बार – बार कहना था कि चुनाव लोकतांत्रिक तरीके से हुए हैं और कोई भी गड़बड़ी नहीं की गई है।
म्यांमार की सेना के इस कदम को लेकर अमेरिका ने कार्रवाई की धमकी दी है वहीं,  भारत  की भी म्यांमार पर नजर है। अमेरिका ने लोकतांत्रिक सरकार को सत्ता से बेदखल करने को लेकर चिंता जाहिर की है। वहीं, अमेरिका के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर ने राष्ट्रपति जो बाइडेन को म्यांमार की हालातों से वाकिफ करवाया है। व्हाइट हाउस ने अपने बयान में कहा है कि अमेरिका किसी भी लोकतांत्रिक सरकार को हटाने और चुनावी परिणाम बदलने वाली ताकतों का विरोध करता है। सेना ने म्यांंमार में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को चोट पहुंचाई  है।
इससे पहले, सत्तारूढ़ पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी के प्रवक्ता न्यंट ने आंग सू की और राष्ट्रपति विन म्यिंट समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं को सेना द्वारा हिरासत में लिए जाने की पुष्टि की। साथ ही उन्होंने कहा, ”हम अपने लोगों से कहना चाहते हैं कि वे जल्दबाजी में जवाब न दें। वे कानून के मुताबिक कार्रवाई करें।”
करीब 50 साल रही सैन्य तानाशाही  
म्यांमार में लंबे समय तक सैन्य शासन रहा है। वर्ष 1962 से लेकर साल 2011 तक देश में सैन्य तानाशाही रही है। वर्ष 2010 में म्यांमार में आम चुनाव हुए और 2011 में म्यांमार में ‘नागरिक सरकार’ बनी, जिसमें जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों के हाथ देश की कमान सौंपी गई। नागरिक सरकार बनने के बाद भी असली ताकत हमेशा सेना के पास ही रही। इसलिए आज की घटना राजनीतिक संकट का वास्तविक रूप है।
भारत समेत कई देशों ने जताई चिंता
भारत ने म्यांमार के राजनीतिक घटनाक्रम पर चिंता जताई है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा,” म्यांमार के घटनाक्रम से बेहद चिंतित हैं। भारत हमेशा से म्यांमार में लोकतंत्र प्रक्रिया के समर्थन में रहा है।  भारत के अलावा अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों ने तख्तापलट पर चिंता जताई है। साथ ही म्यांमार की सेना से कानून का सम्मान करने की अपील की है।
राजनीतिक संकट का कारण
सेना ने कहा है कि चुनाव परिणामों में हुई धांधली के बाद कार्रवाई की गई है। दरअसल, नवंबर, 2020 के चुनावों में संसद के संयुक्त निचले और ऊपरी सदनों में सू की की पार्टी ने 476 सीटों में से 396 सीटों पर जीत हासिल की थी, लेकिन सेना के पास 2008 के सैन्य-मसौदा संविधान के तहत कुल सीटों का 25 फीसदी आरक्षित हैं। कई प्रमुख मंत्री पद भी सेना के लिए आरक्षित हैं।
 तभी से सेना आरोप लगा रही थी कि चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली हुई। हालांकि, सेना चुनाव में धांधली का सबूत नहीं दे पाई।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने की निंदा  
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस ने म्यांमार में तख्तापलट और नेताओं को सैन्य हिरासत में लिए जाने की निंदा की है।

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