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वैसे तो गोरखपुर का इकलौता राजकीय चिकित्सालय ‘बीआरडी मेडिकल काॅलेज’ सरकार द्वारा प्रदत्त व्यवस्था की नाकामियों के चलते हमेशा से चर्चा में रहा है। चाहें आॅक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत का मामला हो या फिर प्रत्येक वर्ष बरसात के दिनों में डेंगु, चिकनगुनिया, मस्तिष्क ज्वर जैसी बीमारियों से बच्चों के मरने की भारी तादाद। चूंकि यह चिकित्सालय गोरखपुर का सबसे बड़ा चिकित्सालय है लिहाजा यहां पर इलाज कराने के लिए आस-पास के जनपदों से भी मरीज आते रहते हैं। हालांकि चिकित्सकों की कबिलियत पर उंगली नहीं उठायी जा सकती लेकिन इस अस्पताल में मरीजों की भारी तादाद को देखते हुए शासन स्तर से जो भारी-भरकम बजट जारी किया जाता है उसका या तो सही ढंग से उपयोग नहीं किया जा रहा है या फिर बीच में ही बजट में सेंध लग रही है। परिणामस्वरूप भारी-भरकम बजट भी इस अस्पताल की व्यवस्था को ठीक रखने के लिए पर्याप्त नहीं जान पड़ता। खास बात यह है कि यह अस्पताल यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कर्मस्थली और संसदीय क्षेत्र में मौजूद है। जब उनकी पार्टी सत्ता में नहीं थी उस वक्त भी योगी आदित्यनाथ को इस अस्पताल की दशा सुधारने की चिंता सताया करती थी अब जबकि योगी आदित्यनाथ सूबे की सत्ता पर विराजमान हैं इसके बावजूद तमाम प्रयासों के बावजूद इस अस्पताल की दशा में सुधार की किरण नजर नहीं आ रही। बीच में खाने-कमाने वाले आला अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकने में कामयाब हो ही जाते हैं।
बीआरडी मेडिकल काॅलेज प्रशासन के भ्रष्टाचार से सम्बन्धित एक ऐसा ही मामला हाल ही में प्रकाश में आया। हुआ यूं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ अपने संसदीय क्षेत्र (पूर्व) गोरखपुर स्थित बीआरडी मेडिकल काॅलेज का मुआयना करने आए। जब तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अस्पताल में मौजूद रहे तब तक पूरा अस्पताल प्रशासन उन्हें एक-एक स्थान का चाक-चैबन्द स्थानों का भ्रमण कराता रहा। खासतौर से जिस आईसीयू सेंटर का उद्घाटन (अगस्त 2017) योगी आदित्यनाथ ने किया था वह सेंटर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जाते ही पुनः तालों से जड़ दिया गया। बताया जा रहा है कि जिस दिन मुख्यमंत्री दौरा करने आए थे उसी दिन आईसीयू का ताला खोलकर उसकी साफ-सफाई की गयी थी।
मेडिकल कालेज के ट्रामा सेंटर में बने आईसीयू में वैसे तो हर जरूरी व्यवस्था मौजूद है लेकिन स्टाॅफ न होने के कारण इस आईसीयू को पूरी क्षमता के साथ इस्तेमाल में नहीं लाया जा रहा। अस्पताल प्रशासन के ही एक कर्मचारी का कहना है कि लगभग एक वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है लेकिन आईसीयू में किसी मरीज को भर्ती नहीं किया जा सका है।
बताते चलें कि विगत दिनों 16 जुलाई को मुख्यमंत्री ने बीआरडी मेडिकल काॅलेज में 80 करोड़ की लागत से 11 परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया था। मुख्यमंत्री ने इस अस्पताल में 3.33 करोड़ की लागत से 125 बेड का रैनबसेरा, 12 करोड़ से होने वाले इलेक्ट्रानिक सुरक्षा कार्य, 4 करोड़ की लागत के फायर हाइड्रेंट सिस्टम का अपग्रेडेशन, 7.69 करोड़ की लागत से 10 वार्डों के रिनोवेशन का कार्य, 9.32 करोड़ के लेबर कांपलेक्स का निर्माण के साथ ही 7.37 करोड़ रुपये से 79 बेड के फैब्रिकेटेड वार्ड का लोकार्पण, 2.83 करोड़ की लागत के 500 किलोवाॅट के सोलर पावर प्लांट का उद्घाटन, 22.23 करोड़ की लागत के वार्ड 11 में 06 माॅड्यूलर ओटी वार्ड का लोकार्पण, 39 लाख की लागत के कार्डियोलाॅजी वार्ड का उच्चीकरण, 92 लाख की लागत के गैस्ट्रोइंट्रोलाॅजी वार्ड का उच्चीकरण और 3.58 करोड़ की लागत के वार्ड 11 का उच्चीकरण की आधारशिला रखी थी। शासन से बजट भी जारी हो चुका है। रही बात इतनी परियोजनाओं का शिलन्यास किए जाने के उपरांत दशा सुधरने की तो अस्पताल प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी तक मुतमईन नहीं हैं। चर्चा इसी बात की है कि जब तक अस्पताल प्रशासन के बीच व्याप्त भ्रष्टाचार को समूल नष्ट नहीं किया जाता तब तक चाहें कितनी ही योजनाओं का शिलन्यास क्यों न हो जाए बीआरडी की दशा सुधरने वाली नहीं। बरसात का मौसम शुरु हो चुका है और इसी मौसम में इस अस्पताल में विभिन्न बीमारियों और महामारियों से मरने वालों की संख्या हर वर्ष एक नया रिकाॅर्ड बनाती है। हालांकि अस्पताल प्रशासन की तरफ से दावा किया जा रहा है कि इस बार ऐसा नहीं होने वाला, महामारियों और बीमारियों से लड़ने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं लेकिन स्थानीय लोगों के बीच विश्वास नजर नहीं आता।

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