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सभी तस्वीरें सच नहीं बोलती हैं, लेकिन कुछ तस्वीरें चीख-चीख कर सिर्फ़ सच ही नहीं बोलती बल्कि इन्सान के हृदय को झकझोर कर उसके इन्सान होने पर सवाल भी उठाती है। हाँ, दानिश सिद्दीकी की तस्वीरें ऐसी ही थीं। पिछले दो सालों में रॉयटर्स की जिन तस्वीरों ने दुनिया को हिला कर रख दिया, वो तस्वीरें दानिश सिद्दीकी ने खींचीं थीं यह हमें उनके मरने के बाद पता चला। ये वो तस्वीरें हैं जिनको हम जब भी देखेंगे दानिश सिद्दीकी की याद ज़रूर आएगी।

अच्छा फोटोग्राफर वही है जिसकी तस्वीरें बातें करती हैं आपको हमको रूलाती हैं और हंसाती हैं। भला, दानिश तो अच्छी फोटोग्राफी और बहुत अच्छी फोटोग्राफी में हम कैसे तौल सकते हैं। वर्ष 2018 में दानिश पहले ही यह बतला चुके थे कि वह किसी रेस का हिस्सा नहीं हैं, बस वो अपना काम कर रहे हैं। शायद इसीलिए उन्हें 2018 में रोहिंग्या लोगों की पीड़ा कवर करने के लिए पुलित्ज़र पुरस्कार मिला।

कितना कहूं दानिश की तस्वीरों पर बस ये लिखते वक्त भी एक तस्वीर आंखों के प्रतिबिम्ब का अर्थ के सामने आ रही है। पिछले दिनों हमने एक ज़हीन फोटो जर्नलिस्ट दानिश सिद्दीकी को खो दिया। दानिश(Danish) अब हमारे बीच नहीं हैं मगर उनके कैमरे में कैद तस्वीरें हमारे आपको दिलों में मोहब्बत की जंजीरों से जकड़ी हुई हैं। दानिश सिद्दकी(Danish Siddiqui) की मौत पर भी मजहबी जहर घोलने वाले लोगों ने वही काम किया। इसके अलावा लोगों ने गोलियों को लानतें भेजी मगर तालिबान के नाम पर उनके मुंह से कुछ नहीं निकला। ये कौन लोग हैं , जिनकी इंसानियत मर चुकी है, कहां से आते हैं और इनकी मानसिकता क्या है? ये कौन लोग हैं जो किसी व्यक्ति के अनायास मारे जाने पर उत्सव मनाते हैं?

कंधार में युद्ध के हालात को कवर कर रहे थे, दानिश

अफगानिस्तान(Afganistan) पहुंचने के बाद से ही दानिश सिद्दीकी अपने ट्विटर हैंडल पर काफी सक्रिय थे और उन्होंने 13 जुलाई को उन पर हुए तालिबान के हमले का एक वीडियो भी शेयर किया था। तब उन्होंने बताया था कि वो इस हमले में बाल बाल बच गए हैं, लेकिन दानिश सिद्दीकी(Danish Siddiqui) अफगान सैनिकों और तालिबान के बीच लड़ाई को कवर करते हुए मारे गए। पिछले कई दिनों से वो कंधार( kandhaar) में जो हालात हैं उसको कवर कर रहे थे। Danish अफगानिस्तान के स्पिन बोल्दाक जिले में संघर्ष के दौरान मारे गए। दानिश की मौत की खबर सुनकर भारत में लोग दुखी हैं और तालिबान का दर्द मिलना भी शुरू हो गया है।

प्रोटोकॉल तोड़ वीसी ने दी दानिश के शरीर को जामिया में दफ़नाने की मंजूरी

जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय (Jamia Milia Islamia University) के अनुसार, दानिश सिद्दीकी के शव को जामिया के कब्रिस्तान में दफनाया गया। वाइस चांसलर(Vice Chancellor) ने इसके लिए प्रोटोकॉल को तोड़ते हुए मंजूरी दी। आमतौर पर कब्रिस्तान को जामिया के कर्मचारियों, उनके पति या पत्नी या फिर नाबालिग बच्चों के लिए रिजर्व रखा जाता है लेकिन यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर ने कहा कि,” दानिश सिद्दीकी(Danish Siddiqui) के लिए यह मंजूरी दी जा रही है। बताते चलें कि सिद्दीकी इसी यूनिवर्सिटी के छात्र रहे हैं और वह एक समाचार एजेंसी के लिए काम किया करते थे।”

“सिद्दीकी के परिवार द्वारा किए गए अनुरोध के तहत दानिश का पार्थिव शरीर जामिया के कब्रिस्तान में दफनाया जाएगा, जोकि अमूमन यूनिवर्सिटी के स्टाफ, स्टाफ की पति पत्नी या फिर नाबालिग बच्चों के लिए आरक्षित रहता है।”

दानिश का जामिया से पुराना नाता था

सिद्दीकी का जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से पुराना नाता रहा है, उनके पिता मोहम्मद अख्तर सिद्दीकी(akhtar siddiqui) भी इसी विश्वविद्यालय में एजुकेशन फैकल्टी में प्रोफेसर थे और जामिया नगर में रहते हैं। सिद्दीकी भी खुद जामिया के छात्र रहे हैं, उन्होंने यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में ग्रेजुएशन और मास कम्युनिकेशन(mass communication) में पोस्ट ग्रेजुएशन भी किया था।

वहीं इस मामले पर राजनीतक घमासान भी तेज होता जा रहा है। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम(P. Chidambaram) ने ट्विटर के माध्यम से सरकार पर हमला करते हुए कहा कि,”दानिश सिद्दीकी की दुखद मौत और महंगाई, इन दो विषयों पर बीजेपी या फिर NDA की तरफ से कोई टिप्पणी नहीं आएगी, क्योंकि यह दोनों मामले सरकार के झूठे नेरेटिव में फिट नहीं बैठते हैं।”

दानिश सिद्दीकी ने कोरोना काल के दौरान ऐसी कई तस्वीरें अपने कैमरे में कैद की थी, जिसको देखकर दुनिया हिल गई थी। वह पिछले कई दिनों से अफगानिस्तान ( Afganistan) में थे और इस तनातनी का कवरेज कर रहे थे।

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