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गोधरा कांड में मोदी पर सुनवाई 26 को

सुप्रीम कोर्ट ने 2002 में गुजरात के गोधरा कांड के बाद हुए दंगे के सिलसिले में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को विशेष जांच दल द्वारा क्लीनचिट दिए जाने को चुनौती देने वाली जाकिया जाफरी की याचिका पर सुनवाई 26 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी गई है। गौरतलब है कि 27 फरवरी 2002 को साबरमती एक्सप्रेस की आग में कारसेवकों की मौत के बाद पूरे गुजरात में जगह-जगह हिंदू और मुसलमानों के बीच हिंसक टकराव हुए थे। दंगों की कई घटनाओं में से एक अहमदाबाद के गुलबर्ग हाउसिंग सोसायटी कांड था। 28 फरवरी 2002 को इस सोसायटी को घेरकर बेकाबू भीड़ ने 69 लोगों की हत्या कर दी थी। मृतकों में इसी सोसायटी में रहने वाले कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी भी शामिल थे। एहसान जाफरी जाकिया जाफरी के पति थे। एहसान जाफरी पर दंगाइयों ने तब हमला किया था जब वह दंगों की बाबत उच्चाधिकारियों से फोन पर वार्ता कर रहे थे। इस मामले में एक एसआईटी जांच हुई थी। जिनमें दंगों में मारे गए कांग्रेसी सांसद एहसान जाफरी के बारे में सर्वोच्च न्यायालय की ओर से गठित विशेष जांच दल की रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्होंने हिंसक भीड़ पर गोली चलाकर उसे भड़काया था। एसआईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा था कि एहसान जाफरी ने भीड़ पर गोली चलाई जिसमें भड़की भीड़ गुलबर्ग सोसायटी में घुस गई और वहां आग लगा दी। सुप्रीम कोर्ट की बनाई एसआईटी ने 2002 के गुजरात दंगों के मामले में जाकिया जाफरी की ओर से दाखिल शिकायत पर दायर रिपोर्ट में कहा गया था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और 57 अन्य के खिलाफ उसे कोई सबूत नहीं मिले हैं। याद रहे कि गुजरात के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी संजीव भट्ट ने आरोप लगाया था कि 27 फरवरी 2002 की मुख्यमंत्री के निवास पर हुई एक बैठक में नरेंद्र मोदी ने आदेश दिया था कि हिंदुओं को गुस्सा निकालने दिया जाए।

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