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यहां छोटी उम्र में ही देह व्यापार में धकेल दी जाती है लड़कियां

विश्व में कई ऐसे स्थान हैं जो वेश्यावृति के लिए प्रसिद्ध हैं। ऐसा ही एक केंद्र है पश्चिम बंगाल का ‘सोनागाछी’ है यह एशिया का सबसे बड़ा वेश्यावृति वाला क्षेत्र माना जाता है। कहा जाता है कि यहां लगभग 10,000 से अधिक सेक्स वर्कर काम कर रही हैं। साथ ही कई मेल वर्कर भी वेश्यावृति के धंधे में लिप्त हैं। सोनागाछी नॉर्थ कोलकाता के शोभाबाजार क्षेत्र में स्थित है।
सोनागाछी का बांग्ला भाषा में मतलब होता है सोने का पेड़। किवदंतियों के मुताबिक कलकता शहर के शुरुआती दिनों में एक कुख्यात डकैत था जो अपनी मां के साथ यहां रहा करता था। मां मृत्यु के बाद यह कहा जाता है कि उसने अपनी झोपड़ी में एक आवाज सुनी थी। इसमें कुख्यात डाकू अपनी मां से कहता है कि मां मैं एक गाजी बन गया हूं। यहीं से सोना गाजी की शुरुआत हुई। यहां डकैत ने अपनी मां की याद में एक मस्जिद का निर्माण करवाया। हालांकि बाद में सोना गाजी क्षेत्र काफी व्यस्त हो गया और सोनागाजी परिवर्तित हो गया सोनागाछी में। जिस्म, जाम और जान की बाजी- तीन खेल से सोनागाछी मशहूर है। जी हां, सोनागाछी के ये तीन खास खेल हैं।
बड़ी पुरानी कहावत है कि कंचन-कामिनी और मदिरा की तिकड़ी भी अपने आप बन जाती है। जिस्म की दुकान पर मौज-मस्ती के लिए बेफिक्र बनाने में जाम शायद मददगार साबित होता होगा। यह भी हो सकता है कि दो घूंट गले से उतरने के बाद गलत काम का अपराध बोध काफूर हो जाता हो या फिर बेपर्दगी का सामना करने के लिए शराब पीकर पर्देदार लोग अपनी झिझक व शर्म भगाते हों और हिम्मत जुटाते हों। मसलन, दलाल के साथ गली से गुजरते हुए एक बेफिक्र अधेड़ और उसके साथ लड़ऽड़ाते हुए चल रहे 25-26 साल के युवक के बीच की बातचीत गौर करने लायक है।
सोनागाछी की गलियों में कई जगह तो जाहिरा तौर पर शराब मिलती है और कई जगह किस्म-किस्म की ऐसी रंग-बिरंगी शीशियों-बोतलों में कि सरसरी तौर पर लगे कहीं यह शरबत या टॉनिक तो नहीं। प्याजी पकौड़ी की दुकानों पर बाजार की नजाकत से वाकिफ लोगों को गिलास में पानी की जगह पानी के ही रंग वाली देसी दारू भी आसानी से मिल जाती है। कई दुकानों पर चाय-पकौड़ी और दूसरी चीजें बेचना तो महज एक आड़ है। दरअसल इन दुकानों पर बिकती है देसी शराब, जिसे बांग्ला या बांग्लू कहते हैं।
शौकीन ग्राहकों के मांगने पर बाड़ीवाली बऊ दी खुद भी देसी-विदेशी शराब मंगा देती है। लेकिन आम तौर पर धंधे के वक्त लड़कियों के दारू पीने पर मनाही है। शायद इसलिए कि लड़की कहीं नशे के सुरूर में बहक कर धंधा चौपट न कर दे। हां, सारी रात के लिए आए और बुक कराए ग्राहक की फरमाइश पर लड़की का दारू-सिगरेट पीना जरूर धंधे का हिस्सा है।
जिस्म बाजार के कई अड्डे किसिम-किसिम के अपराधियों, गुंडे, बदमाशों के पनाहगार भी हैं। क्योंकि वे ग्राहक हैं और ग्राहक के लिए दरवाजा हर वक्त खुले रखना इस बाजार का धर्म है। एक दलाल ने एक दिलचस्प बात बताई कि यहां एक अड्डे पर तो केवल शहर के गुंडे-बदमाश ही आते हैं। यह अड्डा आम ग्राहक के लिए नहीं है। शायद अड्डे की मालकिन ने सब तरह से हिसाब बैठाकर इसे स्पेशल बना रखा है।
सोनागाछी जिस्म बाजार के संचालन का सारा दारोमदार बाड़ी वाली बऊ दी पर होता है। कुछ तो बऊ दी किस्म की महिलाओं की अपनी बाड़ी है और बहुतेरी बऊ दी मकानों की पुरानी किराएदार हैं। जिस्म बाजार में समय-समय पर पुलिस की होने वाली छापेमारियों से निपटना, पकड़ी गई लड़कियों को छुड़ाकर वापस लाना, ग्राहकों और गुंडे-बदमाशों की ज्यादतियों से अपनी लड़कियों को बचाना- यह सारा सिरदर्द बऊ दी का है।
‘क्या बऊ दी लोग शादीशुदा होती हैं?’
नहीं-नहीं बऊ दी रखैला रखती हैं, रखैला। कोई टैक्सी वाला होता है, कोई चाय-पान की गुमटी वाला और कोई छोटा-मोटा दुकानदार। सप्ताह में कभी उसका आदमी घर आ जाता है।
सोनागाछी की बऊ दी महिलाओं के बच्चे भी हैं, लड़के-लड़कियां। वे बच्चों को स्कूल भेजती हैं। बाड़ी में मास्टर बच्चों को टड्ढूशन पढ़ाने आते हैं। जाहिर है कि बऊ दी के मन में यह इच्छा जरूर है कि उनके बच्चे किसी तरह पढ़-लिखकर सोनागाछी जिस्म बाजार की चौहद्दी पार करके दूसरी बेहतर दुनिया में शामिल हो जाएं।
इस जिस्म बाजार की लड़कियों की हैसियत भी तीन तरह की है। पांच सौ से हजार तक ऐसी लड़कियां हैं, जिन्हें हाई क्लास कहा जाता है। इनकी फीस ढाई सौ से तो कतई कम नहीं है और ऊपर हजार-डेढ़ हजार तक जा सकता है। गिफ्ट वगैरह अलग से। हाई क्लास लड़कियां शहर के होटलों में भी जाती हैं, खाली फ्लेट वाले तनहा गुणग्राहक के घर भी।
कुछ ऐसी भी हैं जो किसी की निजी हैं। लेकिन अगर सचमुच वे वफादारी के साथ निजी बनी रहें, तब फिर क्या जिस्म बाजार का रिवाज नहीं टूटेगा? बेवफाई और फरेब पर ही तो टिका है यह जिस्म बाजार। ‘जब लड़की का परमानेंट आदमी किसी दिन नहीं आता तो महंगी फीस वाला टेम्परेरी ग्राहक भी चल जाता है।’
सोनागाछी की हाई क्लास लड़कियों के पास एक-एक साफ-सुथरे अच्छे कमरे हैं और टीवी-विडियो जैसी मनोरंजन की सुविधाएं भी। खाना बनाने,खिलाने के लिए नौकरानी भी है। बाजार से रोजमर्रा की ख़रीदारी के लिए नौकर भी। ये लड़कियां उत्तर प्रदेश के आगरा और आसपास के इलाके की हैं। कह सकते हैं कि ये जानबूझ कर पेशेवर बनी हैं।
-मनोज चौधरी

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