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गठबन्धन की हांडी में रालोद की खिचड़ी

लोकसभा चुनाव के मद्देनजर यूपी में रालोद के भविष्य का फैसला शायद सपा प्रमुख अखिलेश यादव को ही करना है, यही वजह है कि रालोद नेता और चैधरी अजीत सिंह के पुत्र जयंत चैधरी ने आज सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ औचक मुलाकात के साथ ही सीटों को लेकर भी चर्चा की। सपा नेताओं की मानें तो पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने जयंत चैधरी की पार्टी को सम्मानजनक सीटें देने का वायदा किया है। जाहिर है ये सीटें सपा अपने हिस्से से देगी। बताते चलें कि सपा-बसपा गठबन्धन ने यूपी की 80 सीटों में से 38-38 सीटें आपस में बाट ली हैं। अब किसी अन्य दल को यदि सीटों की आवश्यकता होगी तो वह या तो सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मिलेगा अथवा बसपा प्रमुख मायावती से। सपा-बसपा महागठबन्धन द्वारा दो सीटें पहले ही कांग्रेस के लिए छोड़ी जा चुकी हैं। रही 02 अन्य सीटों की तो उसे ऐन वक्त पर फैसला लिए जाने के लिए छोड़ा गया है।
कहा जा रहा है कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पश्चिम उत्तर प्रदेश की आधा दर्जन सीटें अपने हिस्से से दिए जाने का आश्वासन दिया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद जयंत चैधरी के चेहरे पर छायी मुस्कुराहट स्पष्ट संकेत दे रही थी कि वार्ता सफल रही और रालोद ने जितनी अपेक्षा सपा से की थी वह इच्छा उसकी पूरी हुई है। जयंत चैधरी ने एक छोटी प्रेस वार्ता के दौरान भी यही कहा कि अखिलेश यादव के साथ उनकी बैठक और सीटों पर बातचीत अच्छी रही। बकौल जयंत चैधरी, ‘अखिलेश से बहुत अच्छी बातचीत हुई है। इससे पहले जो बातें हुई थी उसे और आगे बढ़ाया गया है। उम्मीद है कि यह सिलसिला यूं चलता रहेगा।’
रालोद नेता जयंत चैधरी इस मौके पर उन अटकलों पर भी विराम लगा गए जिसके बारे में यह कहा जा रहा था कि सपा-बसपा द्वारा 38-38 सीटें बांट लिए जाने के बाद रालोद निराश होकर भाजपा की गोद में जा बैठेगी। जयंत प्रेस वार्ता के दौरान स्पष्ट कहा कि भाजपा जनता पार्टी पूरी तरह से किसान विरोधी पार्टी है और रालोद हमेशा से ही किसानों के हित की बात करती रही है, और किसान ही उसका असली वोट बैंक है। यही वजह कि भाजपा के साथ किसी प्रकार के समझौते की न तो बात की गयी है और न ही भविष्य में की जायेगी।
जयंत चैधरी इतना जरूर कह गए हैं कि ‘सवाल विश्वास का और साथ का है। जैसे कैराना में एक दूसरे का तालमेल अच्छा रहा है, आगे भी अच्छा रहेगा।’ श्री चैधरी ने यह भी कहा कि जैसा अखिलेश यादव ने कहा है कि जो हमारे साथ है वह साथ रहेगा और साथ ही साम्प्रदायिक ताकतों से लड़ाई लड़ेंगे, यदि ऐसा ही चलता रहा तो हम लोकसभा चुनाव ही नहीं बल्कि अगले विधानसभा चुनावों में साथ-साथ नजर आयेंगे।’
बताते चलें कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ रालोद नेता जयंत चैधरी की यह मुलाकात इतनी गुप्त थी कि इसकी भनक रालोद के प्रदेश नेताओं को भी नही थी। जयंत चैधरी अकेले सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मिलने सपा कार्यालय गए थे।
सपा-बसपा गठबन्धन की हांडी में रालोद की खिचड़ी कितना मजा देगी यह तो चुनाव परिणाम ही तय करेंगे लेकिन रालोद की सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात ने प्रदेश भाजपा की रणनीति को एक बार फिर से दिशा बदलने पर मजबूर कर दिया है। जाहिर है यदि रालोद ने सपा-बसपा गठबन्धन का साथ दिया तो पश्चिम उत्तर प्रदेश की कई सीटों पर भाजपा को हार का सामना करना पडे़गा।

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