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गठबन्धन का धोबी पछाड़ दांव

बनारस में यूपी के गठबन्धन का धोबी पछाड़ दांव बेहद चर्चा में है। गठबन्धन ने ऐन वक्त पर पहले से घोषित शालिनी यादव के स्थान पर बीएसएफ से बर्खास्त किए गए जवान तेज बहादुर यादव को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है। तेज बहादुर को प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद भी भले ही नरेन्द्र मोदी की दावेदारी में कोई खास फर्क न पड़ा हो लेकिन यह चुनाव रोचक जरूर बन गया है। ऐसा इसलिए कि नरेन्द्र मोदी पुलवामा में शहीद हुए सैनिकों के सम्मान के नाम पर वोट मांग रहे हैं और दूसरी ओर वह एक सैनिक के सम्मान की लाज भी नहीं रख सके। इस सैनिक को महज इसलिए सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था क्योंकि उसने सोशल साइट पर जवानों को दिए जाने वाले खाने की बुराई करने की हिम्मत जुटायी थी। यह दोहरा चरित्र बनारस की सड़कों से लेकर गलियों और गांव-देहातों से लेकर कस्बों की चाय दुकानों में खूब चर्चा का विषय बना हुआ है। यदि गहराई से अनभिज्ञ आम व्यक्ति बनारस में किसी प्रत्याशी विशेष के प्रति लहर की बात करे तो एक नजर में इस जवान को लोग खूब पसन्द कर रहे हैं लेकिन यह पसन्द वोट में कितनी तब्दील होगी? सभी जानते हैं। यह बात गठबन्धन के नेता भी अच्छी तरह से जानते हैं कि मोदी को बनारस से मात देना कठिन ही नहीं बल्कि नामुमकिन है, चूंकि चुनाव के दौरान आम जनता का मन भटकता रहा है इसलिए गठबन्धन को पूरी उम्मीद है कि उनका यह प्रत्याशी मोदी को टक्कर अवश्य देगा। जवान के प्रचार करने का तरीका भी बेहद शालीनता भरा है। वह मात्र कुछ साथियों संग बनारस की गलियों में पैदल ही घूम रहा है और सरकार की नीति और नियत से आम जनता को अवगत करा रहा है। बताते चलें कि तेज बहादुर ने इससे पूर्व निर्दल प्रत्याशी के रूप में पर्चा दाखिल किया था। कहा जा रहा है कि गठबन्धन की तरफ से टिकट दिए जाने के बाद से इस जवान के वोट बैंक में वृद्धि से इंकार नहीं किया जा सकता। कहा तो यहां तक जा रहा है कि यह जवान कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय को पछाड़कर मोदी को कड़ी टक्कर देने वाला है। शायद यही वजह है कि पिछले कुछ दिनों से बनारस की गलियों में भाजपा कार्यकर्ताओं की गतिविधियां एकाएक बढ़ गयी हैं। भाजपा कार्यकर्ता मोदी के कद को देखते हुए भी किसी प्रकार की कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहते। जब से जवान तेज बहादुर ने पर्चा दाखिल किया है तब से भाजपा कार्यकर्ताओं की चहल-पहल खासी बढ़ गयी है। कार्यकर्ता घर-घर जाकर वोट की अपील करते नजर आ रहे हैं। दूसरी ओर यूपी भाजपा कार्यालय में भी बनारस की सीट को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। कोशिश यही है कि तेज बहादुर की दावेदारी के बावजूद मोदी को रिकाॅर्ड मतों से जिताया जाए। कहा तो यह भी जा रहा है कि इस कार्य में स्थानीय प्रशासन को भी हिदायत दी जा चुकी है। चूंकि यूपी में भाजपा की सरकार है लिहाजा स्थानीय प्रशासन येन-केन-प्रकारेण मोदी की जीत में अपनी भूमिका जरूर निभायेगा।
 बनारस से कांग्रेस ने बाहुबली नेता अजय राय को मैदान में उतारा है। अजय राय दूसरी बार बनारस से प्रत्याशी हैं। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में अजय राय को मोदी ल

हर के चलते शर्मनाक पराजय का सामना करना पड़ा था। अजय राय अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए थे। इस बार की तस्वीर कुछ और ही कहानी कह रही है। कांग्रेसियों के साथ ही अजय राय भी दावा कर रहे हैं कि इस बार पहले जैसी स्थिति नहीं है। मोदी को लोग अब पहचान चुके हैं लिहाजा इस बार मोदी को कांग्रेस की तरफ से कड़ी टक्कर मिलेगी। अजय राय के रोड शो में प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर भी उपस्थित थे। स्पष्ट है कि यूपी कांग्रेस के नेता इस बार बनारस की सीट पर कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। दूसरी ओर कहा जा रहा है कि भले ही अजय राय ही जमानत इस बार जब्त न हो लेकिन जीत उनसे कोसों दूर है। अब जबकि गठबन्धन की तरफ से बीएसएफ से बर्खास्त तेज बहादुर का टिकट दिया गया है लिहाजा अजय राय की जीत का तो प्रश्न ही नहीं बनता। इस लिहाज से देखा जाए तो मोदी के मुकाबले तेज बहादुर बराबरी की ताल ठोंकते नजर आ रहे हैं।

तेज बहादुर के अलावा रामराज्य परिषद के प्रत्याशी स्वामी श्री भगवान वेदान्ताचार्य की चुनौती भी इस बार मोदी के समक्ष होगी। स्वामी श्री भगवान वेदान्ताचार्य काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से चार बार गोल्ड मेडलिस्ट रह चुके हैं और वे अखिल भारतीय संत परिषद के राष्ट्रीय संयोजक भी हैं। इस मौके पर संत समाज ने परमधर्म हिन्दू घोषणा पत्र भी जारी किया है। इस घोषणा पत्र में 28 घोषणाएं की गई थीं। इसमें मुख्य रूप से गौ हत्या पर रोक, गंगा की सफाई, नकली धर्माचार्यों पर अंकुश, राम जन्म भूमि, काशी, मथुरा सहित देश भर में मंदिर विवाद का हल लिखा गया है।
मोदी के खिलाफ मैदान में चुनौती देने वाले स्वामी श्री भगवान वेदान्ताचार्य का कहना है कि इस देश में सनातन धर्मियों की संख्या 100 करोड़ है लेकिन हमारी सरकारें किसी भी प्रकार से ध्यान नहीं दे रहीं। कांग्रेस सरकार तुष्टिकरण की राजनीति करती थी इसलिए उन्हें पिछले चुनाव में हिन्दुओं ने त्याग कर भाजपा को चुना क्योंकि भाजपा ने कहा था की हम हिन्दू हित के पैरोकार हैं। इन्हे मौका दिया गया पर इन्होने कोई कार्य नहीं किया। हमारी गायें कटती रहीं, हमारी गंगा गन्दी ही रही और हमारे भगवान् श्रीराम का मंदिर नहीं बना। इससे हमें लगा कि अब सनातन धर्मियों के उत्थान के लिए हमें आगे आना होगा इसलिए हमने मैदान में स्वयं उतरने की ठानी।
स्वामी श्री भगवान वेदान्ताचार्य का कहना है कि चुनाव की कोई रणनीति नहीं है। यह हमारी प्रतीकात्मक लड़ाई हैं। नरेंद्र मोदी जी ने हिन्दुत्व के मुद्दे को दरकिनार कर विकास को आगे रखा। उसके अलावा उन्होंने राम मंदिर का कोई विकास नहीं किया। बस कहते रहे कि राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे। इसके अलावा उन्होंने काशी के विकास के नाम पर श्री काशी विश्वनाथ के आस पास कई प्राचीन मंदिरों को तोड़ा और कहा कि बाबा विश्वनाथ सांस नहीं ले पा रहे थे। हम लोगों ने आवाज उठाई तो हमारी भी सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने जो हिन्दुओं के दिल पर जो हथौड़ा चलाया उसके विरुद्ध ये प्रतीकात्मक लड़ाई है।
स्वामी श्री भगवान वेदान्ताचार्य की दावेदारी के बाद से मोदी की इस बार की जंग को कतई आसान नहीं कहा जा सकता। यदि मोदी को अपनी प्रतिष्ठा बचानी है तो भाजपाइयों को पूरा दमखम लगाना होगा अन्यथा ‘सावधानी हटी, दुर्घटना घटी’ वाली कहावत से इंकार नहीं किया जा सकता। यूपी की जनता कब किसको सिर पर बिठा ले, कहा नहीं जा सकता। 1984 का आठवां लोकसभा चुनाव किसे याद नहीं होगा, जब सिने स्टार अमिताभ बच्चन ने पहली बार दिग्गज नेता हेमवती नन्दन बहुगुणा को राजनीति की पहली सीढ़ी में ही पटखनी दे डाली थी। इस लिहाज से देखा जाए तो भाजपा के समक्ष इस बार चुनौती है और इस चुनौती से पान पाना उनकी नाक का सवाल भी है।

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