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गंगा के लिए एक और संत की शहादत

गंगा एक्ट लागू करने की मांग को लेकर अनशन कर रहे जीडी अग्रवाल उर्फ ज्ञानस्वरूप सानंद का 11 अक्टूबर को निधन हो गया। सानंद पिछले 22 जून हरिद्वार के मातृसदन में अनशन कर रहे थे। 9 अक्टूबर को उन्होंने जल भी त्याग दिया था। जल त्यागने के अगले दिन ही हरिद्वार प्रशासन उन्हें जबरन श्रषिकेश एम्स में भर्ती कर दिया। वहां के डॉक्टरों ने उन्हें दिल्ली रेफर कर दिया। दिल्ली ले जाने के दौरान रास्ते में ही उनका निधन हो गया।
मातृसदन में अनशन पर बैठे सानंद को जबरन उठाए जाने के दौरान वहां के ब्रह्मचारियों ने प्रशासन पर धारा-144 के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कार्रवाई का विरोध भी किया। प्रशासन ने उनके विरोध को दरकिनार कर दिया। अस्पताल में भी उनका अनशन जारी था। इसके पहले भी एक और उन्हें जबरन उठाकर अस्पताल में भर्ती करवाया गया था।
सानंद गंगा एक्ट लागू करने की मांग को लेकर 22 जून से मातृसदन आश्रम में अनशन कर रहे हैं। 8 अक्टूबर को उन्होंने जल भी त्याग दिया था। इससे पहले हरिद्वार के सांसद डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने उनसे जल न त्यागने का आग्रह किया था, लेकिन सानंद ने उनका आग्रह ठुकरा दिया था।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी तीन बार अपने प्रतिनिधि भेजकर सानंद से अनशन समाप्त करने का अनुरोध कर चुके हैं। गडकरी के प्रतिनिधि के तौर केंद्रीय मंत्री जंलसंसाधन उमा भारती ने भी मातृसदन आश्रम में सानंद से मुलाकात कर अनशन समाप्त कराने का प्रयास किया था। गडकरी से फोन पर वार्तालाप के बाद भी सानंद ने गंगा एक्ट लागू होने तक अनशन जारी रखने की बात कही।
दस अक्टूबर को दोपहर एक बजे सिटी मजिस्ट्रेट मनीष सिंह, सीओ कनखल स्वप्न किशोर और थानाध्यक्ष ओमकांत भूषण पुलिस फोर्स सहित मातृसदन आश्रम पहुंचे। ज्ञानस्वरूप सानंद के समर्थन में लोग विरोध प्रदर्शन न करें इसके लिए पहले ही क्षेत्र में धारा-144 लगा दी गई थी।
प्रशासन ने मातृ सदन के ब्रह्मचारियों को गिरते स्वास्थ्य का हवाला देते सानंद को अस्पताल में भर्ती कराने की बात कही। आश्रम के ब्रह्मचारियों प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया। ब्रह्चारी दयानंद ने कहा कि प्रशासन धारा 144 का दुरुपयोग कर रहा है।
उन्होंने कोर्ट के आदेश की आवमानना की बात कहते हुए हाईकोर्ट में अपील करने की बात भी कही। इसके बावजूद पुलिस ने जबरन सानंद को गाड़ी में बिठा लिया। हाईकोर्ट से पूर्व में मिले निर्देशानुसार प्रशासन ने सानंद को ऋषिकेश स्थित एम्स में भर्ती करा दिया था। वहां के डॉक्टरों ने ही उन्हें दिल्ली ले जाने को कहा। रास्ते में उनका निधन हो गया। इनके पहले मातृसदन के संत निगमानंद का निधन भी अनशन के दौरान हुआ था।

सानंद ने अपनी शरीर दान कर दी थी। इसलिए उनका पार्थिव शरीर एम्स श्रषिकेश को दान कर दिया गया।

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