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मिसाल बना गनौली: जहां बनी जिला गाजियाबाद जैसी फिल्में, वहां बन रही अब लाइब्रेरी

22 फरवरी 2013 को एक फिल्म रिलीज हुई थी जिस का नाम था ” जिला गाजियाबाद “। यह फिल्म लोनी क्षेत्र के एक गांव में बाहुबली मित्रों की कहानी को लेकर बनाई गई थी। जो बाद में खुली दुश्मनी में बदल गई थी । इस फिल्म में आजकल की राजनीति और उसमें आए बदलाव  को जिस तरह दिखाया गया , इससे लोनी क्षेत्र के इस गांव की चर्चा पूरे देश में हुई।
लेकिन इस फिल्म के रिलीज होने के 7 साल बाद अब परिस्थितियां बदल गई है। पहले जहां क्षेत्र के युवाओं के हाथ में हथियार होना “स्टेट्स सिब्बल” होता था, वहीं अब उनके हाथों में कलम ने जगह ले ली है। इसके साथ ही कंप्यूटर का माउस इन युवाओं के हाथ में होता है।
गांव के युवाओं के दिमाग में अब बस एक ही जुनून सवार है । वह जूनून है खाकी वर्दी पहनने का।  जी हां , बात हो रही है लोनी क्षेत्र के गांव गनौली की । यह गांव उस गांव से मात्र 2 किलोमीटर की दूरी पर है जिसको लेकर जिला गाजियाबाद फिल्म बनाई गई थी। आज गनौली गांव को लोग ज्ञान की पाठशाला का गांव कहने लगे है ।
जब कोरोना काल में लोग अपने अपने घरों में दुबके पड़े थे तब गनौली गांव के युवा आधुनिक लाइब्रेरी को बना रहे थे। इसके निर्माण में उन्होंने किसी मजदूर को लगाने की बजाय खुद अपने हाथों से  लेबरगिरी का काम किया। गांव में उद्घाटन के समय किसी तरह की राजनीति ना हो इसके मद्देनजर ही यह फैसला लिया गया कि जो बच्चे इस वर्ष 10वीं और 12वीं कक्षा में पढ़ाई में गांव में टॉपर रहे हैं उन के हाथों से ही लाइब्रेरी का उद्घाटन कराया जाएगा। इन दोनों टॉपर्स को 5100-5100 का नगद पुरस्कार दिया गया। साथ ही घोषणा की गई कि आगे से हर वर्ष गाँव के टॉपर्स को 11000-11000 रुपये का पुरस्कार दिया जायेगा तथा इनके लाइब्रेरी में फोटो लगाए जायेंगे।
गाजियाबाद जिले की विधानसभा लोनी का गांव गनौली 2 विधायकों  की वजह से जाना जाता है। पूर्व विधायक रूप चौधरी और वर्तमान विधायक नंदकिशोर गुर्जर। भाजपा के दोनों ही विधायकों ने लोनी विधानसभा की सूरत और सीरत बदलने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इस गांव के नौजवान भी अब विकास की नई इबारत लिख रहे हैं । गांव के ही सरकारी कर्मचारी युवकों ने यहां एक आधुनिक लाइब्रेरी बनाकर मिसाल कायम कर दी है। इस लाइब्रेरी के लिए वह अपना आर्थिक सहयोग करके देश के लिए एक संदेश दे रहे हैं।
जिसमें गांव के ही नवयुवक पढ़कर आगे बढ़ने का ख्वाब सँजो रहे है। इस लाइब्रेरी में गांव के सैकड़ों युवकों के भविष्य का सपना पल रहा है। इसकी देखा – देखी अब अन्य गांवों में भी लाइब्रेरी खोलने का जज्बा शुरू हो गया है। इस जज्बे को लेकर गांव के वही युवक अब कई गांवों में आधुनिक लाइब्रेरी बनाने के लिए लोगों को जागरूक कर रहे हैं।
गनौली गांव की इस आधुनिक लाइब्रेरी में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। जिससे बच्चों की पूरी गतिविधियों पर  लाइब्रेरी संचालकों की नजर रहती है।  इसी के साथ ही लाइब्रेरी में एसी भी लगाए गए हैं । जिससे हर मौसम में बच्चे मन लगाकर पढ़ सकें। लाइब्रेरी परिसर में ही शौचालय का निर्माण भी किया गया है। गाँव के लोग खुद भी बीच-बीच में लाइब्रेरी में जाकर देखते हैं कि बच्चे अच्छे से पढ़ रहे हैं।
गांव के नौजवानों में जो सरकारी नौकरियों में है उन्होंने गांव में इस आधुनिक लाइब्रेरी को खोलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस लाइब्रेरी को बनाने के लिए गांव के सभी सरकारी कर्मचारियों ने अपनी जेब से पैसा इकट्ठा करके इस ज्ञान की पाठशाला की स्थापना की है। गनौली गांव से शुरू हुई ज्ञान की पाठशाला की गूंज अब दूर-दूर तक पहुंच रही है।
अब लोग गनौली गांव के उन नौजवानों को अब अपने गांवों में बुलाकर आधुनिक लाइब्रेरी के निर्माण के लिए अपील कर रहे हैं । लाइब्रेरी का निर्माण करने वाले गनौली गांव के नौजवान गांव-गांव जा रहे हैं। उन गांव में लाइब्रेरी की स्थापना करा रहे हैं।
गांव की लाइब्रेरी की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले गनौली निवासी दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर लाल बहार कहते हैं कि अब हमारा सपना हर गाँव में एक लाइब्रेरी स्थापित करवाने का है।इसके लिये हमने ग्राम पाठशाला नाम से एक ग्रुप बनाया है। अब तक ग्राम पाठशाला की टीम ग्रेटर नोएडा के बंबावड़ गांव के साथ घिटोरा, गोठड़ा और बागपत के केडूवा, कमाला गांव में दौरा कर चुके हैं। यहां वह अपनी पूरी टीम के साथ जाकर युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के गुर सिखाने तथा लोगों को अपने गांव जैसी लाइब्रेरी स्थापित करने के लिए उन्हें जागरूक कर रहे हैं। जहां उन्हें लोगो का भरपूर प्यार और सहयोग मिल रहा है।

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