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‘जंगल राज’ से बेशर्मी सरकार तक

  • बिहार की जनता के विकास की पिछले दो-ढाई दशकों की विकास की यात्रा भी अजीबो-गरीब है। वह लालू के ‘जंगल राज’ से शुरू होकर नीतीश शासन के ‘बेशर्मी सरकार’ तक पहुंची है। यह दोनों ही टिप्पणी शीर्ष अदालतों के हैं।
लालू प्रसाद के शासन काल को लोग आज भी नहीं भूले है। तब विकास का पहिया थम गया था। अपराध और राजनीति का मजबूत गठजोड़ था। जनसंहार परवान चढ़ रहे थे। लोगबाग सूरज ढलते ही जहां के तहां ठहर जाते थे क्योंकि उनको लूट जाने का डर रहता था।
एक याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने दो दशक पहले कहा था- ‘बिहार में जंगल राज है। तब लालू प्रसाद के विरोधियों ने इसे मुद्दा बनाया था। मुद्दा बनाने वालो में बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी थे।
अब उसी नीतीश कुमार के शासनकाल पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की है। मुज्जफरपुर शेल्टर होम मामले में बिहार सरकार पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा- यह घटना दुभाग्यपूर्ण है, आमानवीय और लापरवाही का नतीजा है। यह बेहद शर्मनाक है। सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार ने आश्वासन दिया कि इस मामले को गंभीरता से देखेंगे, क्या यही गंभीरता है। हम जब भी इस मामले की फाइनल पढ़ते हंै तो दुख होता है।’
इससे पहले भी इस मामले की एक आरोपी बिहार की पूर्व मंत्री मंजू वर्मा को गिरफ्तार नहीं किए जाने पर भी सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को फटकार लगाई थी। इस फटकार के बाद ही पूर्व मंत्री मंजू वर्मा ने 19 नवंबर को आत्मसमपर्ण किया था। इस कांड यानी मुज्जफरपुर बालिका गृहकांड में मासूम लड़कियों के साथ हैवानियत के मामले में बिहार की पूर्व समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा के पति भी आरोपी हंै। पुलिस रहड में मंजू वर्मा के घर से 50 कारतूस मिले।
सुप्रीम कोर्ट के ‘बेशर्म सरकार’ वाली टिप्पणी को राजद ने मुद्दा बना लिया है। लालू प्रसाद के पुत्र तेजस्वी यादव ने इसे ‘लोक’ लिया है। बिहार में अभी विधानसभा चल रहा है। इस मुद्दे को वहां उछाला जा सकता है। ऐसा माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के टिप्पणी से नीतीश कुमार को राजनीति क्षति होनी संभव है। पहले ही उपेंद्र कुश्वाहा ने इनके साथ अपना गठबंधन तोड़कर मोर्चा खोल दिया है। ऐसे में इस मुद्दें से अगामी लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार के कैसे निपटने है, यह देखने वाली बात होगी।

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