[gtranslate]
Country

आजाद करेंगे नई पार्टी का आगाज़ !

9 फरवरी को जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्यसभा में रोए थे तो तभी से लगने लगा था कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद के दिन बदलने वाले हैं। मतलब साफ था कि कांग्रेस ने जिस वरिष्ठ नेता को फिर से राज्यसभा में ना भेज कर उनका तिरस्कार किया था, मोदी ने और उनकी पार्टी ने उनको गले लगा लिया । राज्यसभा से रिटायर होने के बाद जब कांग्रेस ने गुलाम नबी आजाद को कोई जिम्मेदारी नहीं सौंपी तो ऐसे में आजाद का राजनीतिक भविष्य दांव पर लगता दिखाई दिया ।

हालांकि, जिस तरह मोदी राज्यसभा में भावुक हुए और गुलाम नबी आजाद की प्रशंसा की उससे कयासबाजियो का दौर शुरू हो गया । कहा जाने लगा गुलाम नबी आजाद अब जल्द ही भाजपा की शरण में चले जाएंगे। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। क्योंकि आजाद भाजपा में जाएंगे नहीं बल्कि नई पार्टी बनाएंगे।

सियासी गलियारों में अब यह कहा जाने लगा है कि जम्मू- कश्मीर में गुलाम नबी आजाद के कंधे पर हाथ रखकर भाजपा नया राजनीतिक निशाना साधने की तैयारी में है । जिसमें पार्टी तो आजाद के नाम पर बनेगी लेकिन उस पार्टी में रणनीति भाजपा की बनेगी । कांग्रेस से दूरी का एक कारण यह भी है ।

कल जब जम्मू में गांधी ग्लोबल फैमिली के कार्यक्रम में जी -23 के असंतुष्ट नेता उपस्थित हुए और उन्होंने अपनी ही पार्टी के प्रति जमकर भड़ास निकाली तो इस बात को और बल मिल गया। गांधी ग्लोबल फैमिली एक एनजीओ है। जिसके अध्यक्ष गुलाम नबी आजाद है। गुलाम नबी आजाद के नेतृत्व में जी -23 के नेताओं का गांधी परिवार पर आक्रमक होना यही संदेश देता है कि वह अब कांग्रेस से अलग अपना रास्ता बनाने को उत्सुक है।

कल गांधी ग्लोबल फैमिली के कार्यक्रम को जिस तरह से जी -23 के नेताओं ने कॉंग्रेस की आंतरिक राजनीति का युद्ध का मैदान बनाया उसके आसार पहले से ही नजर आ रहे थे । जी -23 के असंतुष्ट समूह ने गांधी परिवार पर जमकर सवाल दागे । हालांकि उन्होंने गांधी परिवार के किसी सदस्य का नाम नहीं लिया ।लेकिन जो पोस्टर गांधी ग्लोबल फैमिली के कार्यक्रम में लगाए गए उनमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के पोस्टर नदारद थे।

शायद यह पहला कार्यक्रम था जिसमें कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं ने अपनी ही पार्टी के सिपहसालारो के फोटो नहीं लगाए। इससे चर्चाओं को बल मिल गया कि आजाद अब हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, राजसभा सांसद विवेक तन्खा और उत्तर प्रदेश के पूर्व पार्टी अध्यक्ष राज बब्बर को साथ लेकर कोई नया गुल खिला सकते हैं ।

गुलाम नबी आजाद का अगला लक्ष्य जम्मू-कश्मीर होगा। उन्होंने इसके संकेत दे दिए हैं। आजाद ने कहा है कि वह राज्यसभा से रिटायर हुए हैं, लेकिन राजनीति से नहीं। साथ ही उन्होंने कहा कि वह जम्मू – कश्मीर के लिए लड़ाई लड़ते रहेंगे । लेकिन जम्मू-कश्मीर की इस लड़ाई में उनका पर्दे के पीछे से जो साथ देगा वह भाजपा होगी। फिलहाल भाजपा को जम्मू – कश्मीर में अब्दुल्ला एव मुफ्ती परिवार के खिलाफ एक ऑप्शन चाहिए था जो उन्हें आजाद के रूप में दिखाई दे रहा है।

फिलहाल की परिस्थितियों को देखें तो आजाद जम्मू कश्मीर में राजनीतिक समीकरण बदलने में अहम भूमिका निभाने सकते हैं। चर्चा है कि अब्दुल्ला व मुफ़्ती परिवार के बिना कश्मीर घाटी में नई राजनीतिक बयार लाने में वह भाजपा के मददगार साबित हो सकते हैं।

You may also like

MERA DDDD DDD DD