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किसानों को दिल्ली बॉर्डर से हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में चौथी याचिका, शाहीन बाग़ फैसले को बनाया आधार 

केंद्र सरकार किसानों को धरने से उठाने के सब हथकंडे अपना चुकी है।  जिसमे उसे कोई सफलता नहीं मिली है। फिलहाल उसके पास एक ही उपाय बचा है जिसे वह अब आजमाने की तैयारी में है।  इसके मद्देनजर अब केंद्र सरकार शीर्ष अदालत में जाकर किसानों को सड़को से हटाने की रणनीति पर काम कर रही है। जिसके चलते सुप्रीम कोर्ट से इस मामले पर रोक लगवा सके। इसके मद्देनजर ही याचिका डाली गयी है। जिसमे सुप्रीम कोर्ट से कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानों को तुरंत हटाने की मांग की गई है। जिसमे शाहीन बाग़ के फैसले को मुख्य आधार बनाया जा रहा है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में किसानों सीमा से हटाने से सबंधित यह चौथी याचिका है। जिसकी सुनवाई 11 जनवरी निर्धारित की गयी है। यहां यह भी बताना जरुरी है कि सुप्रीम कोर्ट में किसान आंदोलन से जुड़ी पहले भी तीन याचिकाएं दाखिल की जा चुकी हैं। जिनमे दिल्ली बॉर्डर से किसानों को हटाने की मांग की गई थी। तब कहा गया था कि लोगों के इकट्ठा होने से कोरोना के संक्रमण का खतरा बढ़ेगा। याचिका में कहा गया था कि लोगों को हटाना आवश्यक है, क्योंकि इससे सड़कें ब्लॉक हो रही हैं।  इसके अलावा इमरजेंसी और मेडिकल सर्विस भी बाधित हो रही है। तब सुप्रीम कोर्ट ने गत 18 दिसंबर को किसानों को इस शर्त पर प्रदर्शन की इजाजत दी थी कि पब्लिक आर्डर बना रहे व किसी भी तरह की हिंसा न हो।

सुप्रीम कोर्ट में 11 जनवरी को होने वाली सुनवाई से पहले मुख्य याचिकाकर्ता ऋषभ शर्मा ने हलफनामा दायर कर कहा कि सिंघु, गाजीपुर, चिल्ला और टिकरी बॉर्डर पर बैठे किसानों के कारण लाखों लोगों को आने जाने में काफी परेशानी हो रही है। लिहाजा सीमाओं को तुरंत खुलवाने का आदेश पारित किया जाए। किसानों को अवरोध की इजाजत देकर सुप्रीम कोर्ट शाहीन बाग मामले में दिए अपने फैसले के विपरीत काम कर रहा है।

याचिकाकर्ता ऋषभ शर्मा नेहलफनामे में मीडिया रिपोर्ट और निजी जानकारी का हवाला देते हुए कहा गया है कि किसानों को राष्ट्रीय राजमार्ग को ब्लॉक करने की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए। अवरोध की वजह से अर्थव्यवस्था को रोजाना 3,500 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। जिसके चलते कच्चे माल की कीमतों में 30 फीसदी तक इजाफा हो गया है।

 याचिकाकर्ता ऋषभ शर्मा  का कि सुप्रीम कोर्ट ने लोगों को आवाजाही में होने वाली परेशानी, अर्थव्यवस्था पर असर व चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी आदि मसलों को नजरअंदाज कर दिया। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हिंसा व तोड़फोड़ को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, लेकिन किसानों ने पंजाब में करीब 1,500 मोबाइल टावरों को नुकसान पहुंचाया।

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