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कांग्रेस में टूट की आशंकाएं बरकरार 

कांग्रेस ने भले ही सोनिया गांधी को छह माह तक अंतरिम अध्यक्ष बनाए  रहने का फैसला लेकर पार्टी में  मचे घमासान को शांत कर दिया हो ,लेकिन पार्टी टूटने की आशंकाएं बराबर  बनी हुई हैं। जिन 23 नेताओं के पत्र को लेकर बबाल मचा ,वे अब भी शांत नहीं हुए हैं।

कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक के बाद गुलाम नबी आजाद के घर पर कल 24 अगस्त की शाम को कपिल सिब्बल ,शशि थरूर आदि नेताओं की बैठक साफ करती है कि कहीं कुछ पक जरूर रहा है। सिब्बल ने बराबर ट्वीट कर बगावत के संकेत दे दिए हैं। उन्होंने ट्वीट किया है कि  ‘यह किसी पद की बात नहीं है। यह मेरे देश की बात है जो सबसे ज्यादा जरूरी है।’

सूत्रों ने बताया कि कोई भी नेता अपने विचार को लेकर टिप्पणी करने पर सहमत नहीं हुआ। यह बैठक सीडल्ब्यूसी की बैठक खत्म होने के कुछ देर बाद हुई। पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले 23 नेताओं में कुछ ही सीडब्ल्यूसी के सदस्य हैं। गौरतलब है कि सात घंटे तक चली पार्टी की निर्णय लेने वाली शीर्ष संस्था सीडब्ल्यूसी की बैठक में सोनिया गांधी और राहुल गांधी का हाथ हरसंभव तरीके से मजबूत करने के लिए प्रस्ताव पारित किया गया। साथ ही यह स्पष्ट किया गया कि किसी को भी पार्टी नेतृत्व को कमजोर करने या कमतर करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

गौरतलब है कि पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद, पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल, शशि थरूर, मनीष तिवारी, आनंद शर्मा, पीजे कुरियन, रेणुका चौधरी, मिलिंद देवड़ा और अजय सिंह शामिल हैं। इनके अलावा सांसद विवेक तन्खा, सीडब्ल्यूसी सदस्य मुकुल वासनिक और जितिन प्रसाद, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, राजेंद्र कौर भट्ठल, एम वीरप्पा मोइली और पृथ्वीराज चव्हाण ने भी पत्र पर दस्तखत किए हैं।

इनके अलावा उत्तराखण्ड से राज्यसभा सांसद  राज बब्बर, दिल्ली पीसीसी के पूर्व अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली, हिमाचल प्रदेश पीसीसी के पूर्व अध्यक्ष कौल सिंह ठाकुर, बिहार अभियान के मौजूदा अध्यक्ष अखिलेश सिंह, हरियाणा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष कुलदीप शर्मा, दिल्ली विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष योगानंद शास्त्री, पूर्व सांसद संदीप दीक्षित के हस्ताक्षर भी पत्र पर हैं।

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