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बढ़ेगी किसानों की इनकम, खेती से जुड़ी मशीनों पर मिलेगी 100 फीसद सब्सिडी

बढ़ेगी किसानों की इनकम, खेती से जुड़ी मशीनों पर मिलेगी 100 फीसदी तक सब्सिडी

मोदी सरकार ने किसानों की समस्या का समाधान करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने अब कुछ पिछड़े राज्यों में सरकार ने खेती-किसानी से जुडी मशीनें लेने के लिए 100 फीसदी तक सब्सिडी देने का फैसला किया है। मतलब की अब किसान को अपनी जेब से एक भी रूपया खर्च नहीं करना होगा।

हाल ही में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने यह भी दावा किया है कि वर्तमान में किसान की आय को दुगुना करना ही मोदी सरकार की प्राथमिकता है। सरकार की ओर से लैंड लेवलर, जीरो टिल सीड ड्रिल, हैप्पी सीडर, मल्चर जैसे आधुनकि उपकरण के लिए एक स्कीम शुरू की गई है। जिससे खेती करना सरल हो जाए और साथ ही उत्पादन में वृद्धि हो। जिसके परिणामस्वरूप किसानों की इनकम भी डबल हो सके।

गौरतलब है कि अब तक 2013-14 में आई एनएसएसओ की रिपोर्ट के अनुसार, किसानों की मासिक आय 6,426 रुपये ही बताई गई है। कैलाश चौधरी बताते हैं कि साल 2014 से पूर्व, कृषि का बजट 25 हजार से 30 हजार करोड़ रुपये के बीच था लेकिन अब मोदी सरकार ने कृषि के लिए बजट में 1,50,000 करोड़ रुपये को पार कर दिया है। साल 2022 तक मोदी सरकार किसानो की आय दुगुनी कर देगी।

बढ़ेगी किसानों की इनकम, खेती से जुड़ी मशीनों पर मिलेगी 100 फीसदी तक सब्सिडी

केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने खेती में मशीनीकरण को बढ़ावा मिल सके इसके लिए कृषि यंत्रीकरण उपमिशन नाम की स्कीम को शुरू किया है। इस स्कीम के जरिए जुताई, बुआई, पौधरोपण, फसल, कटाई और वेस्ट मैनेजमेंट के प्रयोग होने वाली मशीनों को खरीदने में किसान को आसानी होगी।

अप्रैल 2016 में एक अंतर-मंत्रालयी का गठन किया गया था। जिसकी मदद से किसानों की आय को दुगुना करने से जुड़े पहलुओं की जांच हो सके। इस समिति ने सितम्बर 2018 में केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। समिति की ओर से किसानों की आय में वृद्धि के 7 मुख्य स्रोतों की पहचान की गई। जिसमें फसल उत्पादकता में सुधार, पशुधन उत्पादकता में सुधार और उत्पादन लागत में बचत आदि शामिल है।

इस पर कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को जब से नगद सहायता दी जा रही है तब से उनकी आर्थिक स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ है। नहीं तो केंद्र सरकार या राज्य सरकारों का भेजा पैसा पैसा फाइलों की आड़ में नेताओं और अधिकारियों के घर पहुंचा करता था।

आईए जानते हैं कि किसानों को कहां-कहां डायरेक्ट मिल रहा है लाभ:

सभी राज्यों के किसानों को मोदी सरकार की ओर से 6000 सालाना रुपये नकद मदद दी जाती है। एक साल के भीतर लगभग 51 हजार करोड़ रुपये की नगद सहायता किसानों को अब तक मिल चुकी है।

8000 हजार सालाना तेलंगाना की किसानों को मिल रहे हैं। दो सीजन में चार-चार हजार रुपये। तेलंगाना राज्य ने किसानों को नगद पैसे देने की शुरुआत कर दी है। आंध्र में किसानों को 10 हजार रुपये सालाना दिए जा रहे हैं। जिसमें  6000 रुपये केंद्र सरकार की ओर से और 4000 रुपये राज्य की ओर दिए जा रहे है।

ओडिशा में खरीफ और रबी के सीजन में बुआई के लिए आर्थिक सहायता के रूप में ओडिशा में खरीफ और रबी के सीजन में बुआई के लिए आर्थिक मदद केरूप में प्रत्येक परिवार को सालाना दस हजार रुपये दिए जा रहे हैं। झारखण्ड के किसानों को सालाना 25 हजार रुपये की मदद दी जा रही है। जबकि हरियाणा में किसानों को सालाना 6000 रुपये पेंशन दी जा रही है।

किसानों की आय बढ़ाने की ऐसे किए जा रहे हैं प्रयास

राज्य सरकारों के जरिए मंडी सुधार को बढ़ावा दिया जा रहा है।

मॉडल कांट्रैक्ट फार्मिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

किसानों को इलेक्ट्रॉनिक ऑनलाइन व्यापार मंच उपलब्ध कराने के लिए ई-नाम की शुरुआत की गई है।

खाद का जरूरत के हिसाब से ही प्रयोग किया जाए। इसके लिए स्वायल हेल्थ कार्ड योजना शुरू की गई है।

सरकार के जरिये परम्परागत कृषि विकास योजना के तहत जैविक खेती को बढ़ाने के लिए भी उचित कदम उठाए जा रहे है।

हर मेड़ पर पेड़ अभियान यानी कृषि वानिकी को बढ़ावा।

सरकार ने अगले पांच 10 हजार एफपीओ-किसान उत्पादक संगठनों की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है।

बांस के पेड़ को पेड़ की श्रेणी से हटाकर उसकी खेती के लिए सरकार ने किसानों को प्रोत्साहन दिया है।

जमीन की सेहत बेहतर करने के लिए 100 फीसदी नीम कोटेड यूरिया से जमीन सुधारने के लिए अभियान चलाया गया है।

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को उत्पादन लागत से 150 फीसदी तक बढ़ाने की मंजूरी।

किसान को किसान सम्मान निधि स्कीम के तहत खेती-किसानी के लिए सालाना 6000 रुपये की मदद दी जा रही है।

किसान क्रेडिट कार्ड की कवरेज बढ़ाने का अभियान भी जारी है।

किसान क्रेडिट कार्ड लेने पर फसल बीमा करवाने की अनिवार्यता खत्म की गई।

पीएम किसान सम्मान निधि स्कीम से किसान क्रेडिट कार्ड को जोड़ा गया। किसानों को कितनी सहायता पूर्वात्तर क्षेत्र के किसानों को विशेष सुविधा दी गई है। जिसमें 100 फीसदी आर्थिक मदद कस्टम हायरिंग केंद्र बनाने के लिए केंद्र सरकार करेगी। पूर्वोत्‍तर क्षेत्र के किसान समूहों यदि मशीन बैंक बनाने पर 10 लाख रुपये तक का खर्च करते हैं तो उन्हें 95 प्रतिशत सब्‍सिडी मिलेगी। इतनी सब्सिडी देने वाले कम ही बैंक हैं।

अन्य क्षेत्रों में सामान्य श्रेणी के किसानों को 40 परसेंट सहायता मिलेगी। वहीं एससी, एसटी, महिला व लघु-सीमांत किसानों के लिए 50 प्रतिशत की दर से सब्‍सिडी मिलेगी। किसानों को उनके घरों में ही कृषि मशीनरी उपलब्ध कराने के मकसद से कस्टम हायरिंग केंद्र बनाए जा रहे हैं। इसके लिए यदि कोई किसान व्यक्तिगत रूप से प्रोजेक्ट बना रहा है तो उसे 60 लाख रुपये तक की परियोजना लागत का 40 प्रतिशत पैसा सरकार की ओर से मिलना तय है। किसानों के समूहों को 10 लाख रूपए तक की परियोजना लागत का 80 प्रतिशत तक वित्‍तीय सहायता दी जाएगी।

कृषि उपकरण किराए पर लेने के लिए ऐप  

केंद्र सरकार ने ‘सीएचसी-फार्म मशीनरी’ मोबाइल ऐप शुरू किया है। इस ऐप से किसानों को अपने क्षेत्र में कस्टम हायरिंग सेवा सेंटर के माध्यम से किराए पर खेती से जुड़े उपकरण मिल सकेंगे। इस समय देश में 41,992 सीएचसी बन चुके है, जिनमें खेती से जुडी 1,33,723 मशीनें उपलब्ध है। इस ऐप के जरिए  किसानों को कस्टम हायरिंग सेंटर्स के तहत खेती से संबंधित उपकरण दिए जाएंगे। देश भर में अभी तक इसके लिए 42 हजार कस्टम हायरिंग सेंटर्स बनाए जा चुके है।

कृषि मंत्रालय ने इसका नाम (CHC) Farm Machinery रखा है। यह ऐप गूगल प्ले पर उपलब्ध है। यह हिंदी,अंग्रेजी, उर्दू समेत 12 भाषाओं में उपलब्ध है। डाउनलोड करने के बाद आपको भाषा चुननी होगी। इसके अगले स्टेप में CHC सर्विस प्रोवाइडर और किसान /उपयोगकर्ता दिखेंगे।

किसान कैसे कर सकते है आवेदन 

किसी किसान को अगर कृषि यंत्रो पर छूट के लिए आवदेन करना हो तो वह सीएएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) पर आवेदन कर सकते हैं। इस पर जाकर उन्हें अपनी पसंद का यंत्र सीएएससी को बताना होगा। इसके बाद सीएएससी सेंटर चालक आवेदन नंबर किसान को देगा। इसके साथ ही किसान साइबर कैफ़े जाकर भी आवेदन भी कर सकता है। जिसके लिए किसान को एग्री मशीनरी पोर्टल पर जाकर आवेदन करना होगा।

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