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किसानों का आज चक्का जाम, पूर्व नौकरशाहों ने पत्र लिखकर भारत सरकार को फिर चेताया

कृषि कानूनों को लेकर किसान दिल्ली के बॉर्डर पर पिछले 72 दिनों से आंदोलन कर रहे है। इसी आंदोलन को और तेज करते हुए  आज यानी कि 6 फरवरी को किसानों ने 11:00 बजे से 3:00 बजे तक के बीच चक्का जाम का ऐलान किया है हालांकि किसानों की ओर से दिल्ली-एनसीआर को चक्का जाम से अलग किया गया है। लेकिन दिल्ली पुलिस ने 26 जनवरी जैसी हिंसा ना हो इसके लिए पहले से ही इंतजाम कर रखे हैं

उधर किसानों के इस आंदोलन को  इंटरनेशनल समर्थन के बाद पूर्व   नोकरशाहों ने खुला पत्र लिखकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। इस खुले पत्र में नौकरशाहों ने कहा है  कि केंद्र सरकार का शुरू से ही दृष्टिकोण प्रतिकूल और टकराव वाला रहा है नौकरशाहों का कहना है  कि गैर राजनीतिक किसानों के साथ एक “गैरजिम्मेदार” विपक्ष की तरह व्यवहार किया जा रहा है खुले पत्र में उन्होंने आगे यह भी कहा किसानों के आंदोलन को बार-बार असफल करने के लिए क्षेत्रीय,सांप्रदायिक आदि अन्य तरह से विफल कारने कि  कोशिश  की जा रही है ।

पत्र में आगे कहा गया इस प्रकार के व्यवहार से समस्या का समाधान नहीं हो सकता यदि भारत सरकार समाधान चाहती है तो 18 महीनों तक कानून स्थगित करने के समाधान के बजाय इन कृषि कानून को वापस ले सकती है या अन्य संभावित समाधान के बारे में सोच सकती है।

पूर्व नौकरशाह आगे कहते हैं हमने 11 दिसंबर 2020 को किसानों के समर्थन करते हुए बयान जारी किया था । तब से लेकर अब तक हमें यह महसूस हुआ कि किसानों के साथ बहुत अन्याय हो रहा है पूर्व नोकरशाह ने भारत सरकार से इस मुद्दे पर सुधाररात्मक कार्यवाई करने का अनुरोध किया हैं। जिसके कारण देश में कई महीनों से उथल-पुथल मची हुई है ।इस पत्र को संविधानिक आचरण समूह का हिस्सा रहे नजीब जंग,ज़ूलियो रिबोरियो, अरुणा रॉय समित 75 पूर्व नौकरशाहों द्वारा हस्ताक्षरित किया गया है

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