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चुनावी चक्रव्यूह को तोड़ने की कोशिश है मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार 

मोदी मंत्रिमंडल के पहले विस्तार में बाजी चुनावी राज्यों के हाथ लगी। चाहे नए चेहरों का मामला हो या पदोन्नति का, दोनों ही मामलों में जल्द ही विधानसभा चुनावों का सामना करने जा रहे राज्यों को विशेष तरजीह दी गई। चुनावी राज्य गोवा को छोड़कर अन्य सभी छह चुनावी राज्यों को सबसे अधिक सौगात मिली। सबसे ज्यादा अहमियत सियासी दृष्टि से अहम राज्य उत्तर प्रदेश को मिली। मंत्रिमंडल विस्तार में 36 नए चेहरों को टीम मोदी में जगह मिली। इनमें उत्तर प्रदेश के हिस्से में सात, पूर्वोत्तर के हिस्से में तीन, उत्तराखंड के हिस्से में एक, गुजरात के हिस्से में चार और पंजाब के हिस्से में एक सीट आई। विस्तार में सात मंत्रियों को कैबिनट मंत्री के दर्जे के रूप में तोहफा मिला। इनमें से पांच मंत्रियों का कनेक्शन भी चुनावी राज्यों से है। बता दें कि अगले साल उत्तर प्रदेश, गोवा, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर, गुजरात और हिमाचल प्रदेश में चुनाव होने हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले मंत्रिमंडल विस्तार में चुनावी जरूरतों के हिसाब से सामाजिक व क्षेत्रीय गणित साधने की कोशिश की है। यूपी के सात नए चेहरों में एक अगड़े के साथ चार पिछड़े और पहली बार अनुसूचित जाति के दो नए चेहरों को जगह देकर पहले से मौजूद चेहरों के साथ सामाजिक व क्षेत्रीय संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। इससे पीएम मोदी और भाजपा हाईकमान की 2022 के विधानसभा चुनाव में यूपी फतह की फिक्र साफ  झलक रही है। सात नए चेहरों से एक तरह से 2022 के चुनावी चक्रव्यूह के सातवें यानी अंतिम द्वार को तोड़ने की कोशिश का संदेश दिया है।

नए चेहरों में कौन कहां से

नए चेहरों में उत्तर प्रदेश से अनुप्रिया पटेल, पंकज चौधरी, एसपी सिंह बघेल, भानुप्रताप सिंह वर्मा, कौशल किशोर, बीएल शर्मा और अजय मिश्रा को जगह मिली है। गुजरात से दर्शना विक्रम सहित चार, पूर्वोत्तर से सर्बानंद सोनोवाल, राजकुमार सिंह, प्रतिमा भौमिक, उत्तराखंड से अजय भट्ट को शामिल किया गया है, जबकि गुजरात के मनसुख मंडाविया, पुरुषोत्तम रुपाला, हिमाचल प्रदेश के अनुराग सिंह ठाकुर, पूर्वोत्तर के किरेन रिजिजू और पंजाब से हरदीप सिंह पुरी को पदोन्नति मिली है।

एक महिला हटी, जबकि सात को मिली जगह

विस्तार में महज एक महिला मंत्री का विकेट गिरा। इसके बदले सात नए चेहरों को जगह मिली। पश्चिम बंगाल से देबाश्री चौधरी को राज्य मंत्री के पद से हटाया गया, जबकि अनुप्रिया पटेल, दर्शना विक्रम, प्रतिमा भौमिक, मीनाक्षी लेखी, अन्नपूर्णा देवी सहित सात महिलाओं को टीम मोदी में जगह मिली। इसी प्रकार यूपी से सिर्फ श्रम मंत्री स्वतंत्र प्रभार संतोष गंगवार की छुट्टी हुई, जबकि इसी राज्य से सात नए चेहरों को जगह मिली।

मंत्रियों को 15 अगस्त तक दिल्ली में ही रहने का निर्देश

प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रियों को 15 अगस्त तक दिल्ली में ही रहने का निर्देश दिया है। नए मंत्रियों को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा कि क्षेत्र में जाने से पहले सभी संसद के मानसून सत्र पर ध्यान दें। सत्र के दौरान संसद में ही मंत्रालयों के कामकाज निपटाएं। सांसदों को मिलने का हर हाल में समय दें। सांसदों की राय को खास तवज्जो दें।

विस्तार में न सिर्फ  जातीय व क्षेत्रीय संतुलन साधने बल्कि सोशल इंजीनियरिंग की पहचान रहे पुराने चेहरों का विकल्प भी तलाशने की कोशिश भी की गई है। अनुप्रिया पटेल को कैबिनेट में शामिल करके जहां गठबंधन को मजबूती से चलाने का संदेश दिया गया है तो संतोष गंगवार को हटाने की एवज में दो कुर्मी चेहरों को शामिल करके भाजपा के परंपरागत कुर्मी वोटों को साधे रखने का प्रयास किया गया है। विस्तार के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में पीएम मोदी सहित यूपी से अब सर्वाधिक 15 मंत्री हो गए हैं। पीएम मोदी ने कौशल किशोर और अजय मिश्र जैसे चेहरों को जगह देकर यह संदेश दिया है कि केंद्रीय नेतृत्व की नजर एक-एक जनप्रतिनिधि पर है। मोहनलालगंज से सांसद कौशल किशोर ने जिस तरह कोरोना महामारी और पंचायच चुनाव के दौरान सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए थे, उसे देखते हुए उनको मंत्रिमंडल में शामिल करके पीएम ने संभवत: यह साफ  करने की कोशिश की है कि भाजपा पूरी तरह लोकतांत्रिक परंपराओं पर भरोसा करती है और अभिव्यक्ति की आजादी की भी पक्षधर है। साथ ही कौशल को सरकार का हिस्सा बनाकर उन्हें भी व्यवस्थाओं को सुधार कर खुद को साबित करने का मौका दिया है।

इस तरह साधा गणित

मोदी के मंत्रिमंडल में अब तक यूपी से खुद मोदी सहित पिछड़े वर्ग के चार, दो ठाकुर, एक ब्राह्मण, एक सिख, एक पारसी शामिल थे। सात नए मंत्रियों को शामिल करने के बाद प्रदेश के 15 मंत्रियों में सात पिछड़े, दो ब्राह्मण, दो ठाकुर, एक सिख, एक पारसी और अनुसूचित जाति के दो चेहरे हो गए हैं। पिछड़ों में कुर्मी जाति से संबंधित बृज क्षेत्र के संतोष गंगवार को मंत्रिमंडल से हटाया गया है तो पूर्वांचल में गोरखपुर से लगे महराजगंज से छह बार के सांसद कुर्मी बिरादरी के पंकज चौधरी और वाराणसी से लगे मिर्जापुर से दूसरी बार की सांसद व भाजपा के सहयोगी अपना दल की अनुप्रिया पटेल को शामिल कर कुर्मियों की नाराजगी से बचने की कोशिश की गई है।
साथ ही बृज क्षेत्र को लोगों को संतुष्ट करने के साथ जातीय गणित के मद्देनजर सोशल इंजीनियरिंग के बड़े चेहरे कल्याण सिंह के करीबी बदायूं के बीएल वर्मा तथा बसपा व सपा छोड़कर भाजपा में आए आगरा से सांसद डॉ. एसपी सिंह बघेल को मंत्री बनाकर इस क्षेत्र के लोध, पाल, बघेल, गड़रिया जैसी जातियों को जोड़े रखने की कोशिश की गई है। साथ ही भाजपा के लिए पिछड़े वर्ग के नए चेहरों को आगे लाकर भविष्य की जरूरतों को पूरा करने की तैयारी की गई है।

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