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यूरोपीय संघ के निशाने पर भारतीय कंपनी 

 

यूक्रेन और रूस युद्ध को शुरू हुए 2 साल हो गए हैं। यह युद्ध 24 फरवरी 2022, को रूस के द्वारा यूक्रेन पर हमला करने से शुरू हुआ था, और आज तक जारी है। इस युद्ध की दूसरी सालगिरह पर यूरोपीय संघ के द्वारा एक नई सूची जारी की गई है, जिसमे कुछ कंपनियों, संस्थाओं और लोगों पर प्रतिबंध लगाया गया है। इस प्रतिबंध को लगाते हुए ईयू ने कहा कि ‘यूक्रेन और रूस युद्ध में, रूस को कथित रूप से समर्थन करने वाली लगभग दो दर्जन कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इन प्रतिबंधित कंपनियों में भारत, ईरान, चीन और सीरिया देशों की कंपनियां शामिल हैं। द रजिस्टर (एक सरकारी प्रेस रिलीज और वैश्विक तकनीकी प्रकाशक) के द्वारा पेश की गई एक रिपोर्ट के अनुसार यह कंपनी अन्य क्षेत्रों के अलावा क्वांटम कंप्यूटिंग और एवियोनिक्स के लिए चिप्स बनाती है। जिसमे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), जनरल इलेक्ट्रिक और आईबीएम के इसके पिछले ग्राहक होने का दावा किया है। हालांकि भारतीय कंपनी पर यूरोपीय संघ के द्वारा प्रतिबंध रूस की किस प्रकार मदद करने के कारण लगाया गया है, इसकी विस्तार से व्याख्या नहीं की गई है, लेकिन विशेषज्ञों को संदेह है कि इस कंपनी के द्वारा मॉस्को को सेमीकंडक्टर शिपमेंट की सुविधा प्रदान की गई थी, जिसकी जानकारी मिलने के बाद ईयू के द्वारा यह कदम उठाया गया है

यूक्रेन और रूस युद्ध को शुरू हुए 2 साल हो गए हैं। यह युद्ध 24 फरवरी 2022, को रूस के द्वारा यूक्रेन पर हमला करने से शुरू हुआ था, और आज तक जारी है। इस युद्ध की दूसरी सालगिरह पर यूरोपीय संघ के द्वारा एक नई सूची जारी की गई है, जिसमे कुछ कंपनियों, संस्थाओं और लोगों पर प्रतिबंध लगाया गया है। इस प्रतिबंध को लगाते हुए ईयू ने कहा कि ‘यूक्रेन और रूस युद्ध में, रूस को कथित रूप से समर्थन करने वाली लगभग दो दर्जन कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इन प्रतिबंधित कंपनियों में भारत, ईरान, चीन और सीरिया देशों की कंपनियां शामिल हैं। ऐसा पहली बार हुआ है जब ईयू के द्वारा चीन-भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया गया है। इस प्रतिबंध में संस्थाओं के साथ-साथ लोगों का नाम भी शामिल किया गया है। इस प्रतिबन्ध को लगाते हुए यूरोपीय संघ ने कहा कि उन सभी कम्पनियों, संस्थाओं पर प्रतिबन्ध लगाया जा रहा है जो रुस की रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र से जुड़े हैं। ईयू के द्वारा लगाए गए इन प्रतिबंधों की श्रेणी में लगभग 600 से अधिक नाम शामिल थे, जिसके साथ अब इस सूची में 27 नई संस्थाओं को भी जोड़ दिया गया है। इन प्रतिबंधों की लिस्ट में उन नामों को भी डाला गया है जो पहले से भी प्रतिबंधों का सामना कर रहे थे। ईयू के द्वारा उन देशों की संस्थाओं को लक्षित किया गया है जो फरवरी 2022 में रूस की ओर से यूक्रेन पर हमला करने के बाद से रूसी जीवाश्म ईंधन के सबसे बड़े खरीदार रहे हैं।
अल जजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक ईयू के द्वारा जारी की गई नई सूची में 641 संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाया गया है। इस प्रतिबंध में आने वाली 619 संस्थाएं रूस में ही स्थित हैं। इसमें ईरान की आठ वह कंपनियां हैं ‘जो विमान और विमानन’ कार्य करती हैं इसमें हांगकांग की चार कंपनियां, चीन और उज्बेकिस्तान की तीन कंपनियां शामिल की गई हैं। ईयू के द्वारा कहा गया है कि इन कंपनियों ने दिसंबर 2023 में रूस को उच्च प्राथमिकता वाली वस्तुएं भेजी हैं, जो युद्ध में यूक्रेन पर रूस के द्वारा महत्वपूर्ण रूप से इस्तेमाल की गई हैं। इन कंपनियों पर इस तरह के ड्रोन के कथित निर्माण के लिए अमेरिका के द्वारा भी प्रतिबंध लगाए गए थे। इसी के साथ संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की दो विमानन के अलावा इस सूची में भारत, सिंगापुर, श्रीलंका, सीरिया, आर्मेनिया, सर्बिया, तुर्की, थाईलैंड और कजाकिस्तान की एक-एक कंपनी शामिल हैं।
भारतीय कंपनी पर आरोप 
 
ईयू के द्वारा भारत की जिस कंपनी पर बैन लगाया गया है। वह बेंगलुरु में स्थित ‘एसआई 2 माइक्रोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड’ नामक कंपनी है, जो सैन्य और अंतरिक्ष उद्योगों के लिए एकीकृत सर्किट डिजाइन तैयार करती है। द रजिस्टर (एक सरकारी प्रेस रिलीज और वैश्विक तकनीकी प्रकाशक) के द्वारा पेश की गई एक रिपोर्ट के अनुसार यह कंपनी अन्य क्षेत्रों के अलावा क्वांटम कंप्यूटिंग और एवियोनिक्स के लिए चिप्स बनाती है। जिसमे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), जनरल इलेक्ट्रिक और आईबीएम के इसके पिछले ग्राहक होने का दावा किया है। हालांकि भारतीय कंपनी पर यूरोपीय संघ के द्वारा प्रतिबंध रूस की किस प्रकार मदद करने के कारण लगाया गया है, इसकी विस्तार से व्याख्या नहीं की गई है, लेकिन विशेषज्ञों को संदेह है कि इस कंपनी के द्वारा मॉस्को को सेमीकंडक्टर शिपमेंट की सुविधा प्रदान की गई थी, जिसकी जानकारी मिलने के बाद ईयू के द्वारा यह कदम उठाया गया है। भारत, यूरोपीय संघ और अमेरिका का सबसे करीबी रणनीतिक साझेदार रहा है, और यह भी सच है कि भारत ने युद्ध की शुरुआत से अब तक सबसे अधिक रूस से जीवाश्म ईंधन आयात किया है। इसके बावजूद ईयू के द्वारा अभी तक नई दिल्ली और भारतीय कंपनियों को निशाना नहीं बनाया गया था। लेकिन ईयू के द्वारा हालही में जारी की गई लिस्ट के द्वारा भारतीय एसआई 2 पर प्रतिबंध लगाना काफी आश्चर्यजनक है। इसके बाद भारत और यूरोपीय संघ के लम्बे समय से चल रहे रिश्तों में दरार आने की आशंका जताई जा रही है। 
 
विदेशी कंपनियों पर लगे आरोप 
 
विदेशी कंपनियों पर यूरोपीय संघ ने यह आरोप लगाते हुए प्रतिबंध लगाया है कि इन कंपनियों द्वारा रूस से ऐसे उपयोग वाली वस्तुओं का निर्यात किया गया है जिनका उपयोग प्रौद्योगिकी, उपग्रह या ड्रोन जैसे नागरिक और सैन्य दोनों अनुप्रयोगों के लिए किया जा सकता है। इन वस्तुओं का उपयोग यूक्रेन के खिलाफ रूस के द्वारा युद्ध में भी किया जा चुका है।
प्रतिबंध का क्या है मतलब 
 
यूरोपीय संघ के द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों का यह मतलब है कि यूरोपीय संघ के सभी सदस्य देश प्रतिबंध सूची में शामिल संस्थाओं को युद्धक्षेत्र या दोहरे उपयोग वाले सामान नहीं बेच सकते हैं। इसके बाद रूस के अलावा अन्य देशों की कंपनियों पर अमेरिका और यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों से उनके लिए बाहरी दुनिया के साथ कारोबार करना काफी कठिन हो जाएगा। प्रतिबंधों की तुलना पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान या सीरिया के खिलाफ अधिकतम दबाव अभियानों से की जाए तो यह बहुत अधिक आक्रामक रुख है जो दर्शाता है कि यूरोपीय लोगों ने स्वीकार किया है कि उनके प्रतिबंध साधारण नहीं हैं, बड़े स्तर पर यदि देखा जाए तो इससे देशों के विश्व व्यापार लगभग बंद ही हो जायेगा।’ हालांकि, तीसरे देशों को इन प्रतिबंधों से ज्यादा बड़ा नुक्सान नहीं होगा क्योंकि यूरोपीय संघ द्वारा केवल मुठ्ठी भर कंपनियों को ही निशाना बनाया गया है। रूस के बाद सबसे अधिक कंपनियों पर प्रतिबन्ध लगाया गया है। ईयू की सूची में आने वाली कंपनियां राज्य के स्वामित्व वाली कंपनियां है। तीसरे देश जो भी व्यवसाय करते हैं वह ईरान के सहयोगियों के साथ ही करते हैं। उनका अमेरिका जैसे देशों के साथ कोई संपर्क नहीं है। वह यूरोपीय संस्थाओं के साथ भी व्यापार नहीं करते हैं। ईरानी कंपनियों का डॉलर और यूरो से कोई संपर्क नहीं है। इन कंपनियों का उद्देश्य और डिजाइन उन्हें प्रभावी ढंग से नए प्रतिबंधों से बचा लेगा। तो इससे यह बात साफ़ होती है कि प्रतिबंधों का केवल मतलब यह है कि यह प्रतिबंध यूरोपीय संघ की अस्वीकृति के सांकेतिक प्रदर्शन को दर्शाता है।’
 
प्रतिबंध पर प्रतिक्रियाएं 
 
यूरोपीय संघ के द्वारा लगाए गए इन प्रतिबंधों की घोषणा के बाद चीनी कमर्शियल मिनिस्ट्री ने एक बयान जारी कर इसकी निंदा की है। उन्होंने कहा ‘यह प्रतिबंध एक तरफा हैं। इसी के साथ भारत और अन्य तमाम देशों ने भी इन प्रतिबंधों को एकतरफा बताया है। प्रतिबंध चीन-यूरोपीय संघ के नेताओं की बैठक के दौरान चर्चा की भावना के खिलाफ हैं, जो दिसंबर 2023 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के बीच हुई थी। चीन ने चेतावनी दी कि इन प्रतिबंधों का चीन-यूरोपीय संघ के आर्थिक और व्यापार संबंधों पर हानिकारक प्रभाव पड़ेगा।’ इसपर अहमदी कहते हैं कि ‘चीन की यह प्रतिक्रिया भी, यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों की तरह ही अधिकांश प्रतीकात्मक है, क्योंकि इन प्रतिबंधों से केवल चीनी माइक्रो टेक्नोलॉजी कंपनियां प्रभावित हुई हैं, जिसका चीन पर इतना प्रभाव नहीं पड़ेगा।’भारत समेत कई अन्य देशों ने भी अलग-अलग देशों और यूरोपीय संघ जैसे गुटों की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों की आलोचना की है। इस पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ‘इन प्रतिबंधों के लिए संयुक्त राष्ट्र की मंजूरी नहीं ली गई है, इसलिए इन प्रतिबंधों को वैध नहीं माना जायेगा।’ विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि ‘यूरोपीय संघ ने प्रमुख चीनी बैंकों पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया, तो इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की संभावना है। इससे हमें नहीं लगता कि यूरोपीय या अमेरिकी इतना बड़ा निर्णय लेने के लिए तैयार हैं।’
क्या है ईयू विनिमय 833/2014 ?

 

यूरोपीय परिषद के विनिमय 833/2014, 31 जुलाई 2014 को अपनाया गया था।  इसमें कहा गया कि ‘रूस को या रूस में उपयोग के लिए ‘प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, दोहरे उपयोग वाली वस्तुओं और प्रौद्योगिकी को बेचना, आपूर्ति, स्थानांतरण या निर्यात करना प्रतिबंधित है। इस समझौते को क्रीमिया पर रूस के कब्जे और पूर्वी यूक्रेन में अलगाववादी आंदोलनों के लिए क्रेमलिन के समर्थन के बाद अपनाया गया था। विनियमन 833/2014 में लगातार संशोधन होते आये हैं। इसमें विनियमन में अंतिम संशोधन 18 दिसंबर, 2023 को किया गया था, जब 13 नई संस्थाओं को प्रतिबंधित सूची में जोड़ा गया। प्रारंभिक प्रतिबंधों और प्रतिबंधात्मक नियमों ने बड़े पैमाने पर रूसी और बेलारूसी संस्थाओं को प्रतिबंधित किया गया था। फरवरी 2023 में, युद्ध में रूस की सेना की ओर से उपयोग की जाने वाली वस्तुओं के कथित निर्माण के लिए सात ईरानी संस्थाओं पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. जून 2023 में, हांगकांग, चीन, उज्बेकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात, सीरिया और आर्मेनिया की संस्थाओं ने भी प्रतिबंध सूची में जगह बनाई। 

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