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पुलिस मुख्यालय में एनकाउंटर के आंकड़ें नहीं

राष्ट्रीय और राज्य मानवाधिकार आयोगों के साथ-साथ देश की अदालतें भी पुलिस एनकाउंटरों को संदेह की निगाह से देखती रही हैं। इस पर उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 2014 में एक आदेश भी दिया। जिसके तहत राज्य पुलिस मुख्यालय एनकाउंटर का विस्तृत रिपोर्ट छमाही मानवाधिकार आयोग को भेजना निश्चित किया गया। उत्तरप्रदेश पुलिस मुख्यालय इससे अनजान है। छमाही रिपोर्ट तो दूर उनके पास एनकाउंटर का कोई आंकड़ा ही नहीं है।
कुछ दिनों पहले सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ योगी ने प्रदेश में बढ़ते एनकाउंटरों पर एक लूज स्टेटमेंट (अपराधी या तो जेल में होंगे या फिर यमराज के पास) दिया। इस बयान पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने तुरंत ही सख्त रुख अपनाया। आयोग ने सूबे के मुख्य सचिव से छह सप्ताह के भीतर रिपोर्ट तलब कर ली। मुख्य सचिव की ओर से रिपोर्ट भेजी गयी या नहीं इसकी जानकारी नहीं हो पाई। अलबत्ता शुरुआती दौर में पुलिस ने मुठभेड़ मामले में जो तेजी दिखायी थी वह अब ठंडी जरूर पड़ गई।
राज्य पुलिस का सबसे बड़ा ऑफिस यानि ‘पुलिस मुख्यालय’ और  पुलिस के चीफ डीजीपी अभी तक एनकाउंटरों के मुद्दे पर संजीदा कतई नहीं हैं। चैंकाने वाला यह खुलासा लखनऊ के एक आरटीआई कार्यकर्ता और इंजीनियर संजय शर्मा की एक आरटीआई के जवाब से होता है। संजय शर्मा ने डीजीपी मुख्यालय से जानकारी मांगी थी कि मौजूदा वर्ष 2018 को शामिल करते हुए पिछले 10 वर्षों के दौरान पुलिस मुठभेड़ में कितने अपराधियों को मारा गया। मृतकों धर्म-जाति की जानकारी दें।
उन्होंने फर्जी एनकाउण्टरों की संख्या के साथ रिवार्ड पाने वाले पुलिस अधिकारियों और सिपाहियों की सूची भी मांगी थी। एनकाउंटर करने के संबंध में प्रदेश सरकार के सभी शासनादेशों, नीतियों, दिशा-निर्देशों और कार्यालय आदेशों की सत्यापित प्रतियों की मांग भी की गयी थी।
पुलिस मुख्यालय के जन सूचना अधिकारी ने जवाब में कहा कि कोई भी सूचना पुलिस मुख्यालय में उपलब्ध नहीं है। इस जबाब पर मानवाधिकार संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था ‘तहरीर’ के संस्थापक अध्यक्ष संजय शर्मा ने पुलिस महानिदेशक पर मानवाधिकारों के प्रति निहायत गैर-संवेदनशील होने का गंभीर आरोप लगाया है। मानवाधिकार कार्यकर्ता संजय शर्मा ने डीजीपी ओपी सिंह पर उच्चतम न्यायालय द्वारा पीयूसीएल बनाम महाराष्ट्र राज्य एवं अन्य मामले में 23 सितम्बर 2014 को दिए गए आदेश को न मानने का भी आरोप लगाया है।
संजय शर्मा कहते हैं, ‘उच्चतम न्यायलय ने अपने आदेश के पैरा 31, 32 और 33 में सभी प्रदेशों के पुलिस महानिदेशकों को आदेश दिया था कि वे प्रत्येक छमाही सूबे में हुए पुलिस एनकाउंटरों में मारे गए और घायल हुए लोगों के बारे में एक विस्तृत रिपोर्ट बनाकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भेजेंगे। इस स्पष्ट आदेश के बावजूद  डीजीपी कार्यालय प्रत्येक छमाही सूबे में पुलिस एनकाउंटरों में मारे और घायल हुए लोगों के बारे में किसी भी तरह की रिपोर्ट नहीं बना रहा है। यह सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना है।’ संजय शर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर पुलिस महानिदेशक के खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही करने के साथ-साथ सूबे में उच्चतम न्यायालय के आदेश का पालन कराने की मांग की है।

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