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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आगामी 29 जुलाई को यूपी की राजधानी लखनऊ में 55 हजार करोड़ के औद्योगिक निवेश की आधारशिला रखेंगे। यानी एक तीर कई शिकार। इसे यूपी की जनता के समक्ष ऐन चुनाव के वक्त चुनावी चारा भी कहा जा सकता है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि पूरे चार वर्ष से भी अधिक समय तक मोदी सरकार को यूपी के विकास की याद नहीं आयी। यदि विगत फरवरी माह में 24 करोड़ खर्च करके  इन्वेस्टर्स मीट कार्यक्रम को नजरअंदाज कर दिया जाए तो यूपी की योगी सरकार ने भी सूबे के विकास के लिए ऐसा कुछ भी नहीं किया जिसके लिए सूबे की जनता का भाजपा के प्रति विश्वास बन सके।  यूपी में लोकसभा की 80 सीटें हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने धमाकेदार इन्ट्री की और 80 सीटों में से अकेले दम पर 71 सीटों पर कब्जा जमाया था। यह दीगर बात है कि उप चुनाव में फूलपुर, गोरखपुर और कैराना सीट गवां देने के बाद भी भाजपा इस बार 75 लोकसभा सीटों पर जीत का दावा कर रही है। उप चुनाव में शिकस्त के बावजूद भाजपा ने कौन सी गणित लगायी यह समझ से परे है लेकिन आगामी दिनों में भाजपा ने जिस तरह की रणनीति तैयार की है उससे उसके दावों को तो नजरअंदाज नहीं किया जा सकता लेकिन यूपी की राजनीति का इतिहास गवाह है कि यूपी की जनता ने किसी भी दल को दोबारा इतने बडे़ अन्तर से जीत हासिल करने नहीं दी है।
भाजपा की रणनीति तो यही कहती है कि वह इस बार के लोकसभा चुनाव में रूपहले पर्दे के नामचीन कलाकारों को स्थान देने के बजाए देश के नामचीन औद्योगिक घरानों को ब्राण्ड अम्बेसडर की भांति चुनावी मंचों पर अपने साथ रखेगी। तैयारी पूरी हो चुकी है और अभियान की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र बनारस से करने वाले हैं।
कहना गलत नहीं होगा कि यदि बात देश की राजनीति में देश के नामचीन औद्योगिक घरानों की भूमिका की हो तो इस सच्चाई से इंकार नहीं किया जा सकता हे कि देश के नामचीन औद्योगिक घराने यदि किसी राजनीतिक दल को जिताने की ठान लेें तो उस दल की राह बेहद आसान हो जाती है। शायद इस गणित को शाह-मोदी की जोड़ी अच्छी तरह से समझ चुकी है। यही वह वजह भी है कि पूरे चार वर्ष से भी अधिक समय तक तमाम विरोध और कानूनी अवरोधों के बावजूद मोदी सरकार देश के कुछ नामचीन औद्योगिक घरानों के लिए दिल खोलकर काम करती रही। अब वह समय आ गया है जब देश के नामचीन औद्योगिक घरानों के चर्चित चेहरों को पार्टी के बैनर तले प्रचार में इस्तेमाल किया जाए। कहना गलत नहीं होगा कि यदि ये औद्योगिक घरानें यदि ठान लें तो यूपी का विकास तो दूर की बात देश की तरक्की को भी कोई नहीं रोक सकता, और यही संदेश भाजपा सूबे की जनता को देना चाहती है। साफ जाहिर है कि भाजपा इस बार अपने चुनाव प्रचार में रूपहले पर्दे के कलाकारों पर इन्वेस्ट करने के बजाए एक तीर कई शिकार की तर्ज पर अपने साथ औद्योगिक घरानों को शामिल कर चुनावी दौड़ में शामिल होने वाली है।
प्रदेश भाजपा नेताओं का दावा तो यही है कि देश के औद्योगिक घराने  आगामी 29 जून को बनारस में पार्टी के अति विशिष्ट कार्यक्रम में 64 परियोजनाओं को शुरु करने के लिए 55 हजार करोड़ के औद्योगिक निवेश की आधारशिला रखेंगे। ठेठ चुनावी राजनीति वाले इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ ही मुकेश अंबानी, कुमार मंगलम बिड़ला, गौतम अडानी और राकेश भारती मित्तल जैसे दर्जनों दिग्गजों का जमावड़ा लगेगा। कार्यक्रम की रूपरेखा लगभग एक पखवारा पूर्व ही बनायी जा चुकी थी अब यूपी के मुख्यमंत्री ने योगी आदित्यनाथ ने भी कार्यक्रम के लिए हरी झण्डी दे दी है। जाहिर तौर पर आगामी 29 जून को न सिर्फ यूपी के लोगों की निगाहें बनारस के कार्यक्रम पर टिकी होंगी बल्कि पूरे देश के राजनीतिक दलों की निगाहें भी मोदी-शाह की इस रणनीति पर जमी होंगी। निश्चित तौर विपक्ष ने इसकी काट भी निकाल ली होगी लेकिन पत्ते इस कार्यक्रम के बाद ही खोले जाने हैं। खासतौर से यूपी की राजनीति के दो अहम किरदार सपा-बसपा विशेष रूप से चैकन्ने हैं।
इस कार्यक्रम का नाम ‘ग्राउण्ड ब्रेकिंग सेरेमनी’ दिया गया है। कार्यक्रम को सफल बनाने की जिम्मेदारी अन्य विभागों के साथ ही खासतौर से औद्योगिक विकास विभाग को सौंपी गयी है। योगी सरकार ने 64 परियोजनाओं पर निवेश कराने के लिए तैयारी भी पूरी कर ली है। चुनाव जीतने की चाहत में ही सही यदि भाजपा के निवेदन पर देश के औद्योगिक घरानों ने 55 हजार करोड़ की योजनाओं पर अपनी सहमति दे दी और जमीनी स्तर पर काम शुरु कर दिया तो निश्चित तौर पर न सिर्फ सूबे की जनता का भला होने वाला है बल्कि भाजपा आगामी लोकसभा चुनाव में जीत के लिए एक मील का एक पत्थर भी ठोंक देगी।

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