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इस साल होने वाले वाले विधानसभा चुनावों को लेकर सक्रिय हुआ चुनाव आयोग 

इसी साल पांच राज्यों  पश्चिम बंगाल,केरल ,तमिलनाडु , असम और पद्दुचेरी में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल मई से जून में समाप्त होने वाला है। ऐसे में अब चुनावों को लेकर राजनीतिक पार्टियों के साथ -साथ चुनाव आयोग भी सक्रिय हो गया है। असम पश्चिम बंगाल के बाद अब चुनाव आयोग के मुख्य आयुक्त की टीम आज 10 फरवरी से  तमिलनाडु ,पदुदुचेरी और केरल के लिए  छह दिन के दौरे पर है।  जहां वह विधानसभा चुनावों की तैयारियों का जायजा लेगी। इसके साथ ही राजनीतिक पार्टियों से भी बातचीत करेगी। ऐसे में माना जा रहा है कि इन पांचों राज्यों में अप्रैल में चुनाव होने की संभावना है। इसके लिए मुख्य चुनाव आयुक्त अपने दोनों सहयोगी आयुक्तों और आला अधिकारियों के साथ दक्षिण के इन तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव कराने के लिए रोडमैप तैयार करेंगे।

मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा और चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा और राजीव कुमार आज 10 और कल 11 फरवरी को तमिलनाडु में रहेंगे जबकि 12 फरवरी को चुनाव आयोग की टीम पुड्डुचेरी पहुंचेगी तो 13 और 13 फरवरी को केरल पहुंचकर वहां के चुनाव और प्रशासनिक अधिकारियों से बात करके चुनावी तैयारियों का जायजा लेंगे। आमतौर पर चुनाव आयोग  चुनावों की घोषणा से राज्यों का दौरा करता है। चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों की टीम पश्चिम बंगाल और असम का दौरा कर चुकी है। चुनाव उपायुक्त स्तर पर तमिलनाडु ,पुड्डुचेरी और केरल के दौरे हो चुके हैं लेकिन अब उनका यह यह दौरा चुनाव की तारीखों की घोषणा के लिए निर्णायक दौरा है। इसके बाद मार्च के पहले हफ्ते तक आयोग पांचों राज्यों के विधानसभाओं के चुनावी कार्यक्रम की घोषणा करने की संभावना दिख रही है।

सूत्रों की मानें तो इस बार पश्चिम बंगाल में छह से आठ चरणों में और असम में दो या तीन चरणों में मतदान कराया जा सकता है। तमिलनाडु ,केरल और पुड्डुचेरी में एक ही दिन और एक ही चरण में मतदान कराया जा सकता है , हालांकि मतगणना सभी राज्यों में एक ही साथ और एक ही दिन होगी।

आयोग के मुताबिक चुनाव से पहले इस बात को भी ध्यान में रखा जा रहा है कि चार मई से सीबीएसई बोर्ड की परीक्षाएं भी होनी है। लिहाजा एक मई से पहले ही चुनावी प्रक्रिया को पूरी कर लिया जाएगा। ऐसे में अगले महीने होली तक पांचों राज्यों में चुनावी माहौल महकने लगेगा। चुनावी घोषणा होते ही मार्च की शुरुआत से ही उम्मीदवारों की सूचि ,नामांकन के पर्चे दाखिल करने चुनावी सभाओं ,प्रचार और नारे जुलूसों का शोर शराबा शुरू होने लगेगा। यानि मार्च और अप्रैल का महीना चुनवी घमघमी से भरे रहने वाले हैं।

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