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लेसा के बकायेदारों में सरकारी विभाग से लेकर सरकारी कालोनियां तक शामिल हैं लेकिन वसूली अभियान सिर्फ आम उपभोक्ताओं तक ही सीमित है। जी हां! ये हाल है लेसा के उन अधिकारियों का जो आम जनता को बिजली चोर बताकर उनकी बत्तियां गुल करने में जरा भी नही हिचकते जबकि लाखों-करोड़ों के बकायेदार (सरकारी विभाग) निश्चिन्त बैठे हैं। चूंकि मामला सरकारी कार्यालयों और आवासों का है लिहाजा आम जनता को दिखाने के लिए नोटिस-नोटिस का खेल होता रहता है। जानकर हैरत होगी कि यह हाल अभी का नही है बल्कि लेसा का यह दोहरा बर्ताव पिछले कई दशकों से देखने को मिल रहा है। वर्तमान योगी सरकार के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा 4जी की स्पीड से बिजली व्यवस्था को दुरुस्त करने की बात कर रहे हैं। प्रेस वार्ताओं में उन्होंने कथित बिजली चोरी करने वाली आम जनता को चेतावनी भी दी है कि यदि उन्होंने बिजली चोरी करना बन्द नहीं किया या फिर बिजली बिल का भुगतान नही किया तो उनके खिलाफ अभियान चलाया जायेगा। मुकदमे दर्ज होंगे, जेल भेजा जायेगा, भारी पेनाल्टी वसूली जायेगी, आदि-आदि।
योगी सरकार के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा की यह तेजी काबिले तारीफ भी है और राज्य के हित में भी, लेकिन दोहरा बर्ताव क्यों? इस पर सवाल उठना लाजिमी है। सवाल उठ भी रहे हैं। आम जनता पूछ रही है कि जिन पर लाखों-करोड़ों का बकाया है, उनके खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गयी? कितनों को जेल भेजा गया? कितनों से पेनाल्टी वसूली गयी और कितनों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए? आपको बता दें कि यूपी के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा में भी इतना साहस नही है कि वे सरकारी विभाग की बिजली जमा न करने और लापरवाही बरतने वाले अफसरों को जेल भेजना तो दूर की बात उनके खिलाफ कार्रवाई तक कर सकें। चूंकि मामला सरकार से जुड़ा हुआ है और बिल का भुगतान सरकारी कोष से ही होना है लिहाजा वर्तमान ऊर्जा मंत्री के हाथ भी बंधे नजर आ रहे हैं।
गौरतलब है कि लेसा का बिजली बिल भुगतान न करने वालों में सबसे बड़ा डिफाॅल्टर राज्य संपत्ति एवं लोक निर्माण विभाग है। इनके सरकारी गेस्ट हाउस, विधायक निवास, मंत्री आवास, कार्यालयों पर सिर्फ एक सर्किल का ही 25 करोड़ से ज्यादा का बिल बकाया है। हालांकि लेसा के अधिकारी भी यह बात अच्छी तरह से जानते हैं कि बकाया वसूल किया जाना आसान नही है फिर भी राज्य संपत्ति विभाग एवं लोक निर्माण विभाग को कई नोटिसें भेजी जा चुकी हैं। यहां तक कि बिजली बिल जमा न करने की स्थिति में संयोजन काटे जाने की धमकी भी दी जा चुकी है लेकिन न तो बिजली का बिल जमा हुआ और न ही संयोजन ही काटा गया। लेसा के अधिकारी भी मजबूर हैं क्योंकि राज्य सम्पत्ति विभाग की सरकारी कालोनियों में नौकरशाही से लेकर नेता-मंत्री तक निवास करते हैं। लेसा का जिम्मेदार अधिकारी भी यही मानते हैं कि यदि इनकी बिजली कटी तो गाज गिरनी तय है लिहाजा सिर्फ नोटिस-नोटिस का खेल ही खेला जा रहा है और यह प्रक्रिया अभी की नही बल्कि दशकों से चली आ रही है। विदित हो कि यदि लेसा ने इन विभागों की बिजली गुल की तो मंत्री आवास, विधायक निवास,  वीवीआईपी गेस्ट हाउस, स्टेट गेस्ट हाउस और डालीबाग गेस्ट हाउस में ब्लैक आउट हो जायेगा। इन जगहों पर बिजली जाने का मतलब मुसीबत मोल लेना है। लेसा के एक अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार गौतमपल्ली, दिलकुशा काॅलोनी, माल एवेन्यू, विक्रमादित्य मार्ग, लाप्लास काॅलोनी, राजभवन काॅलोनी, गुलिस्ता काॅलोनी, डालीबाग काॅलोनी के बकायेदारों पर 30 हजार से लेकर 60 हजार तक का बिजली बिल बकाया है। कुछ नेता टाईप पत्रकारों पर तो लाखों का बिल बकाया है। इन कालोनियों में विधायक, नेता, मंत्री, अफसर, मान्यता प्राप्त पत्रकार और समाजसेवी संगठनों के दफ्तर सहित वे लोग भी निवास करते हैं जिन्हेें तत्कालीन मुख्यमंत्री की अनुकम्पा से यह सुविधा मिली हुई है। वर्तमान भाजपा सरकार के मंत्री और विधायक भी इन्हीं कालोनियों में निवास करते हैं। बड़ा प्रश्न यह है कि इन परिस्थितियों में यूपी के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा बिजली की बिगड़ चुकी व्यवस्था को कैसे ढर्रे पर लायेंगे? इन लोगों से वसूली कैसे होगी? क्या इनकी लूट की वसूली उस आम जनता से की जा रही है जो नियमित भुगतान करती आ रही है? या फिर उन उपभोक्ताओं से जो मामूली चोरी करके ही खुश हो लेते हैं।
हाल ही में बिजली का बिल भुगतान न किए जाने की दशा में केजीएमयू की बत्ती काट दी गयी थी। कुछ ही घण्टों में बिना बिजली बिल वसूले संयोजन दोबारा चालू कर दिया गया। लेसा आज तक केजीएमयू की तरफ अपना भुगतान लेने के लिए टकटकी लगाए देख रहा है। इसमें सिर्फ वीसी कार्यालय का ही लगभग ढाई करोड़ रुपये का बिल बाकी था।
इसके अतिरिक्त पूर्ववर्ती समाजवादी सरकार के कार्यकाल से ही सरकारी विभागों के बिल बकाया हैं लेकिन सिर्फ नोटिस देने के अलावा किसी अन्य प्रकार की कार्रवाई नहीं की गयी।
16 मार्च, यानि योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से तीन दिन पूर्व। लेसा ने मीडिया के माध्यम से चेतावनी दी कि अब बिजली का बिल नहीें जमा होने पर सरकारी विभागों की बिजली भी काट दी जायेगी। इस वसूली के लिए करोड़ों रुपये के बकायेदारों से बिल जमा कराने के लिए लेसा ने प्रशासन से गुहार लगाई थी। बिजली बिल वसूली के बाबत तत्कालीन जिलाधिकारी जीएस प्रियदर्शी ने कलेक्ट्रेट सभागार में बैठक की। इस बैठक में राजधानी लखनऊ  के बड़े बकायेदारों की सूची तलब की गयी। बडे़ बकायेदारों की सूची में अधिकांश सरकारी महकमे थे। जिलाधिकारी स्तर से भी दबाव बनाने का स्वांग किया गया। परिणामस्वरूप हुआ वही जिसकी आशंका थी। करोड़ों रुपया बकाया होने के बावजूद विभाग ने बिल जमा नही करवाए।
हाल ही में ऊर्जा मंत्री के निर्देश पर लेसा ने जानकारी दी थी कि ईद के बाद बिजली के बडे़ बकायेदारों और बिजली चोरी करने वालों के खिलाफ अभियान चलाया जायेगा। ईद के बाद अभियान तो चला लेकिन आम जनता तक ही सिमट कर रह गया। सरकारी विभागों से बिजली बिल की वसूली अभी भी पेंडिंग है। हाल ही में सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 का इस्तेमाल करते हुए लेसा से बडे़ बकायेदारों की मांगी गयी सूची में जानकारी दी गयी कि सिर्फ दारुलसफा विधायक निवास पर 7 करोड़ 68 लाख रुपयों का बकाया है। हैरत की बात है कि जहां एक ओर लेसा के अधिकारी यह दावा करते हैं कि बडे़ बकायेदारों को नोटिस भेजी जा चुकी है वहीं दूसरी ओर प्राप्त सूचना में स्पष्ट कहा गया है कि इस सम्बन्ध में राज्य सम्पत्ति विभाग को कोई नोटिस नही दी गयी। महत्वपूर्ण प्रश्न! आखिर झूठ कौन बोल रहा है?
जिन जिन के पास बकाया हैं सभी को नोटिस भेज रहे है सरकारी विभागो को भी बकाया का नोटिस भेजा गया हैं कोई पक्षपात नहीं हो रहा |
आलोक कुमार प्रधान सचिव ऊर्जा विभाग उत्तर प्रदेश

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