[gtranslate]
Country

सिध्दू पर लगाम लगाने की कोशिशें तेज 

इसी साल होने वाले पंजाब सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों को लेकर चुनाव आयोग इसी हफ्ते एलान कर सकता है।लेकिन चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के भीतर आतंरिक कलह बढ़ती ही जा रही। पार्टी को डर है कि नवजोत सिंह सिद्धू की सियासी बयानबाजी का खामियाजा उठाना पड़ सकता है। पार्टी कई बार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को सार्वजनिक तौर पर अपनी सरकार के खिलाफ बयानबाजी नहीं करने की नसीहत दे चुकी है। लेकिन सिद्धू मानने के लिए तैयार नहीं हैं। पार्टी सिद्धू की महिलाओं को दो हजार रुपए और आठ गैस सिलेंडर देने के एलान पर भी खासी नाराज है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी के अंदर इस तरह के वादों को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है। सिद्धू ने खुद को सुर्खियों में रखने के लिए इस तरह की घोषणा की है। प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर उनके चन्नी सरकार के खिलाफ बयानबाजी से भी पार्टी को खासी फजीहत उठानी पड़ी है। ऐसे में पार्टी सिद्धू को और ज्यादा मौका नहीं देना चाहती है।

 

 

उप मुख्यमंत्री सुखजिंदर रंधावा, भारत भूषण आशु, परगट सिंह ने पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल से की मुलाकात

 

पंजाब की स्क्रीनिंग कमेटी के एक सदस्य ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष अपने पसंदीदा उम्मीदवारों को टिकट दिलाने के लिए दबाव बनाए हुए हैं, पर पार्टी इस दबाव में नहीं आएगी। जीत के आधार पर ही उम्मीदवारों का चयन होगा। इस बीच सिद्धू के साथ बढ़ती नाराजगी के बीच उप मुख्यमंत्री सुखजिंदर रंधावा, भारत भूषण आशु, परगट सिंह और अमरिंदर सिंह वडिंग ने दिल्ली में पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल से मुलाकात की है। इन नेताओं ने संगठन महासचिव से सिद्धू की बयानबाजी पर लगाम लगाने की मांग की है। बैठक के बाद रंधावा ने कहा कि पंजाब चुनाव कांग्रेस के नाम पर लड़ा जाएगा। कांग्रेस ही चुनाव में चेहरा होगी। दरअसल, सिद्धू लगातार पार्टी पर मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने का दबाव बना रहे हैं। उनकी दलील है कि बिना दूल्हे के बारात निकालने से पार्टी को नुकसान होगा।

दरअसल, रंधावा ने हाल ही में सिद्धू पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि सिद्धू से उनके पुराने संबंध हैं, पर वह जब से पंजाब के गृहमंत्री बने हैं, तब से कांग्रेस अध्यक्ष उनसे नाराज हैं। सिद्धू को अगर गृह मंत्रालय चाहिए, तो वह अपना पद छोड़ने के लिए तैयार हैं।

 

पार्टी में कलह से हाईकमान नाराज

 

जानकारी मिल रही है कि कांग्रेस हाईकमान ने राज्य में पार्टी में चल रहे गतिरोधों पर ऐतराज जताया है। आलाकमान इस वजह से भी नाराज है कि नेता पार्टी फोरम या हाईकमान के बजाय सीधे मीडिया में जाकर बयानबाजी कर रहे हैं। इसको लेकर ऐसे नेताओं को हिदायत भी दी गई है। बता दें कि सबसे पहले मंत्री भारत भूषण आशु ने सिद्धू के खिलाफ बयान दिए थे। उसके बाद रंधावा भी सिद्धू के रवैये को गलत बताया था और पद छोड़ने की पेशकश तक कर दी थी। उन्होंने यहां तक कह दिया था कि फिलहाल चन्नी ही मुख्यमंत्री का चेहरा हैं। किसी दूसरे चेहरे के बारे में चुनाव परिणाम के बाद पार्टी विधायक फैसला कर लेंगे। इस मीटिंग में रंधावा के सिद्धू के लिए गृह मंत्रालय छोड़ने की पेशकश के बारे में भी हाईकमान ने नोटिस लिया है। हालांकि इन नेताओं ने भी सिद्धू के रवैये की शिकायत की कि सरकार को लगातार निशाना बनाने से चुनाव में नुकसान हो सकता है।

 

सिद्धू के खिलाफ मोर्चा

 

बता दें कि दिल्ली पहुंचे मंत्री भारत भूषण आशु और उप मुख्यमंत्री सुखजिंदर रंधावा इन दिनों सिद्धू के खिलाफ मोर्चा खोलकर बैठे हैं। उन्होंने नसीहत दी है कि सिद्धू को कांग्रेस कल्चर के हिसाब से ही काम करना चाहिए। वह सिर्फ ‘मैं’ की बात करते हैं जबकि उन्हें पार्टी की बात करनी चाहिए। वहीं, मंत्री परगट सिंह और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग सिद्धू के करीबी हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि सिद्धू के पक्ष-विपक्ष के मंत्री हाईकमान की राय लेने पहुंचे थे ताकि चुनाव से पहले चेहरे के घमासान पर स्थिति स्पष्ट हो सके।

You may also like

MERA DDDD DDD DD