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केरल विधानसभा चुनाव के दौरान साढ़े तीन करोड़ रुपए की हाइवे लूट मामले में ईडी ने की जांच शुरू 

केरल विधानसभा चुनाव के दौरान राज्य में हुई साढ़े तीन करोड़ रुपए की हाइवे लूट  के मामले ने प्रदेश भाजपा में बबंडर के बाद इस मामले में दायर एक याचिका पर  केरल हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय से कार्रवाई के संबंध में दस दिनों के भीतर जबाब मांगा था । इस मामले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने केरल हाईकोर्ट के आदेश पर जांच शुरू कर दी है। ईडी ने त्रिशूर जिला पुलिस से एफआईआर और जांच रिपोर्ट की कॉपी ले ली है।

 

दरअसल ,बीते  चार  जून को केरल हाईकोर्ट ने ईडी से त्रिशूर में भाजपा के चुनावी फंड के 3.5 करोड़ रुपये लूटे जाने के मामले में 10 दिन के अंदर जांच कर इस धनराशि के मूल स्रोत का पता लगाकर बताने के निर्देश दिए थे।

दरअसल, इस मामले में एक याचिका दायर की गई थी ,जिसमे आरोप लगाए गए थे कि विधानसभा चुनाव के दौरान राज्य के  त्रिशूर जिले के कोडकारा के पास चुनाव प्रचार  के दौरान साढ़े तीन करोड़ रूपए की जो राशि लूटी गई थी वह भाजपा की थी। प्रवर्तन निदेशालय इस लूट मामले में  निष्क्रिय रहा  है। वहीं प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मामले की सुनवाई के दौरान जवाब दाखिल करने के लिए और समय दिए जाने का अनुरोध किया। इस पर अदालत ने एजेंसी को दस दिनों में अपना पक्ष  स्पष्ट करने को कहा था  ।

इस मामले में लोकतांत्रिक युवा जनता दल के अध्यक्ष और याचिकाकर्ता सलीम मदावूर ने  अदालत की निगरानी में जांच का अनुरोध किया है । उन्होंने आरोप लगाया है कि बीते तीन अप्रैल को विधानसभा चुनावों में खर्च करने के लिए 3.5 करोड़ रुपए  की अवैध धनराशि ले जा रही एक कार को कोडकारा के पास लूट लिया गया था। वह राशि कथित तौर पर कर्नाटक में बीजेपी पार्टी के एक कार्यकर्ता ने भेजी थी।

याचिकाकर्ता सलीम मदावूर ने कहा कि  वाहन मालिक की शिकायत पर शुरू में 25 लाख रुपये चोरी होने का मामला दर्ज कराया गया था, लेकिन आगे की जांच में   वह राशि लगभग 3.5 करोड़ रुपए  थी।

सलीम मदावूर ने आरोप लगाया कि ईडी के अधिकारी बार-बार ज्ञापन दिए जाने के बाद भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। बीजेपी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसे अनावश्यक रूप से निशाना बनाया जा रहा है।इससे पहले दो मई को राज्य में विधानसभा चुनावों में भाजपा को एलडीएफ से करारी हार मिली थी। पार्टी का कोई भी दिग्गज नेता जीत दर्ज नहीं कर पाया था। इस बीच अब भाजपा पर चुनाव में पैसों की ताकत के आरोप लग रहे हैं।

भाजपा की गठबंधन में शामिल एक नेता ने  दावा किया है कि उनकी पार्टी की प्रमुख  सीके जानू ने भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुरेंद्रन से एनडीए में वापसी के लिए दस करोड़ रूपए की मांग की थी। बाद में उन्हें दस लाख रूपए पहुंचाए गए थे। ये सब आरोप लगाए हैं जेआरएस पार्टी की कोषाध्यक्ष प्रसीथा अझीकोड़ ने। उन्होंने बकायदा इससे जुड़ा एक ऑडियो टेप भी जारी किया है। इस ऑडियो में आरोप है कि यह  सुरेंद्रन और जेआरएस के चीफ सीके जानू के बीच हुई दस लाख रूपए की लेन – देन से जुडी कॉल थी।

इस मामले से जुड़ा जो ऑडियो प्रसीथा ने वायरल किया है उसमे भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष की आवाज होने का दावा किया जा रहा है। टेप में एक शख्स कह रहा है उन्हें छह मार्च को आने दो। मैं उन्हें यह दे दूंगा। तुम भी आना। चुनाव के दौरान यह पैसों का लेन – देन मुमकिन नहीं कि इसे यहां से वहां ले जाया जाय। अझीकोड का कहना है कि जब जानू छह मार्च को पैसे लेने के लिए तिरुवंतपुरम गई तो वे उनके साथ थी। हालांकि जब गेस्ट हाउस में लेन -देन हुआ तब मैं साथ नहीं थी।

अझीकोड के इन आरोपों के बाद जानू ने सुरेंद्रन से पैसे लेने के इस ऑडियो टेप को नकार दिया है। सीके जानू ने प्रसीथा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने को कहा है। जानू ने इन आरोपों के जबाब में कहा है कि यह तो जांच में सामने आएगा कि कहीं प्रसीथा ने खुद मेरे नाम पर तो पैसे नहीं लिए।

बता दें कि प्रदेश में आदिवासी आंदोलन का चेहरा रही सामाजिक कार्यकर्त्ता जानू राज्य में छह अप्रैल को होने वाले चुनाव से एक महीने पहले सात मार्च को एनडीए में शामिल हुई थी।

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