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महाराष्ट्र में सियासी अखाड़ा बनी दशहरा रैली

महाराष्ट्र में सियासी उठापटक अभी भी थमने का नाम नहीं ले रहा है, बल्कि बढ़ता ही जा रहा है। कल दशहरा के जश्न के बीच भी जमकर राजनीतिक बयानबाजी हुई है।इसमें एक तरफ उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर निशाना साधा है,तो दूसरी तरफ एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर जमकर पलटवार किया है।उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने दादर के शिवाजी पार्क में तो वहीं मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट ने बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स मैदान में दशहरा रैली का आयोजन किया है।दशहरा रैली के दौरान दोनों गुटों ने जमकर एक दूसरे पर जवाबी तीर भी छोड़े है। यहां मंच से बोलते हुए उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री शिंदे को कटप्पा तक बता डाला,वहीं पलटवार करते हुए शिंदे ने पलटवार करते हुए कहा कि हमने गद्दारी नहीं गदर किया है।

 

दरअसल, शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे के समय से ही शिवसेना शिवाजी पार्क में हर साल दशहरा रैली का आयोजन करती आई है। वहीं पिछले दो वर्षों से कोरोना काल के चलते यह रैली स्थगित कर दी गई थी। हालांकि इस बार स्थिति ठीक हुई तो शिवसेना दो फाड़ हो गई। जिसके बाद उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे गुट रैली के आयोजन को लेकर आमने-सामने आ गए थे।मामला न्यायालय पहुंचा तो उद्धव ठाकरे गुट को शिवाजी पार्क में रैली करने की अनुमति मिल गई। उधर, बीएमसी ने शिंदे गुट को बीकेसी पार्क में रैली के आयोजन की अनुमति दी थी। जिसके बाद दोनों गुटों ने अपना शक्ति प्रदर्शन किया।रैली में बोलते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि गद्दारों को गद्दार ही कहा जाएगा। ये बात सभी को पता होनी चाहिए शिवसेना की गद्दी मेरे शिवसैनिकों की है। जनता कभी भी कटप्पा को माफ नहीं करने वाली है। भाजपा ने भी सही नहीं किया, उसने भी धोखा देने का काम किया है। इतना ही नहीं उद्धव ठाकरे ने यहाँ तक कह दिया कि ‘ये लोग शिवसेना का नाम चुराने की कोशिश कर रहे हैं,लेकिन ये लोग सिर्फ कुछ समय के लिए ही सत्ता की कुर्सी पर रहने वाले हैं। इनका कोई भविष्य नहीं है। मैं हिंदू हूं, किसी को भी डरने की जरूरत नहीं है, झुकने की जरूरत नहीं है।’

इस दौरान उन्होंने कहा कि मेरा नाम सिर्फ उद्धव ठाकरे नहीं है, बल्कि मैं उद्धव बालासाहेब ठाकरे हूं। मुझे भाजपा वालों से हिंदुत्व का पाठ पढ़ने की जरूरत नहीं है। भाजपा वाले तो इस समय शिवसेना की गद्दी चुराने की कोशिश में लगे हैं। वो जो भी कर रहे हैं, ठीक नहीं है। इसके अलावा उद्धव ठाकरे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि,जो लोग पाकिस्तान में जा केक खाते हैं, वो हिंदुत्व की बात कैसे कर सकते हैं। आप सिर्फ गाय-गाय की बात करते हैं।  देश में लगातार बढ़ रही महंगाई पर कुछ नहीं बोलते है। इसके बाद उन्होंने कहा कि एक बार फिर वे जरूर किसी शिवसैनिक को ही मुख्यमंत्री बनाएंगे। जो वादा मैंने अपने पिता से किया था, वो वादा आज आप से करता हूं। एक बार फिर शिवसैनिक को मुख्यमंत्री बनाकर रहेंगे। अपने विरोधियों को हर चुनाव में धूल चटाएंगे। पाक अधिकृत कश्मीर का जिक्र करते हुए उद्धव ने यहां तक कह दिया कि अगर केंद्र सरकार एक फीट जमीन पर भी वापस ला दे तो हम इन्हें सिर पर बैठा के नाचेंगे। हमारे प्रधानमंत्री ने कहा था कि पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब दिया जाएगा।

गौरतलब है कि, इस बयान के बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी उद्धव ठाकरे पर निशाना साधा है। सबसे पहले मुख्यमंत्री शिंदे ने बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में शिंदे ने शिवाजी, बालासाहेब ठाकरे के नारे लगवाए। उसके बाद शिंदे ने कहा कि गर्व से कहो हम हिंदू हैं। मुख्यमंत्री होने के बावजूद में साधारण कार्यकर्ता हूं। बालासाहेब ठाकरे के विचारों को आपने समर्थन दिया है। बालासाहेब ठाकरे के विचार हमारे साथ हैं। उद्धव ठाकरे पर साधते हुए उन्होंने कहा कि उद्धव कांग्रेस-एनसीपी की धुन पर नाचते रहे, राज्य में मतदाताओं ने 2019 के विधानसभा चुनावों में शिवसेना और भाजपा को चुना, लेकिन ठाकरे ने कांग्रेस और एनसीपी से हाथ मिलाकर महा विकास अघाड़ी की सरकार बनाई और लोगों को धोखा दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि उनकी दशहरा रैली में जनता की भीड़ यह दिखाने के लिए काफी है कि बालासाहेब ठाकरे की विरासत के सच्चे उत्तराधिकारी कौन हैं। इतना ही नहीं एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे की आलोचना करते हुए कहा कि शिवसेना कोई प्राइवेट लिमिटेड कंपनी नहीं है। इस शिवसेना को आम शिवसैनिकों ने कड़ी  मेहनत से बनाया है। हमने गद्दारी नहीं गदर किया है।

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