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मेंढक खत्म होने से इंसानों में बढ़ी बीमारियां

हम जानते हैं कि हमारे पर्यावरण में हर चीज का किसी न किसी से कोई ना कोई संबंध होता है। भले ही हम एक साधारण फ़ूड चैन का उदाहरण लें, मधुमक्खी जितना छोटा जीव प्रकृति के चक्र के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान देता है। उसी तरह तीन चीजों के बीच कुछ संबंध है फंगस , मेंढक और मलेरिया, जो किसी को भी बेशक अजीब लग सकता है। लेकिन एक अध्ययन में फंगस के खतरे, खत्म होते मेंढक और घातक मानव रोग मलेरिया के बीच एक कड़ी का पता चला है।

शोध क्या है?

कैरन लिप्स एक पर्यावरण वैज्ञानिक और अमेरिका में मैरीलैंड कॉलेज पार्क विश्वविद्यालय में जीव विज्ञान के प्रोफेसर हैं। अमेरिका में अपने शोध के अंत में उनके निष्कर्ष के अनुसार, वायरल फंगल पैथोजन, मेंढक और उभयचर प्रजातियों के विलुप्त होने में जिम्मेदार है। इसका कीड़ों की आबादी पर सीधा प्रभाव पड़ा है और इस प्रकार मनुष्यों में कीट जनित रोगों के संचरण का खतरा बढ़ गया है। मेंढकों और उभयचरी जीवों को वायरल फंगल पैथोजन  Batrachochytrium dendrobates (Bd) द्वारा खत्म कर दिया गया है।
नतीजतन, मेंढकों और उभयचरी जीवों के लिए भोजन होने वाले कीड़ों की संख्या में भारी वृद्धि हुई। बीडी पर्यावरण के लिए खतरा और मानव जीवन के लिए भी ये स्पष्ट होने में काफी समय लगा। यह अनुमान लगाया गया है कि मध्यकाल में उभयचरी जीवों की कम से कम 90 प्रजातियां विलुप्त हो गईं। लगभग 400 प्रजातियों को खतरा है और उनकी 90 प्रतिशत आबादी को खतरा है। लगभग 6 प्रतिशत उभयचरी जीव संकट में थे। इससे न केवल जैव विविधता को खतरा है , बल्कि बीमारी का संकट भी गंभीर हो गया है। मेंढक और उभयचरी जीवों की आबादी में गिरावट के कारण कोस्टा रिका और पनामा में मलेरिया की बीमारी में वृद्धि हो रही है। वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध को एनविरोनमेंटल रिसर्च लेटर्स पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।

क्या यह शोध खतरे की घंटी है?

Wired.com नाम के एक अमेरिकी न्यूज मीडिया ने इस बारे में एक खबर छापी है। उस रिपोर्ट में मिशिगन विश्वविद्यालय के एक पारिस्थितिकी विद और विकासवादी जॉन वेंडरमीर कहते हैं कि जैव विविधता सुंदर और अद्भुत है। वह मर रही है, यह गंभीर है। हालांकि, इस शोध के माध्यम से जैव विविधता के नुकसान और मानव जीवन, विशेष रूप से स्वास्थ्य के बीच संबंध स्पष्ट हो रहा है। फंगस बीडी ने 1980 और 2000 के बीच अमेरिका से मेंढकों और उभयचरों का सफाया कर दिया था, लेकिन मानव स्वास्थ्य पर इसका प्रभाव हाल ही में सामने आया है।
अमेरिकी विशेषज्ञों का कहना है कि जब तुलनात्मक अध्ययन के लिए पनामा और कोस्टा रिका में महामारी के ‘डेटा’ की जांच की गई तो मेंढकों और उभयचरों की संख्या पर बीडी के प्रभाव और मलेरिया जैसी महामारी में वृद्धि के बीच संबंध का पता लगाना संभव हुआ है। साथ ही इस शोध के अवसर पर चर्चा की जा रही है कि आंकड़ों से यह समझा जा सकता है कि मलेरिया के मरीजों की संख्या, जो पहले शून्य थी अमेरिका में बीडी फंगस के फैलने की दौरान में काफी बढ़ गई थी ।

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जबकि कोस्टा रिका और पनामा के उदाहरण बताते हैं कि बीडी फंगस जैव विविधता के नुकसान में एक प्रमुख योगदानकर्ता है, वैज्ञानिक बताते हैं कि  बीडी फंगस या इसी तरह के कारण जैव विविधता के नुकसान में योगदान देने वाले कई कारकों में से एक हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में वृद्धि के कारण बढ़ता मानवीय हस्तक्षेप भी इसका एक कारण है। 2000 में  बीडी फंगस  को नियंत्रित करने के उपायों पर एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन भी बुलाया गया था। इसमें कुछ पाबंदियां तय की गई थीं। हालांकि, एक दशक के बाद एक रिपोर्ट से पता चला कि इन प्रतिबंधों के बावजूद,  बीडी फंगस  के प्रसार को रोकना संभव नहीं हो पाया। इसलिए यह शोध इस बात पर प्रकाश डालता है कि बढ़ते व्यापार, मानवीय हस्तक्षेप, संकटग्रस्त जैव विविधता और मानव स्वास्थ्य का एक भयानक दुष्चक्र मानव को घेरे हुए है और इसे तोड़ने की चुनौती मानव जाति के सामने है।

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