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भुखमरी के कारण दिहाड़ी मजदूर ने अपने दो महीने के बच्चे को 22 हजार में बेचा

भुखमरी के कारण दिहाड़ी मजदूर ने अपने दो महीने के बच्चे को 22 हजार में बेचा

देशभर में लॉकडाउन के कारण सारे काम ठप्प पड़े हैं। इस कामबंदी के कारण लोग खाने-खाने को मोहताज हो गए हैं। प्रवासी मजदूर अपने गांव लौट रहे हैं। तो कइयों की आत्महत्या करने की भी खबर आ रही है। लेकिन जो खबर हैदराबाद से आई है वो झकझोर देने वाली है। कौन सही है कौन गलत है ये फैसला कर पाना मुश्किल है। खबर ये है कि एक दिहाड़ी मजदूर मदन कुमार सिंह ने अपने ही दो महीने के बच्चे को 22 हजार में बेच दिया हैं। क्योंकि उसके पास खाने-पीने को कुछ भी नहीं बचा था।

ऐसे में मदन को अपने पड़ोस में रहने वाली सेशु से अपने बच्चे का सौदा किया। 23 मई को सौदा हुआ 20 रुपये के स्टंप पेपर पर लिखा-पढ़ी के साथ। हालांकि, 24 मई को पुलिस ने बच्चा बेचने वाले मदन को, सेशु को और बच्चा खरीदने वाले दंपती तीनों को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल बच्चा शिशु विहार में है। फिलहाल तीनों लोगों को नोटिस देकर छोड़ दिया गया है।

दरअसल, मदन और सेशु एक ही इलाके में रहते हैं। सेशु की बहन देवी का चार बार अबॉर्शन हो चुका है। सेशु की नज़र मदन के घर बच्चा पैदा होने की खबर लगने के बाद से ही थी। उसने मदन से कई बार कहा भी तहस। लॉक डाउन के कारण जब भुखमरी की स्थिति आ गई तो मदन पहले तो गरीबी के चलते बच्चा यूं ही सौंपने को राजी हो गया। लेकिन कुछ दिनों बाद में उसने बच्चे के बदले पैसे मांगे। मदन ने बच्चे के लिए 50 हज़ार की मांग की।

सेशु की बहन के पति ने इतने पैसे मांगे जाने पर मना कर दिए। लेकिन जब 22 हज़ार में बात पक्की हुई तो कर्ज लेकर मदन से बच्चा खरीद ली। इस पूरे मामले में मदन ने अपनी पत्नी को इस बात की भनक भी लगने नहीं दी। जब मदन की पत्नी को इस बात की जानकारी हुई तो वो रोने लगी। रोने की आवाज सुनकर पड़ोसी आ गए। मामले को समझते हुए पुलिस को फोन कर दिए।

भुखमरी के कारण दिहाड़ी मजदूर ने अपने दो महीने के बच्चे को 22 हजार में बेचा

इस पूरे मामले में मदन की पत्नी सरिता ने बताया, “वारंगल के पास अपने गांव से मैं 9 महीने पहले पति के साथ काम-धंधे की तलाश में हैदराबाद आई थी। मेरा पति लेबर है। मैंने भी बच्चा पेट में होने के चौथे महीने तक घरों में झाडू-पोंछा लगाया, क्योंकि पति बहुत शराब पीता है। जितना कमाता है, वो सब शराब में उड़ा देता है। उसको 500 रुपए रोज मिलता था, लेकिन वो सबकी शराब पी जाता है।”

सरिता ने आगे बताया, “घर में खाने-पीने की भी दिक्कत है। कभी खाने को मिलता है, कभी नहीं मिलता। एक दिन पति ने घर के पास में ही रहने वाली सेशु से बच्चा 22 हजार रुपए में बेचने की बात कर ली। सेशु की कोई दूर की बहन है। उसको बच्चा नहीं हो रहा था। उसने कहा वो बच्चे को पाल लेगी। पति ने उनसे कहा कि हमें ऑटो से वारंगल के पास अपने गांव भी छुड़वा देना। मुझे दो-तीन दिन बाद बताया। मैंने बहुत कहा कि बच्चा मत बेच। मैं पाल लूंगी, लेकिन वो नहीं माना। 23 मई की रात में मदन ने बच्चा सेशु और उसकी बहन को दे दिया। सुबह वो मुझे लेकर गांव जाने लगा। तभी मैंने चिल्लाना शुरू कर दिया। पड़ोसियों को पता चला तो उन्होंने पुलिस को फोन कर दिया। फिर पुलिस ने सबको पकड़ लिया।”

वहीं देवी जिसने बच्चा खरीदा था उनकी बहन पद्मा का कहना है, “मदन ने हमसे कहा था कि मेरा एक सात साल का बच्चा है। मैं दूसरे को नहीं पाल सकता। मैंने उसे कहा कि हमारी दूर की बहन है देवी। उसको बच्चा नहीं है। वो पाल लेगी। पहले उसने कहा कि ऐसे ही बच्चा ले जाओ। बाद में बोला 50 हजार रुपए में बच्चा दूंगा। हमने मना कर दिया तो फिर वो 22 हजार रुपए में बच्चा देने को राजी हो गया। बोला मुझे ऑटो से गांव तक भी छुड़वाना होगा।”

पद्मा ने आगे कहा, “देवी का पति ऑटो चलाता है। उसने 20 हजार कर्ज लिया था। ये पैसे उसे हर हफ्ते 2 हजार जमा कर चुकाने थे। उसने पैसा 23 तारीख को रात में मदन को दे दिया। मदन ने सुबह गांव तक छोड़ने की बात भी कही थी। इस पर हमने कहा कि गांव तक नहीं छोड़ पाएंगे, क्योंकि पुलिस बहुत है। तो उसने कहा जहां तक छोड़ सकते हो, वहां तक छोड़ दो। ये लोग निकलने ही वाले थे कि इतने में पुलिस आ गई और सबको पकड़ लिया। पुलिस में मामला जाने के बाद से हम दोनों बहनों का काम छिन गया। मेरे पांच बच्चे हैं। अब खाने-पीने को भी नहीं है। देवी के पति ने कर्जा लिया था, अब वो भी फंस गया। बच्चा भी नहीं मिला। पैसा और बच्चा दोनों पुलिस के पास हैं। हमारी भूख से मरने जैसी हालत हो गई।”

इस पूरे मामले की जांच कर रहे जैदी मेटला पुलिस स्टेशन के सेक्टर पांच के एसआई के मनमाधव राव ने बताया, “मदन कुमार सिंह (32) और सरिता (30) दोनों मजदूरी करते हैं। ये लोग बटुकम्मा बांदा में एक किराये के कमरे में रहते हैं। दो महीने पहले इनके घर बच्चा हुआ था। डिलीवरी पास में ही रहने वाली एक बुजुर्ग महिला वेंकट अम्मा ने घर पर ही करवाई थी। यहीं पर अगली गली में सेशु नाम की महिला रहती है। उसने वेंकट अम्मा को बताया कि वारंगल में रहने वाली उसकी बहन देवी का चार बार गर्भपात हो चुका है और अब डॉक्टर ने बोल दिया है कि वो मां नहीं बन पाएगी।”

मनमाधव राव ने आगे कहा, “मदन ने वेंकट अम्मा को कहा कि उसके लिए बच्चा गोद लेना है कोई हो तो बताना। वेंकट अम्मा ने उसे बताया कि दो महीने पहले ही एक मजदूर के घर में बच्चा हुआ है। उसका एक बच्चा पहले से है। वो दूसरा नहीं पाल पाएंगे। इसके बाद सेशु ने यह बात अपनी बहन देवी को बताई। उसने बच्चे के लिए सेशु को उस मजदूर से बात करने का बोला।

देवी का भाई अरविंद, सेशु और वेंकट अम्मा ने 23 जनवरी की रात मदन कुमार को 22 हजार रुपए दिए और बच्चा ले लिया। देवी के भाई अरविंद ने 20 रुपए के स्टॉम्प पर लिखा-पढ़ी की। स्टाम्प में सिर्फ एक ही लाइन लिखी गई कि हम 22 हजार रुपए लेकर बच्चा ले रहे हैं। इसके बाद वो बच्चे को सेशु के घर ले गए। अगले दिन सुबह मदन अपनी पत्नी को लेकर घर से निकल रहा था तभी पत्नी ने रोना शुरू कर दिया। मदन की पत्नी चीख-चीखकर कहने लगी कि मुझे बच्चा वापिस चाहिए। यह सुनकर आसपास के लोग इकट्‌ठा हो गए। उन्होंने सेशु को बच्चा लौटाने का कहा, लेकिन उसने मना कर दिया।”

मनमाधव बताते हैं कि पुलिस अब देख रही है कि मामले में किसके खिलाफ क्या एक्शन हो सकता है। जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट बनाई जाएगी। हालांकि पुलिस का मानना है कि मदन ने शराब के नशे में बिना सोचे-समझे पैसों के लालच में आकर बच्चा बेचने की कोशिश की।

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