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कृषि कानूनों के चलते हरियाणा में बीजेपी सरकार पर मड़राते खतरे के बादल

किसान आंदोलन को लेकर हरियाणा की राजनीति में अब सियासी सरगर्मियां बढ़ गई है। भाजपा और जजपा नेता आज 12 जनवरी को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर रहे हैं। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ और जेजेपी के प्रदेशाध्यक्ष निशान सिंह गृहमंत्री से मुलाकात करेंगे। हरियाणा में बीजेपी की सहयोगी पार्टी जेजेपी ने भी अपने विधायकों और पदाधिकारियों की दिल्ली में बैठक बुलाई है। दुष्यंत अपने अधिकारियों और विधायकों के साथ बैठक के बाद अमित शाह से भी मुलाकात करेंगे। जेजेपी कृषि कानूनों को लेकर पूरी तरह फंसी हुई है, पार्टी के कई विधायको ने कृषि कानूनों को निरस्त किए जाने की मांग कर रहे है। हालांकि कई पार्टी के नेताओं ने अपनी विधायकी से इस्तीफा देने की बात कही है। उधर दूसरी तरफ कांग्रेस बार-बार विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव की मांग कर रही है।

11 जनवरी को प्रदेश के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने निर्दलीय विधायकों और बिजली मंत्री रणजीत सिंह चौटाला से मुलाकात की, मुलाकात के दौरान उन्होंने निर्दलीय विधायकों के साथ लंच भी किया और किसान आंदोलन पर बातचीत भी की थी। तकरीबन डेढ घंटे तक चली बातचीत के दौरान उन्होंने प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियों पर भी बातचीत की। बिजली मंत्री रणजीत सिंह ने करनाल के कैमला में किसान महापंचायत के दौरान हुए घटनाक्रम को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। दरअसल हरियाणा के किसानों को कृषि कानूनों के बारें में विस्तार से बताने के लिए मनोहर लाल खट्टर ने अपने महापंचायत की शुरूआत की थी, ताकि प्रदेश के किसानों को नए कृषि कानूनों के लाभ बता सकें। उन्होंने इसकी शुरूआत अपने गृह जिले करनाल से की थी। जानकारी के मुताबिक सीएम के कार्यक्रम स्थल पर प्रदर्शनकारी किसानों ने तोड़फोड़ की। सीएम मनोहर लाल खट्टर किसान महापंचायत रैली में लोगों को केंद्र के तीन कृषि कानूनों के ‘‘फायदे’’ बताने वाले थे। इससे पहले ही पुलिस और किसानों के बीच भिड़ंत हो गई। पुलिस ने कैमला गांव की ओर किसानों के मार्च को रोकने लिए उन पर पानी की बौछारें कीं और आंसू गैस के गोले छोड़े।

पुलिस के रोकने के बावजूद प्रदर्शनकारी कार्यक्रम स्थल तक पहुंच गए और ‘किसान महापंचायत’ कार्यक्रम को बाधित किया। उन्होंने मंच को क्षतिग्रस्त कर दिया, कुर्सियां, मेज और गमले तोड़ दिए। किसानों ने अस्थायी हेलीपेड का नियंत्रण भी अपने हाथ में ले लिया, यहां मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर को उतरना था। स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब किसान इस बात पर अड़ गए कि वे मुख्यमंत्री को कार्यक्रम नहीं करने देंगे। पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारी किसानों को शांत करने की कोशिश करते दिखाई दिए लेकिन वे मंच पर कब्जा करने के लिए आगे बढ़ गए। कैमला में विवाद के बाद पुलिस ने 71 प्रदर्शनकारियों को नामजद करते हुए करीब 900 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।

दूसरी तरफ कांग्रेस के नेता और प्रदेश के पूर्व सीएम चौधरी भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने खट्टर सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को टकराव के हालात पैदा करने की बजाए किसानों का साथ देना चाहिए। जनप्रतिनिधि होने के नाते उन्हें केंद्र सरकार के सामने किसानों का पक्ष रखना चाहिए और 3 कृषि कानून वापिस लेने के लिए केंद्र को मनाना चाहिए। उकसावे वाली गतिविधियां करके सरकार प्रदेश में अराजकता का माहौल ना बनाए। आईएनएलडी नेता और विधायक ने कृषि कानूनों के विरोध ने सशर्त इस्तीफे देने की बात कहीं है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि मुझे कुर्सी नहीं मेरे देश का किसान खुशहाल चाहिए। सरकार द्वारा लागू इन काले कानूनों के खिलाफ मैंने अपना इस्तीफा अपने विधानसभा क्षेत्र की जनता के बीच हस्ताक्षर कर किसानों को सौंपने का फैंसला लिया है। उम्मीद करता हूँ देश का हर किसान पुत्र राजनीति से ऊपर उठकर किसानों के साथ आएगा। ‘दि संडे पोस्ट’ ने जब इस मुद्दें पर रतिया से भाजपा विधायक लक्ष्मण नापा से बातचीत करनी चाही, तो उन्होंने कोई भी टिप्पणी करने मना कर दिया। दूसरी तरफ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और समालखा से विधायक धर्म सिंह छोक्कर से बातचीत कि तो उन्होंने दि संडे पोस्ट को बताया कि हम तीनों कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं, और सरकार से मांग कर रहे है कि वह एमएसपी कानून भी लेकर आए। ताकि किसानों को उनकी फसल का सही दाम मिल सके। उन्होंने आगे कहा कि जेजेपी के कई विधायक अपनी ही पार्टी से नाराज चल रहे है, योगी राम सिहाग ने कृषि कानूनों के विरोध के चलते चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया है। हम तीनों काले कानूनों को निरस्त करने की मांग कर रहे है। हम चाहते है कि विधानसभा का स्पेशल सेशन बुलाया जाए, जिससे यह पता चल जाएगा कि कौन किसानों के साथ है और कौन खिलाफ।

कृषि कानूनों का विरोध हरियाणा में बीजेपी विधायकों और सांसदों को झेलना पड़ रहा है। प्रदेश के लगभग सभी जिलों और गांवों में बीजेपी और जेजेपी नेताओं का लोग बहिष्कार कर रहे है। हरियाणा में बीजेपी जेजेपी की 10 सीटों के गठबंधन साथ सत्ता पर काबिज है। पंरतु जेजेपी के कई विधायक किसानों के समर्थन में उतर चुके है। उन्होंने मांग की है कि केंद्र सरकार कृषि कानूनों को निरस्त करें। अगर राज्य में जेजेपी विधायक अपनी विधायकी से इस्तीफा देते है तो बीजेपी के लिए काफी मुश्किल पैदा हो सकती है। प्रदेश में विधानसभा की 90 सीटें है, जिनमें से 40 पर बीजेपी का कब्जा और कांग्रेस ने 31 सीटों पर कब्जा जमाया है। जेजेपी 10 सीटों के साथ गठबंधन करके सत्ता में बैठी है। हरियाणा लोकहित पार्टी 1, आईएनएलडी 1 और 7 अन्य सीटों पर निर्दलीय का कब्जा है।

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