[gtranslate]
Country

राजनीतिक विचारधाराओं के फेर में फंसा डीयू

दिल्ली विश्वविद्यालय में अपने प्रमुख को लेकर दक्षिणपंथी एबीवीपी और एनएसयूआई के बीच चल रही प्रतिद्वन्दिता ने अब एबीवीपी द्वारा वीर सावरकर की प्रतिमा जबरन लगाए जाने के बाद अब राजनीतिक रंग ले लिया है। गौरतलब है कि कल दिल्ली यूनिवर्सिटी के कला संकाय के परिसर में रातोंरात वीर सावरकर ,सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह की मूर्तियाँ स्थापित की गयी थी। परिसर में सावरकर की मूर्ति लगाए जाने का विरोध कांग्रेस से जुड़े छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट्स  यूनियन ऑफ़ इंडिया(एनएसयूआई) और वाम दल की छात्र इकाई आल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) दोनों ने किया है। इन दोनों संगठनों का कहना है कि भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस के साथ सावरकर की प्रतिमा लगाकर एबीवीपी ने स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान किया है।

अब विरोध कर रही एनएसयूआई द्वारा 21 अगस्त ,बुधवार रात को वीर सावरकर की मूर्ति को जूतों की माला पहनाई गयी और मूर्ति के मुंह पर कालिख भी पोती गयी। एनएसयूआई का कहना है कि सावरकर की तुलना सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह से नहीं की जा सकती और उनका देश की आजादी में कोई योगदान नहीं था। गौरतलब है कि एबीवीपी ने प्रशासन से अनुमति लिए बिना यहां ये मूर्तियां स्थापित की थीं।

इस पर एनएसयूआई के राष्ट्रीय सचिव साएमन फारुकी ने कहा कि एबीवीपी ने सदैव सावरकर को अपना गुरु माना है,अंग्रेजी हुकूमत के सामने दया की भीख मांगने के बावजूद, एबीवीपी इस विचारधारा को बढ़ावा देना चाहती है। मैं सभी को याद दिलाना चाहता हूं कि यह वही सावरकर हैं जिन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध किया और तिरंगा फहराने से इनकार कर दिया था। यह वहीं सावरकर है जिसने भारत के संविधान को ठुकरा कर, मनुस्मृति और हिंदू राष्ट्र की मांग की थी। साएमन फारुकी ने साथ ही यह भी कहा, सावरकर की तुलना शहीद भगत सिंह और सुभाष चंद्र बोस से करना हमारे शहीदों और उनके स्वतंत्रता संग्राम का अपमान है। एक राष्ट्रविरोधी व्यक्ति के ऊपर सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय के छात्र संघ कार्यालय का नामकरण करना, विश्वविद्यालय और उसके छात्रों के लिए अपमान की बात है। यह एबीवीपी के फर्जी-राष्ट्रवाद का उदाहरण है

You may also like

MERA DDDD DDD DD