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क्या भारत के उन चार हिस्सों पर ड्रैगन की है नजर जहां 80 फीसदी हुई घुसपैठ?

क्या भारत के उन चार हिस्सों पर ड्रैगन की है नजर जहां 80 फीसदी हुई घुसपैठ?

चीन का वर्चस्व का लंबा इतिहास रहा है। जिसके कारण ही वर्तमान में भारत और चीन के बीच लद्दाख सीमा को लेकर तनाव जारी है। यदि हम चीन से घुसपैठ की घटनाओं को देखते हैं, तो हम एक समान पैटर्न को देख सकते हैं। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत और चीन लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक 3,488 किलोमीटर की सीमा साझा करते हैं।

यदि हम 2015 से चीन द्वारा भारत में घुसपैठ की घटनाओं को देखें, तो इन चार क्षेत्रों तक 80 प्रतिशत घुसपैठ सीमित है। इसके तीन हिस्से पश्चिमी क्षेत्र के पूर्वी लद्दाख से हैं। कुछ दिनों पहले ही पैंगोंग टीएसओ झील के क्षेत्र में दोनों देशों के सैनिकों के बीच भयंकर युद्ध हुआ था। दोनों तरफ के सैनिक घायल हो गए।

कुल घुसपैठ की घटनाओं में से, चीन से घुसपैठ की दो-तिहाई घटनाएं लद्दाख, ट्रिग हाइट्स और बर्ट्स के दो हिस्सों में हुईं। 2019 से चीन ने दमिश्क के सामने एक नए भारतीय क्षेत्र, डोलिटैंगो में घुसपैठ करना शुरू कर दिया। 2019 में चीन ने यहां 54 बार घुसपैठ की कोशिश की। पिछले चार वर्षों में चीन ने केवल तीन बार वहां घुसपैठ की थी।

जहां तक केंद्रीय सेक्टर में चीनी घुसपैठ की बात है तो केवल उत्तराखंड के बरहोटी में इस तरह के मालले देखने को मिले हैं। यहां 2019 में चीनी सेना ने 21 बार घुसपैठ की, जबकि 2018 में यह आंकड़ा 30 था। जबकि दोनों देशों के बीच इस इलाके को लेकर सबसे कम विवाद है। यह इकलौता सेक्टर है, जिसे लेकर दोनों देशों ने LAC की अपनी धारणा नक्शे पर भी पेश करते हैं।

भारत की भूमिका

भारत ने गुरुवार को चीन के सभी आरोपों का खंडन किया कि भारतीय सैनिकों ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) पार की और लद्दाख और सिक्किम में तनाव पैदा कर दिया। इसके विपरीत, भारत ने चीन पर अपनी सीमाओं पर गश्त कर रहे भारतीय सैनिकों को रोकने का आरोप लगाया है।

हम सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। लेकिन भारत ने स्पष्ट कर दिया कि वह देश की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा। नियंत्रण रेखा के साथ तनाव की पृष्ठभूमि के खिलाफ विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने बयान दिया था। लद्दाख की गैलवान घाटी इलाके में बहुत तनाव है। दोनों देशों ने यहां अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की है।

चीनी रवैये की आलोचना

अमेरिका ने हाल ही में लद्दाख में भारत चीन सीमा पर तनाव को लेकर भारत का साथ देते हुए चीन के रवैये की आलोचना की थी। अमेरिका की वरिष्ठ कूटनीतिज्ञ ने चीन के व्यवहार को उकसाने और परेशान करने वाला बताया था। ऐसे में इसपर जवाब देते हुए चीनी विदेश मंत्रालय ने इसे पूरी तरह बकवास बताया था और कहा कि अमेरिका को भारत और चीन के बीच संचार चैनल बनने की जरूरत नहीं।

चीन की हरकतें उनके उत्पीड़न का इरादा दिखाती हैं। अमेरिका ने कहा है कि चीन द्वारा उत्पन्न खतरा दक्षिण चीन सागर और भारतीय सीमा के बीच झड़पों से स्पष्ट है। चाहे वह दक्षिण चीन सागर हो या भारतीय सीमा, चीन की आक्रामकता केवल शब्दों तक सीमित नहीं है। चीन के उत्तेजक और उपद्रवी व्यवहार को हमेशा देखा गया है।

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