लोकसभा में पास हुए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक २०१९ के खिलाफ देशभर के रेजिडेंट डॉक्टर्स आज एक दिन की हड़ताल पर हैं। सभी रेजिडेंट डॉक्टर द्वारा नेशनल मेडिकल कमीशन एनएमसी बिल 2019 का विरोध किया जा रहा है। रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन आज पूरे देश में नेशनल मेडिकल कमीशन बिल के प्रावधानों के खिलाफ सड़को पर उतर आया  है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन द्वारा दिल्ली समेत देशभर के डॉक्टरों से हड़ताल पर जाने की अपील भी की गयी है। दिल्ली स्थित एम्स के डॉक्टरों द्वारा गुरुवार को संसद चलो का आह्वान किया किया गया है। नेशनल मेडिकल कमीशन बिल (एनएमसी) के विरोध में डॉक्‍टरों की हड़‍ताल के बाद सफदरजंग अस्‍पताल के गेट बंद कर दिए गए है जिससे गुस्‍साए मरीज और उनके परिजनों ने सड़क पर जाम लगा  दिया ओपीडी बंद होने की वजह से कई मरीज सड़क पर ही बैठकर इलाज की मांग कर रहे है।

जानकारी के मुताबिक, सफदरजंग अस्पताल में आज जो मरीज आए थे उन्हें वापस जाने के लिए कह दिया गया। मेन गेट से मरीज अंदर तो जा सकते हैं लेकिन अस्पताल को अंदर से बंद कर दिया गया है। ओपीडी के बाहर मरीज खड़े है और ऐसे में काफी देर से अस्‍पताल में हंगामा चल रहा है।  रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि हमारी हड़ताल एनएमसी बिल के कुछ प्रावधानों के खिलाफ है। रेजिडेंट डॉक्टरों को सेवाओं से हटा दिया गया है। संकाय और सलाहकार सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। अगर सरकार हमारी बात नहीं मानती है तो इसे मेडिकल क्षेत्र के इतिहास में सबसे काले दिनों में से एक गिना जाएगा।

  गौरतलब है की एनएमसी बिल सोमवार, 29 जुलाई को लोकसभा में पारित किया गया था। सरकार ने इस फैसले को दूरदर्शी सुधारों में से एक बताया है लेकिन डॉक्टर्स इस बिल के विरोध उतर आये है। आज 1 अगस्त को एनएमसी बिल राज्यसभा में पेश होगा। इसे लेकर डॉक्टरों को रोष और बढ गया है। आज सुबह आठ बजे से कुछ सरकारी अस्पतालों की एसोसिएशन के डॉक्टर्स की स्ट्राइक शुरू हुयी थी । इसके लिए एम्स के डायरेक्टर को एक पत्र भी लिखा गया था। एम्स अस्पताल के रेजिडेंट डॉक्टर 1 दिन की हडताल पर रहेंगें इसका सबसे ज्यादा असर दिल्ली के सफदरजंग के मरीजों  पर पड़ने वाला है। क्योंकि सफदरजंग असपताल के डॉक्टर्स गुरूवार से अनिश्चितकालीन हडताल पर रहेंगे। इसलिए दिल्ली सबसे ज्यादा प्रभावित होगी। डॉक्टरों द्वारा मांग  की गयी है कि बिल को जिस तरह लोकसभा में पास किया गया है उसी तरह राज्यसभा में पेश ना किया जाए। इसमें डॉक्टरों की मांग के अनुसार संशोधन करके इसे राज्यसभा में पेश किया जाए। ऐसा नहीं होता है तो आज से सभी अस्पतालों में अनिश्चितकालीन हड़ताल की जा सकती है।

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