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ऐसा है योगीराज,प्रमाण के बावजूद कार्रवाई नहीं 

उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग को भ्रष्टाचार मामले में अव्वल माना जाता रहा है। इस विभाग के सहारे विभागीय मंत्री करोड़पति से अरबपति बन गए तो दूसरी ओर नौकरशाही ने भी जमकर बहती गंगा में हाथ धोए। अभियंता से लेकर बाबू स्तर तक के कर्मचारी भी भ्रष्टाचार की गंगोत्री में डुबकी लगाते रहे हैं। इस विभाग में भ्रष्टाचार से जुड़ा एक अनोखा मामला हाल ही में सामने आया है। विभाग के सैकड़ों बाबू फर्जी डिग्रियों के सहारे जूनियर इंजीनियर के पद पर प्रोन्नत कर दिए गए जबकि वास्तविक अर्हता रखने वाले मुंह ताकते रहे गए। परिणामस्वरूप खुन्नस खाए बाबुओं ने फर्जीवाडे़ की पोल खोल दी। जांच हुई और दोष भी सिद्ध हुआ लेकिन कार्रवाई इसलिए नहीं हो पा रही है क्योंकि जिस संस्था को रिपोर्ट देनी है, वह रिपोर्ट देने में आनाकानी कर रहा है। इसके बावजूद विभाग में चटखारे ले-लेकर यही कहा जा रहा है कि आखिर बकरे की मां कब तक खैर मनायेगी।
तत्कालीन सपा सरकार के कार्यकाल में विभागीय मंत्रियों से लेकर शीर्ष अधिकारियों तक ने अपने-अपने चहेतों को जमकर रेवड़ियां बाटीं। यहां तक कि पार्टी कार्यकर्ताओं की सिफारिशों पर भी नियम-कानूनों की परवाह किए बगैर विभागीय कर्मचारियों को अनुचित लाभ दिया गया, बस शर्त यह थी कि प्रोन्नति के लिए पर्याप्त डिग्री होनी चाहिए, भले ही वह फर्जी क्यों न हो। फर्जी प्रोन्नति से सम्बन्धित यह मामला सिंचाई विभाग का है और उस वक्त सिंचाई विभाग का प्रभार शिवपाल यादव के पास था, हालांकि बाद में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तमाम अनियमितताओं के आधार पर सिंचाई विभाग का कार्यभार शिवपाल यादव से वापस ले लिया था लेकिन तब तक सिंचाई विभाग के 300 बाबू कथित फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर प्रोन्नत पा गए। इस फर्जीवाडे़ का खुलासा विभाग के उन बाबुओं ने किया जो पात्र होते हुए भी प्रोन्नति से वंचित थे। तमाम शिकायतें अखिलेश सरकार के कार्यकाल में सम्बन्धित विभाग के प्रमुख सचिव से लेकर सम्बन्धित विभाग के मंत्री से की गयीं लेकिन जब मामला ऊपर से सेट हो तो कार्रवाई की उम्मीद नहीं की जा सकती थी। कमोवेश हुआ भी कुछ ऐसा ही। पर्याप्त दस्तावेजों के साथ दिए गए शिकायती पत्रों पर कार्रवाई के उलट उन बाबुओं के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की धमकी दी जाती रही जिन्होंने इस फर्जीवाडे़ का खुलासा किया था।
सत्ता बदली तो खुन्नस खाए बाबुओं के जोश ने एक बार फिर से उबाल मारा। लगभग एक वर्ष पूर्व कथित फर्जीवाडे़ की शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर सिंचाई विभाग के मंत्री धर्मपाल सिंह से की गयी। योगी सरकार में सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने जांच के पश्चात प्रोन्नत पाए बाबुओं के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन देने के साथ ही विभाग के प्रमुख सचिव को मामले की तत्काल जांच के उपरांत रिपोर्ट देने सम्बन्धी आदेश पारित किया। इतना ही नहीं धोखाधड़ी करके पदोन्नति पाए 50 साल से ऊपर वाले कर्मियों को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्ति दिए जाने का आदेश भी सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव को दिया गया। लगभग एक वर्ष पश्चात की तस्वीर यह है कि उपरोक्त 300 कर्मियों के खिलाफ विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गयी जबकि जांच के उपरांत रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। जांच रिपोर्ट में आरोपों को सत्य पाया गया है। पात्रता रखने वाले बाबुओं का काकस अब कार्रवाई न किए जाने से खासा चिन्तित नजर आ रहा है।
गौरतलब है कि तत्कालीन अखिलेश सरकार के कार्यकाल में जातीय राजनीति के चलते पात्रता रखने वाले कई बाबुओं को अवर अभियंता बनने से वंचित कर दिया गया था। पदोन्नति पाने से वंचित रहे बाबुओं ने इसकी शिकायत उस समय तत्कालीन प्रमुख सचिव सिंचाई से की थी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इतना ही नहीं अखिलेश सरकार के कार्यकाल में मामले की फाईल ही दबा दी गयी थी। जब सूबे में सरकार बदली तो बगावत की आवाज तेज हुई। पदोन्नति पाने से वंचित रहने वालों ने इसकी शिकायत उच्चधिकारियों के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह से भी की थी। मुख्यमंत्री ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सिंचाई मंत्री को उचित कार्रवाई का निर्देश दिया था। हालांकि सिंचाई मंत्री ने यह दावा किया था कि फर्जी तरीके से पदोन्नति पाने वालों के प्रमाण पत्रों की जांच के उपरांत यदि सत्यता पायी गयी तो निश्चित तौर पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी।
बाबू से जेई बने अधिकतर बाबुओं के पास दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से राजस्थान की एक यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग का डिप्लोमा लिए जाने का खुलासा हो चुका है। इसी तरह का एक मामला लोक निर्माण से भी सम्बन्धित था। इस मामले में यूजीसी ने डिप्लोमा को अमान्य करार दिया था। इसी आधार पर विभाग के उन बाबुओं ने मामले का खुलासा किया है जो प्रमोशन के पात्र बताए जा रहे हैं।
बताते चलें कि लगभग एक वर्ष पूर्व राज्य के पूर्व मुख्य सचिव राजीव कुमार ने भ्रष्ट और दागी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने का भरोसा दिलाया था। चन्द मामलों को यदि अपवादस्वरूप मान लिया जाए तो मौजूदा समय में दागियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी है। दागी अभी भी शान से सरकारी सेवा में बने हुए और सरकारी व्यवस्था को मुंह चिढ़ाते प्रतीत हो रहे हैं। दूसरी ओर जिन्होंने पूरे मामले की जांच का दायित्व संभाला था वे डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो से रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। समाचार लिखे जाने तक रिपोर्ट नहीं आ पायी थी लिहाजा अनियमित तरीके से प्रोन्नत पाए जूनियर इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पा रही।

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