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असंतुष्ट नेताओं को नहीं मना पाया है कांग्रेस आलाकमान 

 देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस में  नेतृत्व  बदलने की मांग को लेकर लिखी गई चिट्ठी पर मचा घमासान  अभी तक थमा नहीं है । कुछ महीने पहले  ही पार्टी के नेतृत्व को लेकर  हुए चिट्ठी विवाद  के बाद कुछ समय तक ऐसा लग रहा था कि असंतुष्ट नेताओं के पत्र से जो पार्टी की आंतरिक कलह जगजाहिर हुई थी उस पर कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने असंतुष्ट नेताओं से मुलाकात की थी और आंतरिक चुनाव को लेकर वादा किया था, लेकिन इस बीच कांग्रेस के दिग्गज नेता कपिल सिब्बल ने कहा है कि पार्टी आलाकमान ने अभी तक इस  दिशा में  कुछ भी नहीं किया  है। कपिल सिब्बल ने कहा कि सोनिया गांधी ने पार्टी नेताओं के साथ खुली बातचीत कर आंतरिक चुनाव कराने का वादा किया था, लेकिन  अब तक इस मसले पर कोई जवाब नहीं आया है और न ही यह स्पष्ट हो पाया है कि ये चुनाव कब और कैसे कराए जाएंगे।

ख़बरों के  मुताबिक, सोनिया गांधी के साथ बैठक को लेकर कपिल सिब्बल ने कहा कि दुर्भाग्य से मैं उस बैठक में नहीं था, क्योंकि मैं यात्रा पर था। लेकिन  मुझे लगता है कि हमने खुली बातचीत की थी। और जाहिर है, कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा था कि चुनाव होगा। हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि ये चुनाव कब और कैसे होंगे। हमारा मानना है कि पार्टी के आंतरिक चुनाव संविधान के प्रावधानों के अनुरूप ही कराए जाएंगे।

राहुल गांधी के दोबारा अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा  पर कपिल सिब्बल ने कहा कि हम चर्चाओं-अटकलों का जवाब नहीं देते, हम वास्तविकता का जवाब देते हैं। जब चर्चा के टेबल पर यह बात आएगी, तो हम इसका जवाब देंगे। क्या राहुल की वापसी से पार्टी में कुछ परिवर्तन होगा, इस सवाल पर सिब्बल ने कहा कि मुझे इस बारे में पता नहीं है। मुझे लगता है कि यह सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि पार्टी में किस तरह से संविधान की प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है। इसमें कांग्रेस के सभी महत्वपूर्ण लोगों के साथ विचार विमर्श भी काफी अहम है।

किसानों के प्रदर्शन पर कपिल सिब्बल ने कहा कि किसानों के इस आंदोलन से बचने का एक मात्र रास्ता है कि सरकार को ऐसा कानून बनाना चाहिए, जिसमें एमएसपी की गारंटी हो।  ऐसे वक्त में जब इंडस्ट्री को मैक्सिमम सपोर्ट मिल रहा है, किसान न्यूनतम समर्थन की मूल्य की मांग के लिए आंदोलन कर रहे हैं। और सरकार ने जो कुछ भी किया है, वह बिना सोचे समझे किया है- चाहे वह नोटबंदी हो, जीएसटी  या फिर कृषि कानून।

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