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राहुल गांधी को कटघरे में खड़ा कर गए दिग्विजय ,पार्टी में असंतोष के लिए ठहराया जिम्मेदार 

कांग्रेस के भीतर का घमासान थमने  के बजाए बढ़ता ही जा रहा है। अब मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बगावती तेवर दिखाए हैं। दिग्विजय उन नेताओं में नहीं हैं जिनकी चिट्ठी से कांग्रेस  में खलबली मची हुई है। लिहाजा उनके बयान को गहराई से लिया जा रहा है।

दिग्विजय सिंह ने कहा है कि पार्टी में जो आज असंतोष है, वो एक दिन में नहीं बढ़ा है। यह विवाद उसी दिन से बढ़ गया था, जब सोनिया गांधी पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष बनी थीं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने पार्टी का अध्यक्ष पद छोड़ दिया था लेकिन पार्टी पर उनका नियंत्रण बना रहा। उन्होंने कहा कि इसके सबूत पार्टी पदाधिकारियों की नियुक्ति में मिलता है।

राहुल गांधी भले ही कांग्रेस के अध्यक्ष नहीं थे, लेकिन पर्दे के पीछे से पार्टी पर उनका नियंत्रण था। इस वजह से भी पार्टी नेताओं में असंतोष बढ़ा है।उन्होंने कहा है कि राज्यसभा चुनाव के बाद पार्टी में असंतोष और परवान चढ़ा है। उन्होंने ने उदाहरण देते हुए कहा है कि मुकुल बनानी और केसी वेणुगोपाल की जगह राजीव सातव के नामांकन के लिए राहुल गांधी ने हामी भरी। इससे पार्टी में और नाराजगी बढ़ गई।
दरअसल, पिछले दिनों भी शरद पवार के सुर में सुर मिलाते हुए दिग्विजय सिंह ने राहुल गांधी को नसीहत दी थी। उन्होंने सलाह देते हुए उन्हें और एक्टिव रहने के लिए ट्वीट किया था। इसे लेकर दिग्विजय सिंह पार्टी के अंदर ही घिर गए थे। तमिलनाडु के एक सांसद और राजीव सातव ने दिग्विजय सिंह पर हमला किया था।

दिग्विजय सिंह ने ट्वीट कर कहा था कि सोनिया गांधी का नेतृत्व सर्वमान्य है। यदि सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष का पद छोड़ना ही चाहती हैं, तो राहुल जी को अपनी जिद छोड़ कर अध्यक्ष का पद स्वीकार कर लेना चाहिए। देश का आम कांग्रेस कार्यकर्ता और किसी को स्वीकार नहीं करेगा।

वहीं, चिट्ठी विवाद पर दिग्विजय सिंह ने एक इंटरव्यू में कहा कि चिट्ठी लिखने की कोई जरूरत ही नहीं थी। कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में किसी व्यक्ति ने नहीं कहा कि मैं राहुल के खिलाफ हूं। अगर कोई है, तो सामने क्यों नहीं आता है।

इससे पहले कांग्रेस ने भले ही सोनिया गांधी को छह माह तक अंतरिम अध्यक्ष बनाए  रहने का फैसला लेकर पार्टी में  मचे घमासान को शांत कर दिया हो ,लेकिन पार्टी टूटने की आशंकाएं अभी बराबर  बनी हुई हैं। जिन 23 नेताओं के पत्र को लेकर बबाल मचा ,वे अब भी शांत नहीं हुए हैं।

कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक के बाद गुलाम नबी आजाद के घर पर कल 24 अगस्त की शाम को कपिल सिब्बल ,शशि थरूर आदि नेताओं की बैठक साफ करती है कि कहीं कुछ पक जरूर रहा है। सिब्बल ने बराबर ट्वीट कर बगावत के संकेत दे दिए हैं। उन्होंने ट्वीट किया था  कि  ‘यह किसी पद की बात नहीं है। यह मेरे देश की बात है जो सबसे ज्यादा जरूरी है।’

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