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हार कर भी जीत गए धर्मपाल , मिला करोड़ों का इनाम

आज तक कभी शायद ही किसी ने देखा – सुना हो की चुनाव में हारे हुए प्रत्याशी को कोई इनाम दिया जाता हो। लेकिन हरियाणा में एक ऐसा मामला सामने आया है जहां सरपंच चुनाव में हारने वाले को इनाम मिला दिया गया है चर्चा का विषय बना हुआ है । दरअसल रोहतक जिले के चिड़ी गांव वालों द्वारा फूलों की माला और नोटों की माला पहना कर हारे हुए प्रत्यासी को सम्मानित किया गया है।बताया जा रहा है कि लगभग दो करोड़ रूपये से ज्यादा की राशि बतौर इनाम के रूप में प्रत्याशी को दी गई है। वहीं खाप पंचायतों ने भी प्रत्याशी को सम्मानित करने का फैसला लिया है। यही नहीं उसे महत्वपूर्ण पद देने की घोषणा भी की है ।

ग्रामीणों द्वारा सम्मान कार्यक्रम को आयोजित कराने का मकसद यह था कि धर्मपाल ने पूरा जीवन गांव की भलाई और सामाजिक कार्यों में लगाया है। इस चुनाव में हार से वो हताश न हों और सामाजिक कार्यों को लगातार जारी रखें , इस वजह से प्रोत्साहन के लिए नकद राशि व गाडी दी गई है। सरपंच पद के प्रत्याशी नवीन दलाल और धर्मपाल के बीच कड़ा मुकाबला हुआ था । नवीन को 3061 और धर्मपाल को 2995 वोट मिले, जिसमें नवीन दलाल की 66 वोट से जीत हुई।

 

 

गौरतलब है कि रोहतक जिले का चिड़ी गांव पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के विधानसभा किलोई हलके का गांव है। यहां 12 नवंबर को पंचायत चुनाव हुआ था।धर्मपाल नाम के व्यक्ति ने यहां से सरपंच पद का चुनाव लड़ा था। लेकिन पंचायत चुनाव में वो 66 वोटों से नवीन दलाल से हार गए । उसके बावजूद गांव वालों ने धर्मपाल प्रत्याशी का ढोल बाजे के साथ सम्मान किया। सभी ग्रामीणों ने पैसा इकट्ठा करके 2 करोड़ 11 लाख रुपये नगद और एक कार उसे सम्मान स्वरूप भेंट की है। साथ ही ग्रामीणों ने कार एसयूवी की चाभी धर्मपाल के हाथों में सौंप दी। गांव वालों के अनुसार गांव में भाईचारा बना रहे और प्रत्याशी का हौसला न टूटे इसलिए ग्रामीणों द्वारा यह सम्मान किया गया है। वहीं धर्मपाल ने ग्रामीणों द्वारा दिए गए सम्मान के संदर्भ में कहा कि गांव वालों का सम्मान देखकर वो हार कर भी जीत गए हैं। वे चाहते है कि गांव का समान विकास हो फिर चाहे वो किसी भी सरपंच के हाथों से हो। गांव वालों की ख़ुशी और उनका इस तरह से सम्मान किये जाने से वो काफी खुश हैं । गौरतलब है कि हरियाणा में इस बार तीन चरणों में पंचायत चुनाव हो रहे हैं। दो चरणों में पंचायत चुनाव हो चुके हैं वहीं तीसरे चरण का चुनाव होना अभी बाकी है। ज्यादातर गांवों में सरपंचों की हार जीत का फासला कम ही वोटों का रहा। लेकिन कहीं-कहीं एक-एक वोट से ही सरपंच अपने प्रतिद्वंदी से जीते है।

 

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