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दिल्ली:मुकाबले में ‘फाउल’ होती कांग्रेस,आप को मिल रहा ‘वाकओवर’

 दिल्ली के विधानसभा चुनाव में सिर्फ 3 दिन का समय बाकी है । इस चुनाव पर सबकी नजर लगी है। देश के वरिष्ठ राजनेता दिल्ली परिक्रमा में लगें है। सभी पार्टियों के वरिष्ठ नेताओं का मतदाताओं से डोर टू डोर कैंपेन जारी है । 8 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव में मुख्य पार्टियां चाहती है कि मतदाता उन्हें वोट दें और उनकी सरकार बने। इसके लिए केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और दिल्ली में सत्ता में पिछले 5 साल से जमी हुई आम आदमी पार्टी के साथ ही कॉग्रेस बहुजन समाज पार्टी और कई पार्टियां मतदाताओं को अपने पक्ष में लाने के लिए साम-दाम-दंड-भेद की नीति अपनाए हुए हैं ।
सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी अपने पिछले 5 साल के विकास कार्यों की बदौलत मतदाताओं के बीच में है, तो भाजपा केंद्र में सत्तारूढ़ होने के साथ ही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अपनी सरकार बनाने के लिए मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान किए गए कार्यों का गुणगान कर रही है। जबकि कांग्रेस में भी तत्कालीन दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की दिल्ली में दी गई विकास कार्यों की सौगातो को मुख्य मुद्दा बनाए हुए है।
 फिलहाल सभी पार्टियों ने अपने – अपने घोषणा पत्र जारी कर मतदाताओं को लुभाने के लिए कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी है । आम आदमी पार्टी ने एक बार फिर बिजली, पानी, शिक्षा , स्वास्थ्य पहले की तरह फ्री करने का वादा किया है, तो भाजपा ने भी आम आदमी पार्टी की तरह दिल्ली के निवासियों को फ्री में कई योजनाएं देने का आश्वासन दिया है । अब तक  आ रहे सर्वे के अनुसार आम आदमी पार्टी पहले नंबर पर तो दूसरे पर भाजपा है यानी कि इस बार दिल्ली में आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी में मुकाबला होगा ।
जबकि कांग्रेस के बारे में कहा जा रहा है कि वह सिर्फ  2 – 4 सीटों पर स्थिति को त्रिकोणीय बना रही है । बाकी प्रदेश की 65 – 66 सीटों पर वह कहीं भी मुकाबले में नजर नहीं आ रही है । लोगों का तो यहां तक कहना है कि वर्ष 2015 के चुनाव की तरह ही इस बार भी कॉंग्रेस दिल्ली में बमुश्किल खाता खोल पाएगी । इसके पीछे कांग्रेस की कमजोर होती नीति बताई जा रही है ।
 बताया यह भी जा रहा है कि कांग्रेस की सुप्रीमो सोनिया गांधी ने प्रदेश की सभी 70 सीटों पर प्रत्याशी उतारने के साथ ही वरिष्ठ नेताओं को दिल्ली में चुनाव प्रचार में जुट जाने के निर्देश दिए थे । लेकिन इन निर्देशों का पालन कांग्रेस का कोई वरिष्ठ पदाधिकारी करता हुआ नहीं दिख रहा है । हालात यह है कि न सिर्फ पार्टी के अधिकतर उम्मीदवार नाम मात्र का प्रचार कर रहे हैं बल्कि पार्टी के अधिकतर केंद्रीय नेता प्रचार में उतरे ही नहीं है । पार्टी प्रभारी चाको की माने तो राजबब्बर , पंजाब के सीएम अमरिंदर सिंह और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जैसे कई दिग्गज प्रचार प्रसार कर रहे हैं । लेकिन यह सभी जनता के बीच पैठ बनाने में नाकामयाब हो रहे हैं ।
जबकि दूसरी तरफ कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी बीमार है और एक हॉस्पिटल में उपचार करा रही है । अब देखने में यह आ रहा है कि दिल्ली के चुनावी रण से कॉंग्रेस गायब हो रही है । हालांकि राजनीतिक पंडित इसे पार्टी का अंदरुनी एजेंडा बता रहे हैं । उनके अनुसार कांग्रेस मजबूती से चुनाव लड़ेगी तो दिल्ली में स्थिति त्रिकोणीय हो जाएगी । जिसका फायदा भाजपा को मिल सकता है ।
बहरहाल कांग्रेस जितना कमजोरी से चुनाव लड़ेगी उसका फायदा आम आदमी पार्टी को होगा । कांग्रेस चाहती है कि दिल्ली में भाजपा मजबूती से ना बढे । चाहे आम आदमी पार्टी ही दिल्ली की सत्ता पर काबिज हो जाए । इस तरह दिल्ली में कांग्रेस आम आदमी पार्टी को वाकओवर देती दिखाई दे रही है।  शायद यही वजह है कि कांग्रेस ने दिल्ली में पार्टी के दिग्गजों को नहीं उतारा है ।
 हालांकि दिल्ली के मुस्लिम बहुल इलाकों में कभी कांग्रेस का अधिपत्य रहता था।  लेकिन अब इन इलाकों में कांग्रेस बिछड़ती नजर आ रही  हैं । खासकर ओखला (शाहीन बाग) से लेकर सीलमपुर, मुस्तफाबाद, बल्लीमारान और मटिया महल जैसे इलाकों में मुस्लिम मतदाताओं पर कांग्रेस की पकड़ कमजोर होती जा रही है। जबकि यहां आम आदमी पार्टी अपनी पैठ बना रही हैं ।
शाहीन बाग के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी को अल्पसंख्यकों का साथ मिल रहा है । दिल्ली के मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण हो रहा है । पहले जहां यह मत कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में बट जाते थे । लेकिन इस बार वह आम आदमी पार्टी की तरफ एकतरफा जाता हुआ दिखाई दे रहा है । दिल्ली में फिलहाल कांग्रेस तीसरे नंबर पर दिख रही है । दिल्ली में गिनती की 4 – 5 सीटों को छोड़कर वह कहीं भी फाइट करती नहीं दिखाई दे रही है ।
 फिलहाल देखा जाए तो कांग्रेस गांधीनगर सीट पर दिल्ली के पूर्व मंत्री अरविंद सिंह लवली लड़ाई को त्रिकोणीय बना रहे हैं । यहां यह भी उल्लेखनीय है कि अरविंद सिंह लवली अब तक के अपने सारे चुनाव जीतते रहे है । हालांकि 2015 में वह चुनाव नहीं लड़े थे । इसी के साथ ही कांग्रेस के पूर्व मंत्रियों में डॉ एके वालिया कृष्णा नगर से मजबूती से चुनाव लड़ रहे हैं ।
जबकि जंगपुरा में तरविंदर सिंह मारवाह आम आदमी पार्टी को टक्कर देते दिखाई दे रहे हैं । इसके अलावा आम आदमी पार्टी से कांग्रेस में आई अलका लांबा जरूर चांदनी चौक में अपना जलवा कायम किए हुए हैं । कांग्रेस की उपरोक्त चार – पांच सीटों के अलावा प्रदेश में कहीं भी मजबूत स्थिति नहीं बताई जा रही है । इससे लगता है कि कांग्रेस एक बार फिर अपना 2015 का इतिहास दिल्ली में दोहरा रही है ।

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