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दीप सिद्धू ने किसान नेताओं को दी धमकी, कहा पोल खोली तो दिल्ली से भागते नजर आओगे

गणतंत्र दिवस पर किसान ट्रैक्टर रैली परेड के दौरान लाल किले पर उपद्रव मचाने के आरोपी अभिनेता और गायक दीप सिंधु ने आखिर अपनी चुप्पी तोड़ ही दी है । दीप सिद्धू किसान नेताओं के निशाने पर आ गए थे  । लाल किले पर हुई तोड़फोड़ और झंडा फहराने के मामले पर किसान नेताओं ने दीप सिंधु को ही दोषी बताकर गेंद उस के पाले में ही डाल दी है । इससे दीप सिद्धू आक्रोश में है और किसान नेताओं की पोल खोलने की धमकी दे रहे हैं।

फिलहाल , दीप सिद्धू ने एक फेसबुक लाइव के जरिए अपनी भड़ास निकाली है और कहा है कि जो नेता मुझ पर आरोप लगा रहे हैं अगर मैंने उनकी पोल खोल दी तो वह दिल्ली से भागते ही नजर आएंगे। सिद्धू ने साथ में यह भी कहा है कि जब लाल किले पर हजारों लोग इकट्ठा हो गए थे तो उनको संभालने वाले नेता कहीं दिखाई नहीं दिए। ऐसे में वहां मौजूद लोगों ने उन्हें आगे किया और कहा कि वह भीड़ का नेतृत्व करें ।

उन्होंने भीड़ को संभालने की बहुत कोशिश की। लेकिन भीड़ नहीं समझी। दीप सिद्धू ने कहा कि उन्हें मजबूरी में लाइव आना पड़ा ।क्योंकि मेरे खिलाफ नफरत फैलाई जा रही है,  तथा बहुत झूठ फैलाया जा रहा है। मैं इतने दिनों से सब सहन कर रहा था। क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि हमारे साझा संघर्ष को कोई नुकसान पहुंचे। लेकिन अब स्थिति बहुत चिंताजनक हो गई है। ऐसे में मुझे सामने आना जरूरी हो गया था।

उन्होंने कहा कि 25 तारीख की रात को ही जिन किसान नेताओं ने पंजाब से हजारों नौजवानों को दिल्ली की परेड में शामिल होने का न्योता देकर बुलाया था वह बार-बार मंच से बड़े बड़े ऐलान करते रहे और घोषणाएं करते रहे। लेकिन जब पंजाब के नौजवान दिल्ली आ गए तो उनको सरकार की ओर से एक रूट पर जाने को कहा गया जो उन्हें मंजूर नहीं था । आखिर वह रूट से अलग जाकर लाल किले पर चले गए । जहां उन्होंने किसानों का और धार्मिक झंडा फहराया । साथ ही वह यह भी कहते हैं कि तिरंगे झंडे को उन्होंने बिल्कुल भी नहीं छुआ ना उसका अपमान किया।

दीप सिद्धू ने आगे बताया कि जब वह लाल किले पर पहुंचे तब तक गेट टूट चुका था। उसमें हजारों की भीड़ शामिल हो गई थी। मैं बहुत देर बाद पहुंचा । जिस रोड से मैं पहुंचा हूं उस पर ट्रैक्टर पहले से ही खड़े थे। वहां किले के अंदर मैंने देखा तो कोई किसान नेता मुझे नजर नहीं आया। खासकर वह किसान नेता जो मंच से बड़े-बड़े एलान करते देखे गए थे। उन्होंने कहा था कि हम दिल्ली की गर्दन पर घुटना रख देंगे। लेकिन वहां पर सब नदारद रहे । इस बीच कुछ मेरे पंजाब के युवा साथियों ने मुझे आगे बुलाया और कहा कि वह भीड़ का नेतृत्व करें । वहां दो झंडे पड़े थे । एक किसानी झंडा और दूसरा निशान साहिब। हमने सरकार के समक्ष रोष जताने के लिए दोनों झंडे वहां लगा दिए । हमने तिरंगे को नहीं हटाया। हमें कोई डर नहीं है। क्योंकि हमने कुछ गलत नहीं किया है।

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